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जहर, दहशत और खौफ के साये एहसास से बना एक ऐसा नाम जिस के जबान पर आते ही झुरझुरी छूट जाती है. ‘जहर’ शब्द सुनते ही मन कसैला होना शुरू हो जाता है, क्योंकि जहर से कहीं ज्यादा जहर का मनोविज्ञान बहुत जहरीला यानी डरावना है.

जहर हमेशा मौत का बायस नहीं होता. तमाम अलगअलग स्थितियों, परिस्थितियों में जहर जीवन देते हैं. ये खुशियां भी देते हैं. जी हां, यह मजाक नहीं, सौ फीसदी सच है. आज की तारीख में मैडिकल साइंस अपनी तमाम उन्नति और भावी योजनाओं के लिए एक नहीं, अनेक किस्म के जहर पर निर्भर है क्योंकि जहर जीवन भी दे रहे हैं और इसे खूबसूरत भी बना रहे हैं.

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