‘हम ने देखी हैं इन आंखों की महकती खुशबू

हाथ से छू के इसे रिश्तों का इलजाम न दो

सिर्फ एहसास है ये रूह से महसूस करो

प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो...’

फिल्म ‘खामोशी’ का यह गीत उस कवि की प्रतिभा का दर्शाता है जिस ने अपने गीतों से फिल्मी दुनिया में बतौर लेखक अपना अलग मुकाम हासिल किया. ‘प्यार कोई बोल नहीं, प्यार आवाज नहीं इक खामोशी है, सुनती है, कहा करती है...’ कुछ ऐसे ही एहसास की बर्फ अपने हाथ पर रख एक इंसान विभाजन के पहाड़ को छाती पर ले कर पाकिस्तान से रावी नदी के उस पार से यहां आया और जिंदगीभर उस विभाजन की सारंगी बजाता रहा, गुनगुनाता रहा.

Digital Plans
Print + Digital Plans
Tags:
COMMENT