जानकारी

जहर, दहशत और खौफ के साये एहसास से बना एक ऐसा नाम जिस के जबान पर आते ही झुरझुरी छूट जाती है. ‘जहर’ शब्द सुनते ही मन कसैला होना शुरू हो जाता है, क्योंकि जहर से कहीं ज्यादा जहर का मनोविज्ञान बहुत जहरीला यानी डरावना है.

जहर हमेशा मौत का बायस नहीं होता. तमाम अलगअलग स्थितियों, परिस्थितियों में जहर जीवन देते हैं. ये खुशियां भी देते हैं. जी हां, यह मजाक नहीं, सौ फीसदी सच है. आज की तारीख में मैडिकल साइंस अपनी तमाम उन्नति और भावी योजनाओं के लिए एक नहीं, अनेक किस्म के जहर पर निर्भर है क्योंकि जहर जीवन भी दे रहे हैं और इसे खूबसूरत भी बना रहे हैं.

ये कई किस्म के जहर ही हैं जो हमें तमाम असहनीय दर्दों और कई दूसरी भीषण किस्म की तकलीफों से छुटकारा दिलाते हैं. ये सीधे कुदरत से हासिल, कुदरत के कुनबे में मौजूद कई तरह के जहरीले जानवरों से हासिल और इंसानी दिमाग से कारखानों में तैयार किए गए हैं. जहर से बनी आज एकदो नहीं, सैकड़ों दवाइयां हैं जो हमें स्वस्थ रखती हैं और हमारी जिंदगी को आसान व आकर्षक बनाती हैं.

जीवन देता जहर

जहर से बनी दवाइयां हमें सिर्फ जीवन ही नहीं दे रही हैं, बल्कि इस जीवन के प्रतिनिधि शरीर को जहर कई तरीकों से खूबसूरत भी बना रहा है. चेहरे पर बुढ़ापा थोपने वाली ? झुर्रियों को भगा कर जवानी की ताजगी देने वाला ऐसा ही एक इंजैक्शन जहर से बनता है, नाम है बोटोक्स.

जी हां, सूचनाओं और अफवाहों की कौकटेल में आप ने तमाम सैलिब्रिटीज का नाता इस इंजैक्शन से पड़ा होगा. यह बेहद खतरनाक जहर से ही बनता है. बोटोक्स का इंजैक्शन बहुत महंगा होता है, फिर भी सुंदर यानी जवान दिखने की चाहत से सस्ता होता है. यही कारण है कि नोटों की संख्या जिन्हें परेशान नहीं करती वे इस का भरपूर आनंद लेते हैं.

वास्तव में यह इंजैक्शन बेहद तीखा जहर बौटुलिनम टौक्सिन है. यह इंसान की जानकारी में आया आज तक का सब से जहरीला पदार्थ है. इस के खतरनाकपन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस के कुछ चम्मच से ही एक करोड़ लोगों का काम तमाम हो सकता है. अगर समूचे धरतीवासियों की टें बुलाना हो, तो बस, इस की कुछ किलो मात्रा ही काफी है. इतना खतरनाक होने के बावजूद इस का जबरदस्त आकर्षण है.

महिलाएं बुढ़ापा दूर करने वाले इस के प्रभाव से सम्मोहित हैं. ब्रिटेन और अमेरिका में हुए एक सर्वे के मुतबिक जिन महिलाओं को इस की खासीयत पता है, उन में 85 प्रतिशत महिलाएं बोटोक्स का इस्तेमाल कर के एक बार फिर से अपने चेहरे को  झुर्री रहित बनाना चाहती हैं.

लेकिन इस भुलावे में रहने की जरूरत नहीं है कि यह केवल चेहरे की झुर्रियां हटाने के कारण ही इतना दुर्लभ पदार्थ है. इसके और भी असंख्य फायदे हैं.

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सब से कीमती उत्पाद

इंसान द्वारा निर्मित संसार का यह सब से खतरनाक पदार्थ है. फिर भी इस के महंगे होने की चर्चा कभी नहीं होती.

जब भी यह सुर्खियां बटोरता है, अपने खतरनाक होने के खौफ की ही बटोरता है. इस के खतरनाक होने के चलते ही हर किसी को इस के उत्पादन की छूट नहीं है. बौटुलिनम टौक्सिन आज भी सैन्य नियंत्रण में ही बनाया जाता है. यह करोड़ों नहीं, अरबों नहीं, खरबों रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिकता है.

9,938 अरब रुपए प्रतिकिलो के हिसाब से यह बिकता है. यह रेट कम या ज्यादा हो सकता है. यह दुनिया का आज तक का सब से महंगा उत्पाद है. फिर भी बोटोक्स की मांग में जरा भी कहीं कोई कमी नहीं है.

जहर के एलडी 50 पैमाने, जिस में पदार्थ की वह मात्रा देखी जाती है जिस से किसी की मौत हो सकती है.इस पैमाने के मुताबिक, 0.000001 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम को निबटाने के लिए काफी है. इस का मतलब यह हुआ कि 70 किलोग्राम के किसी आदमी को मारने के लिए इस की सिर्फ 0.00007 ग्राम की जरूरत पड़ेगी. इसे चाहें तो यों भी कहा जा सकता है कि 70 किलो के आदमी को मारने के लिए हवा की एक क्यूबिक मिलीमीटर से भी कम की जरूरत पड़ेगी.

इस की बहुत ज्यादा ख्याति जवान बनाने के संबंध में इसलिए है क्योंकि यह चेहरे की ? झुर्रियों को पलक ? झपकते ही हटा देता है. दरअसल, यह जहर झुर्रियां पैदा करने वाली धमनियों को मार देता है. नतीजतन, आगे काफी दिनों के लिए ये रुक जाती हैं. लेकिन इस काम में इस की बहुत छोटी सी मात्रा इस्तेमाल होती है. एक ग्राम की करोड़वीं मात्रा को सेलाइन में घोल कर इस का इस्तेमाल किया जाता है.

बौटुलिनम टौक्सिन नाम के इस खतरनाक जहर को सिर्फ चेहरे या गले की ?झुर्रियों को हटाने भर के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता, बल्कि इस का इस्तेमाल और भी तमाम तरह की स्वास्थ्य दिक्कतों को दूर करने के लिए किया जाता है. मसलन, आंखों का भेंगापन दूर करने के लिए, माइग्रेन, अत्यधिक पसीना आना और मूत्राशय की तकलीफ भी शामिल है.

जानकारों के मुताबिक, यह विभिन्न किस्म की 2 दर्जन से ज्यादा स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों को दूर करने में काम आता है. जबकि इस के व्यापक उपयोगों की तलाश जारी है. रसायनविदों की मानें तो 21वीं सदी के अंत तक इस खतरनाक जहर के कम से कम 200 से ज्यादा उपयोग इंसान को मालूम हो चुके होंगे.

बेहद उपयोगी एक जहर

कीमती मगर बेहद उपयोगी जहर की फेहरिस्त में एक और बिलियन डौलर जहर है. नाम है मैरी एन कौटन. इसे उच्च रक्तदाब निरोधक दवा कैप्टोप्रिल के रूप में कहीं ज्यादा आसानी से जाना जाता है. इसे सांप के जहर पर किए गए अध्ययनों के बाद प्रयोगशाला में विकसित किया गया है. इसी से एक्सेनेटाइड भी बना है जिसे बाएट्टा भी कहा जाता है. यह जहर टाइप-2 डायबिटीज का प्रभावी इलाज है. इसे दक्षिणपश्चिमी अमेरिका और मैक्सिको में रहने वाली विशाल जहरीली छिपकली जिला मौनस्टर की लार से तैयार किया जाता है.

हालांकि, जहर के चमत्कारिक उपयोगों ने हमारे स्वास्थ्य परिदृश्य को बदल कर रख दिया है, फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हम ने जहर को महज उन के स्वास्थ्य संबंधी प्रयोगों के आधार पर वर्गीकृत किया तो

यह बहुत सरलीकरण होगा, क्योंकि आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान पर जहर का असर सिर्फ इलाज प्रदान करने से कहीं अधिक है.

लालच का फंदा, बदनाम हुआ जहर

विक्टोरिया युग के ब्रिटेन में बीमा एक उभरता हुआ उद्योग था. लेकिन आसानी से हासिल होने वाले बीमे के पैसे की वजह से बहुत सी हत्याएं हो रही थीं. शुरू में तो किसी को कुछ ज्यादा समझ में नहीं आया, लेकिन जब यह सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा था तो स्कौटलैंड यार्ड पुलिस के कान खड़े हुए. उस ने सही अनुमान लगाया कि इन मौतों में कोई न कोई तो रहस्य है क्योंकि ये ज्यादातर मौतें जहर के कारण हुई थीं.

सब से मशहूर मामला एक महिला मैरी एन कौटन का था जिस पर 1873 में कई हत्याओं के लिए मुकदमा चलाया गया था. इन मोहतरमा ने 4 बार शादी की थी और उन के 3 पति, जिन का अच्छाखासा बीमा था, मर गए थे.

शायद चौथे को तीनों के पास पहुंचने में देर न लगती अगर उसे यह हठ न आ गया होता कि वह बीमा नहीं कराएगा. मैरी ने भी उस की जिद के साथ उसे जीने दिया और बीमा से उसे बख्श दिया. मगर चौथे पति को बख्श देने का यह कतई मतलब नहीं था कि बीमा नाम की उसे सोने का अंडा देने वाली जो मुरगी हाथ लगी थी, उसे उस ने जंगल में छोड़ दिया हो. उस का खेल जारी था. रहरह कर उस के सभी 10 बच्चे पेट संबंधी किसी रहस्यमयी बीमारी से मर गए.

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मगर हैरानी की बात यह थी कि बेहद दुखद मौत मरने वाले इन सभी बच्चों का अच्छाखासा बीमा मौजूद था. मगर रुकिए, मैरी के परिवार वालों के बुरे वक्त का अभी अंत नहीं हुआ था. उस की मां, उस की भाभी, बूआ, सब की रहरह कर मौत हो गई. इन सभी मामलों में उसे जबरदस्त आर्थिक फायदा हुआ.

आधुनिक दवा उद्योग के लिए इतिहास में जो साल मील का पत्थर माना जाता है यानी 1872 तक मैरी के 16 नजदीकी परिजन और तमाम दोस्त या दूर के पारिवारिक सदस्य मारे जा चुके थे. बस, पूरे परिवार में एक बच्चा बच गया था, 7 साल का सौतेला बेटा चार्ल्स. मैरी ने उसे एक स्थानीय अनाथालय को देने की कोशिश की लेकिन उस ने लेने से इनकार कर दिया. इस के कुछ दिनों बाद ही चार्ल्स भी मर गया.

इस से उस अनाथालय के प्रबंधक को थोड़ा शक हो गया. उसे लगा जरूर दाल में कुछ काला है. हालांकि तब तक उसे नहीं पता था कि पूरी दाल ही काली है. बहरहाल, उस ने पुलिस को सूचना दे दी. पुलिस को पहले से ही मैरी पर कुछ शक था. सो, पुलिस को यह निष्कर्ष निकालने में कोई ज्यादा वक्त नहीं लगा कि इन तमाम मौतों के पीछे कहीं न कहीं मैरी का ही हाथ है. प्रारंभिक जांच के बाद ही पुलिस ने जान लिया कि मैरी ने संबंधित तमाम लोगों को जहर दे कर मारा है. पुलिस ने माना कि मैरी ने इन सब को आर्सेनिक दे कर मारा है.

आर्सेनिक एक खनिज है और एक जहर के रूप में इस का इस्तेमाल अद्वितीय है. यह स्वादरहित होता है. बहुत ही जल्द गरम पानी में घुल जाता है और एक आउंस के सौवें हिस्से से भी कम की इस की मात्रा जानलेवा होती है. वास्तव में 19वीं शताब्दी में इसे चूहों के जहर के रूप में बेचा और इस्तेमाल किया जाता था. यह सस्ता था और आसानी से उपलब्ध था.

उस वक्त फोरैंसिक विज्ञान अपनी शैशावस्था में था. फिर भी आर्सेनिक के लिए अच्छा टैस्ट मौजूद था. मृत लड़कों के पेट से लिए गए नमूनों की जांच की गई तो पता चला कि उन की मृत्यु आर्सेनिक की घातक मात्रा से हुई है. मैरी को उन की हत्या का दोषी पाया गया और उसे डरहम जेल में फांसी दे दी गई जहर हमेशा मौत का बायसनहीं होता. तमाम अलगअलग स्थितियों, परिस्थितियों में जहर जीवन देते हैं. ये खुशियां भी देते हैं. जी हां, यह मजाक नहीं, सौ फीसदी सच है. आज की तारीख में मैडिकल साइंस अपनी तमाम उन्नति और भावी योजनाओं के लिए एक नहीं, अनेक किस्म के जहर पर निर्भर है क्योंकि जहर जीवन भी दे रहे हैं और इसे खूबसूरत भी बना रहे हैं.

ये कई किस्म के जहर ही हैं जो हमें तमाम असहनीय दर्दों और कई दूसरी भीषण किस्म की तकलीफों से छुटकारा दिलाते हैं. ये सीधे कुदरत से हासिल, कुदरत के कुनबे में मौजूद कई तरह के जहरीले जानवरों से हासिल और इंसानी दिमाग से कारखानों में तैयार किए गए हैं. जहर से बनी आज एकदो नहीं, सैकड़ों दवाइयां हैं जो हमें स्वस्थ रखती हैं और हमारी जिंदगी को आसान व आकर्षक बनाती हैं.

जीवन देता जहर

जहर से बनी दवाइयां हमें सिर्फ जीवन ही नहीं दे रही हैं, बल्किइस जीवन के प्रतिनिधि शरीर को

जहर कई तरीकों से खूबसूरत भी बना रहा है. चेहरे पर बुढ़ापा थोपनेवाली झुर्रियों को भगा कर जवानी की ताजगी देने वाला ऐसा ही एक इंजैक्शन जहर से बनता है, नाम है बोटोक्स.

जी हां, सूचनाओं और अफवाहों की कौकटेल में आप ने तमाम सैलिब्रिटीज का नाता इस इंजैक्शन से पड़ा होगा. यह बेहद खतरनाक जहर से ही बनता है. बोटोक्स का इंजैक्शन बहुत महंगा होता है, फिर भी सुंदर यानी जवान दिखने की चाहत से सस्ता होता है. यही कारण है कि नोटों की संख्या जिन्हें परेशान नहीं करती वे इस का भरपूर आनंद लेते हैं.

वास्तव में यह इंजैक्शन बेहद तीखा जहर बौटुलिनम टौक्सिन है. यह इंसान की जानकारी में आया आज तक का सब से जहरीला पदार्थ है. इस के खतरनाकपन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस के कुछ चम्मच से ही एक करोड़ लोगों का काम तमाम हो सकता है. अगर समूचे धरतीवासियों की टें बुलाना हो, तो बस, इस की कुछ किलो मात्रा ही काफी है. इतना खतरनाक होने के बावजूद इस का जबरदस्त आकर्षण है.

महिलाएं बुढ़ापा दूर करने वाले इस के प्रभाव से सम्मोहित हैं. ब्रिटेन और अमेरिका में हुए एक सर्वे के मुतबिक जिन महिलाओं को इस की खासीयत पता है, उन में 85 प्रतिशत महिलाएं बोटोक्स का इस्तेमाल कर के एक बार फिर से अपने चेहरे को झुर्रिरहीत बनाना चाहती हैं.

लेकिन इस भुलावे में रहने की जरूरत नहीं है कि यह केवल चेहरे की झुर्रियां हटाने के कारण ही इतना दुर्लभ पदार्थ है. इस के और भी असंख्य फायदे हैं.

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सब से कीमती उत्पाद

इंसान द्वारा निर्मित संसार का यह सब से खतरनाक पदार्थ है. फिर भी इस के महंगे होने की चर्चा कभी नहीं होती.

जब भी यह सुर्खियां बटोरता है, अपने खतरनाक होने के खौफ की ही बटोरता है. इस के खतरनाक होने के चलते ही हर किसी को इस के उत्पादन की छूट नहीं है. बौटुलिनम टौक्सिन आज भी सैन्य नियंत्रण में ही बनाया जाता है. यह करोड़ों नहीं, अरबों नहीं, खरबों रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिकता है.

9,938 अरब रुपए प्रतिकिलो के हिसाब से यह बिकता है. यह रेट कम या ज्यादा हो सकता है. यह दुनिया का आज तक का सब से महंगा उत्पाद है. फिर भी बोटोक्स की मांग में जरा भी कहीं कोई कमी नहीं है.

जहर के एलडी 50 पैमाने, जिस में पदार्थ की वह मात्रा देखी जाती है जिस से किसी की मौत हो सकती है.

इस पैमाने के मुताबिक, 0.000001 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम को निबटाने के लिए काफी है. इस का मतलब यह हुआ कि 70 किलोग्राम के किसी आदमी को मारने के लिए इस की सिर्फ 0.00007 ग्राम की जरूरत पड़ेगी. इसे चाहें तो यों भी कहा जा सकता है कि 70 किलो के आदमी को मारने के लिए हवा की एक क्यूबिक मिलीमीटर से भी कम की जरूरत पड़ेगी.

इस की बहुत ज्यादा ख्याति जवान बनाने के संबंध में इसलिए है क्योंकि यह चेहरे की  झुर्रियों को पलक  झपकते ही हटा देता है. दरअसल, यह जहर झुर्रियां पैदा करने वाली धमनियों को मार देता है. नतीजतन, आगे काफी दिनों के लिए ये रुक जाती हैं. लेकिन इस काम में इस की बहुत छोटी सी मात्रा इस्तेमाल होती है. एक ग्राम की करोड़वीं मात्रा को सेलाइन में घोल कर इस का इस्तेमाल किया जाता है.

बौटुलिनम टौक्सिन नाम के इस खतरनाक जहर को सिर्फ चेहरे या गले की झुर्रियों को हटाने भर के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता, बल्कि इस का इस्तेमाल और भी तमाम तरह की स्वास्थ्य दिक्कतों को दूर करने के लिए किया जाता है. मसलन, आंखों का भेंगापन दूर करने के लिए, माइग्रेन, अत्यधिक पसीना आना और मूत्राशय की तकलीफ भी शामिल है.

जानकारों के मुताबिक, यह विभिन्न किस्म की 2 दर्जन से ज्यादा स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों को दूर करने में काम आता है. जबकि इस के व्यापक उपयोगों की तलाश जारी है. रसायनविदों की मानें तो 21वीं सदी के अंत तक इस खतरनाक जहर के कम से कम 200 से ज्यादा उपयोग इंसान को मालूम हो चुके होंगे.

बेहद उपयोगी एक जहर

कीमती मगर बेहद उपयोगी जहर की फेहरिस्त में एक और बिलियन डौलर जहर है. नाम है मैरी एन कौटन. इसे उच्च रक्तदाब निरोधक दवा कैप्टोप्रिल के रूप में कहीं ज्यादा आसानी से जाना जाता है. इसे सांप के जहर पर किए गए अध्ययनों के बाद प्रयोगशाला में विकसित किया गया है. इसी से एक्सेनेटाइड भी बना है जिसे बाएट्टा भी कहा जाता है. यह जहर टाइप-2 डायबिटीज का प्रभावी इलाज है. इसे दक्षिणपश्चिमी अमेरिका और मैक्सिको में रहने वाली विशाल जहरीली छिपकली जिला मौनस्टर की लार से तैयार किया जाता है.

हालांकि, जहर के चमत्कारिक उपयोगों ने हमारे स्वास्थ्य परिदृश्य को बदल कर रख दिया है, फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हम ने जहर को महज उन के स्वास्थ्य संबंधी प्रयोगों के आधार पर वर्गीकृत किया तो यह बहुत सरलीकरण होगा, क्योंकि आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान पर जहर का असर सिर्फ इलाज प्रदान करने से कहीं अधिक है.

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