Human Survival Instinct: जीवन का रास्ता न केवल काफी लंबा है और टेढ़ामेढ़ा है इस में हर क्षण कुछ ऐसा होता रहता है जिस की उम्मीद या प्लाङ्क्षनग नहीं होती. किस समय जीवन ऐसे चौराहे पर खड़ा हो जाए जहां पता न चले कि किस ओर जाया जाए या ऐसे गड्डे के किनारे खत्म होता दिख जाए जिस की गहराई नहीं मालूम यह किसी को नहीं पता.
जीवन में किसी अपने का, जिस पर जीवन टिका हो, जो हरदम साथ रह रहा हो, अचानक चल जाना एक दुखदायी ही नहीं रोशनी से अंधेरे में खो जाने का सा क्षण होता है. यह मां हो सकती है, पिता हो सकता है, साथी हो सकता है, बेटाबेटी हो सकते हैं एक उम्र बीत जाने पर सब को छोड़ जाता है पर बीच में जो चला जाए चाहे मौत के कारण या किसी और कारण और उसके लौटने की गुंजाइश न हो जीवन को एकदम खाली कर सकता है. मानव ने सदियों में इस आपदा से समाझौता करना सीख लिया है.
पहले यह प्राकृतिक कारणों से होता था. बीमारी से होता था. पशुओं द्वारा आक्रमणों से होता था. फिर राजाओं और धर्मों की बारी आई उन्होंने बड़े वायदे किए कि वे हरेक को बचा पाएंगे, बीमारी से भी, पशुओं से भी, प्रवृति के कहर से भी, आसपास के दुश्मन से भी.
असल में वे सब से बड़े कारण रहे मौतों और बीच मझधार में छुड़वाने में. कुछ धर्मों ने घर के एक साथी को छीन लिया जैसा वृद्ध के साथ हुआ जब वह पत्नी के छोड़ भला और बाद में सैकड़ों बौध विहार बन गए जिन में घरो से निकले लोग रहते रहे, अपनों को छोड़ कर अपने के प्रति जिम्मेदारियों से भाग कर.
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