चार्टर्ड एकाउंटेंट (सीए) बनना कोई आसान नहीं होता. कई लोग सीए बनने की कोशिश करते हैं लेकिन किसी न किसी वजह से सफल नहीं हो पाते. वहीं दूसरी ओर एक परिवार ऐसा भी है, जिस की 5 पीढि़यों से लगातार सीए बन रहे हैं.

उस परिवार में कोई एक-दो नहीं बल्कि 11 सीए हैं. यह परिवार अब लिम्का बुक औफ रिकौर्ड्स और गिनीज बुक औफ वर्ल्ड रिकौर्ड्स में नाम दर्ज कराने जा रहा है. यह परिवार है बिशंभरनाथ चतुर्वेदी का. चतुर्वेदी परिवार मूलरूप से उत्तर प्रदेश के मथुरा का मूल निवासी है.

बरसों पहले यह परिवार मुंबई के कफ परेड इलाके में जा कर बस गया था. सन 1925 में बिशंभरनाथ चतुर्वेदी (बीएन) सीए बने थे. सीए बनने के बाद उन्होंने दिल्ली स्थित एक फर्म में काम शुरू किया. इस के बाद बीएन के बेटे अमरनाथ और दीनानाथ भी सन 1955 में सीए बने.

इन की अगली पीढ़ी में बृजमोहन चतुर्वेदी ने सीए बन कर यह व्यवसाय अपनाया. इसी दौरान उन के भाई मदनमोहन, श्रीकांत चतुर्वेदी और सुबोध चतुर्वेदी अथक परिश्रम के बाद सीए बने.
मदनमोहन के बेटे अपूर्व और ऋषभ ने भी पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए सीए बन कर हिसाबकिताब के व्यवसाय को अपनाया. परिवार की लड़कियां भी पुरुषों से कम नहीं निकलीं. अमरनाथ की बेटी टीना चतुर्वेदी ने सीए की परीक्षा पास कर के परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाया. इस के बाद बृजमोहन चतुर्वेदी की पोती मोहिनी चतुर्वेदी ने भी सीए की परीक्षा पास की.

बृजमोहन चतुर्वेदी अपने समाज और व्यवसायिक क्षेत्र में ‘बीएम’ के नाम से जाने जाते हैं. मुंबई के नरीमन पौइंट में बीएम चतुर्वेदी ऐंड कंपनी का औफिस है. बृजमोहन चतुर्वेदी बताते हैं कि जब उन के दादा बिशंभरनाथ चतुर्वेदी 1925 में सीए बने थे, तो मथुरा में उन के समुदाय के लोगों में सीए बनने की होड़ सी लग गई थी.

फिर हमारे समुदाय के करीब 500 युवक इस पेशे में आए थे. इस समय इसी समुदाय के मुंबई में ही करीब 10 हजार सीए हैं. बीएम कहते हैं कि उन के परिवार की 5 पीढि़यों में 11 सीए हैं, जो अपने आप में एक रिकौर्ड है. परिवार की इस उपलब्धि को वह गिनीज बुक औफ वर्ल्ड रिकौर्ड्स और लिम्का बुक औफ रिकार्ड्स में दर्ज कराने की कोशिश कर रहे हैं.

Tags:
COMMENT