शाहरुख़ खान अपने फैंस के लिए एक हिंदी मूवी लेकर आएं हैं 'फैन'. यह एक ऐसे लड़के गौरव चानना की कहानी है, जो फिल्म सुपरस्टार आर्यन खन्ना का जबरा फैन है और उस का इतना बड़ा दीवाना है कि उस से मिलने दिल्ली से मुंबई जा पहुंचता है. वहां उसे तब निराशा हाथ लगती है, जब वह लाख कोशिशों के बाद भी अपने हीरो से नहीं मिल पता है और उस से इस हद तक नफरत करने लगता है कि खुद विलेन बन जाता है.

ऐसा नहीं है कि इस तरह की फ़िल्में हिंदी सिनेमा में पहले नहीं बनी हैं. पर उन मे थोड़ा सा अंतर यह था कि हीरो और उस का फैन दोनों अलगअलग किरदार होते थे. साल 1971 में ऋषिकेश मुखर्जी ने 'गुड्डी' नामक फिल्म बनाई थी, जिस में जया भादुड़ी बच्चन को सुपरस्टार धर्मेंद्र की फैन के तौर पर दिखाया गया था. इस फिल्म में जया ने एक स्कूल की लड़की का किरदार निभाया था, जो बड़े परदे पर धर्मेंद्र के कारनामों से इतनी प्रभावित हो जाती है की उन्हें अपना सुपर हीरो समझ लेती है. उसे लगता है कि यह सुपर हीरो चाहे तो कुछ भी कर सकता है, लेकिन धर्मेंद्र खुद उस से मिल कर यह बताने की कोशिश करते हैं कि वे भी एक सामान्य आदमी इनसान हैं और फ़िल्मी दुनिया की चमकधमक इतनी भी उजली नहीं है.

ऐसा ही कुछ हिंदी फिल्म 'बॉंबे टाकीज' में भी देखने को मिला था. अनुराग कश्यप ने अपनी कहानी में अमिताभ बच्चन के साथ उन के फैंस के रिश्ते को बड़ी खूबी से दिखाया था.

इस फिल्म की कहानी का मुख्य किरदार है इलाहाबाद का एक नौजवान विजय, जिसे उस का बीमार पिता एक मुरब्बा दे कर कहता है कि वह मुंबई जाए और अमिताभ बच्चन को वह मुरब्बा चखाए. उस पिता ने एक बर्नी में बंद कर के उस मुरब्बे को कई दिनों से संभाल कर रखा था. पिता को यकीन था कि  अगर अमिताभ बच्चन उस मुरब्बे को चख लेंगे और बाकी बचा मुरब्बा वह खुद खा लेगा, तो उस की बीमारी ठीक हो जाएगी.

विजय मुंबई जाता है और अमिताभ बच्चन के घर के बाहर डेरा डाल लेता है, जिस से कि वह अपने पिता का सपना पूरा कर सके.

दरअसल, फिल्म कलाकारों और उन के प्रशंसकों के बीच कभीकभार एक अजीब सा रिश्ता बन जाता है कि स्टार की हर अदा फैन को उस का  दीवाना बनाती जाती है. फैन अपने हीरो या हीरोइन में अपना अक्स देखने लगता है. वह हर काम उसकी तरह करने कि कोशिश करता है, कभीकभार तो उस से प्यार तक करने लगता है. उसकी हर छोटी से छोटी बात को गांठ बांध लेता है.

अपने ज़माने के सुपर स्टार राजेश खन्ना ने लड़कियों को अपना दीवाना बना रखा था. सुनते हैं कि लड़कियां खून से प्रेम पत्र लिख कर उन को भेजती थीं. कई लड़कियों ने तो उन के नाम का टैटू बना लिया था.

मुंबई घूमने आए बहुत से सैलानी अपने पसंदीदा फिल्म कलाकार का घर देखते हैं. अमिताभ बच्चन, शाहरुख़ खान, सलमान खान के घर के बाहर लोगों का हुजूम लगा रहता है और मौका मिलते ही ये कलाकार भी घर से निकल कर अपने फैंस का शुक्रिया अदा करते हैं.

लेकिन  कई बार फैंस अपनी हद पार कर जाते हैं. कुछ सिरफिरे तो हीरोइनों का पीछा करते हैं. उन के घर तक पहुंच जाते हैं. क्या ऐसे लोगों को फैन कहा जा सकता है? जो अपने पसंदीदा फिल्म सितारे को तकलीफ पहुंचाए वो काहे का फैन. वह तो जबरा नहीं बल्कि ज़बरदस्ती का  फैन ही कहा जाएगा.

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