कलाकार वही होता है जो अपने को किसी भी रूप में ढाल ले. अभिनेता जैकी श्रौफ ऐसे ही कलाकार हैं जिन्हें दर्शकों ने विविध रोल्स में देखा है. यही वजह है कि आज भी वे फिल्मों में सक्रिय हैं.

अभिनय के क्षेत्र में 4 दशक गुजार चुके अभिनेता जैकी श्रौफ ने हिंदी के अलावा 13 दूसरी भाषाओं की फिल्मों में काम किया और अपनी एक अलग छवि बनाई है. अभी तक उन्होंने 250 फिल्में की हैं. साल 1987 में आई फिल्म ‘स्वामीदादा’ से उन्होंने अपना अभिनय कैरियर शुरू किया, पर निर्माता निर्देशक सुभाष घई की फिल्म ‘हीरो’ से उन्हें प्रसिद्धि मिली. वे इस दौर को सब से अच्छा मानते हैं, जिस में हर तरह की फिल्में बन रही हैं. इन दिनों फिल्म ‘रोमियो अकबर वाल्टर’ को ले कर वे चर्चा में है.

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अभिनय के इस दौर को आप कैसे मानते हैं? यह पूछने पर वे कहते हैं, ‘‘यह सब से अच्छा समय है, जब आप को काम मिल रहा है, लोग आप को सम्मान देते हैं. ऐसे माहौल में हर दिन सुबह काम पर जाने की इच्छा होती है, इसे बना कर रखना है. कभी मुझे लगा नहीं कि मेरी उम्र हो गई है. अभी भी काम करते वक्त वही एहसास होता है, अच्छा काम करने का वही जनून रहता है. अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र जैसे कलाकार आज भी अपनी भूमिका को बखूबी करते हैं. दर्शक उन्हें आज भी देखना पसंद करते हैं, जो अच्छी बात है.’’

अभिनय की अपनी जर्नी को कैसे देखते हैं और फिल्म इंडस्ट्री पहले से कितनी बदली है? इन सवालों के जवाब में जैकी बताते हैं, ‘‘अभिनय के क्षेत्र में मेरी अच्छी जर्नी रही है. मैं ने 250 फिल्में की हैं. जिन में अच्छेबुरे सारे अनुभव मैं ने महसूस किए. कभी सोचा नहीं था कि यहां तक पहुंच पाऊंगा. मैं दिन में 2 से 3 फिल्मों की शूटिंग करता था, कभी जंगलों में बांसुरी बजा रहा होता था, तो कभी जूही चावला के साथ रोमांटिक सौंग करता था. तब सिनेमा हौल की संख्या कम थी.

‘‘देवानंद और शम्मी कपूर की फिल्मों को देखने के लिए मौर्निंग शो में जाता था. आज हौल बहुत हैं, इसलिए हर तरह की फिल्में देखने का मौका मिलता है. फिल्मों के अलावा वैब सीरीज, टीवी धारावाहिक, छोटी फिल्में आदि सब बन रही हैं. इस से टैक्नीशियन से ले कर सारे लोगों को काम मिल रहा है और उन का पेट भर रहा है. यह बहुत बड़ी बात है. आज कोई खाली नहीं है, सब को कुछ न कुछ काम मिलता है. यह सब से अच्छा दौर चल रहा है.

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‘‘मैं आज के बच्चों की मेहनत को और काम के प्रति उन की लगन को भी देख रहा हूं. आज बहुत प्रतियोगिता है. हर दिन व्यक्ति को अपनेआप को प्रूव करना पड़ता है. मैं खुश हूं कि मुझे आज भी अच्छी भूमिकाएं मिल रही हैं. फिल्म ‘रोमियो अकबर वाल्टर’ में मैं ने रौ एजेंट के भाई की भूमिका निभाई है, जो बहुत अच्छा रहा, क्योंकि इस में सारे शहीदों को एक बार याद करने और उन्हें जानने का मौका मिला है. फिल्मों के जरिए ही ऐसे लोगों को दर्शक देख पाते हैं और उन्हें एक सम्मान भी मिलता है.’’

आप की बायोपिक बने तो उस में किसे देखना पसंद करेंगे? इस सवाल पर वे कहते हैं, ‘‘मैंने सोचा नहीं है, लेकिन मैं अपने बेटे टाइगर श्रौफ को ही इस में देखना पसंद करूंगा, क्योंकि वह बहुतकुछ मुझ से मिलता है और वह अच्छा कर भी पाएगा.’’

क्या बेटे के साथ कभी फिल्मों में आने की इच्छा है और किस फिल्म के रीमेक में काम करना चाहते हैं? इस पर वे अपना मत जाहिर करते हैं, ‘‘बहुत इच्छा है, पर वैसी कहानी होनी चाहिए, जिसमें दोनों को अभिनय करने का मौका मिले. फिल्म ‘गर्दिश’ के रीमेक में काम करना चाहता हूं.’’

आप किस तरह के पिता हैं और बच्चों को कितनी आजादी देते हैं? इस पर उन का कहना है, ‘‘मैंने बचपन में उन्हें संभाला है. अभी वे जानते हैं कि वे क्या कर रहे हैं. ऐसे में उन्हें अधिक सीख नहीं देता. इतना जरूर है कि जरूरत पड़ने पर वे मुझ से बात कर लेते हैं. मैं उन्हें पूरी आजादी देता हूं. टाइगर सारे स्टंट पूरी निगरानी में करता है, इसलिए मुझे कोई डर नहीं लगता.’’

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आप एक सुलझे हुए कलाकार कहलाते हैं, किसी भी भूमिका को आप सहजता से कर लेते हैं, इस की वजह क्या मानते हैं? पूछने पर वे मुसकराते हैं, फिर कहते हैं, ‘‘मैं पानी की तरह बहता हुआ कलाकार हूं, जिस ने जो रंग मिला दिया, उसी रंग में रंग जाता हूं. ऐसा मेरी पहली गर्लफ्रैंड आयशा के साथ भी हुआ. मैंने उस के रंग को बदलने की कोशिश नहीं की. उन के रंग में ही खुद को रंग डाला. असल में, मैं एक आलू की तरह हूं, जिसे किसी भी सब्जी में मिलाया जा सकता है. कभी फिल्म ‘देवदास’ तो कभी ‘मिशन कश्मीर’, जो जैसे आया, उसे करता गया.’’

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