Karwa Chauth Murder: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के अल्हागंज क्षेत्र स्थित चौरसिया गांव में करवा चौथ के पर्व से ठीक एक दिन पहले एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई. आर्थिक तंगी, रोजगार की अनिश्चितता और पतिपत्नी के बीच उपजे मतभेदों ने एक हंसतेखेलते परिवार को पूरी तरह उजाड़ दिया.
अवनीश और उस की पत्नी सुशीला के बीच पिछले कुछ समय से कलह चल रही थी. आजीविका की तलाश में अवनीश लुधियाना में काम करता था, लेकिन वहां अकेलेपन और बच्चों की पढ़ाई की चिंता के चलते सुशीला अपने तीनों बच्चों, सोहन (6 वर्ष), मेनका (4 वर्ष) और रोहन (डेढ़ वर्ष) को ले कर करीब 3 महीने पहले अपने मायके चली गई थी.
मायके में शुरुआती कुछ दिनों के आदरसत्कार के बाद सुशीला को वहां भी परायेपन और मानसिक घुटन का सामना करना पड़ा.
परिवार और बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए अवनीश अपनी जिद छोड़ कर पत्नी को मनाने ससुराल पहुंचा. मायके वालों की शर्तों और बच्चों के भविष्य के वास्ते दोनों के बीच सुलह हो गई और वे वापस शाहजहांपुर लौट आए. सुशीला आने वाले करवा चौथ के व्रत की तैयारियों में जुटी थी और बच्चों के साथ एक नई शुरुआत की उम्मीद कर रही थी.
घटना वाले दिन यानी करवा चौथ से ठीक एक दिन पहले, रोजगार के सिलसिले में शहर (दिल्ली या लुधियाना) जाने को ले कर पतिपत्नी में फिर से तीखी बहस छिड़ गई. गुस्से और तनाव में आ कर अवनीश ने कथित तौर पर कुल्हाड़ी से सुशीला पर हमला कर दिया, जिस से उस की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई.
खून से लथपथ मम्मी के शव के पास उस के छोटे बच्चे फूटफूट कर रोते रहे, जिन्हें यह तक नहीं पता था कि उन की मम्मी अब इस दुनिया में नहीं रही. वारदात के बाद आरोपी पति अपने सब से बड़े बेटे को साथ ले कर मौके से फरार हो गया.
सूचना मिलते ही पुलिस और मायके पक्ष के लोग मौके पर पहुंचे. मायके वालों ने हत्यारे पति की गिरफ्तारी और बच्चे की बरामदगी तक शव ले जाने से इनकार कर दिया. 8 साल तक पति की लंबी उम्र के लिए करवा चौथ का व्रत रखने वाली सुशीला का जीवन अंतत: पारिवारिक कलह और प्रशासनिक उपेक्षा की भेंट चढ़ गया. पीछे छोड़ गया केवल मासूम बच्चों के रोने की गूंज और एक कभी न भरने वाला दर्द.
खून से सने हाथों और दहशत में कांपते कदमों के साथ अंधेरे में गायब होता अवनीश और पीछे रोतेबिलखते बच्चों की वह अनसुनी पुकार… क्या पुलिस की गिरफ्त से बच पाएगा वहशी बना यह पति? क्या मायके वालों का इंसाफ का यह संग्राम दिला पाएगा मासूमों को न्याय? खौफ, लाचारी और सिसकियों के बीच लिपटी इस दर्दनाक कहानी को सत्यकथा के दिसंबर अंक में पढि़ए. Karwa Chauth Murder




