Russia Ukraine War: हर देश और समाज में युद्धों का खूब महिमामंडन किया जाता है और हर समाज में धर्म और राजा युद्ध को महान बताते हैं. हिंदू धर्म के देवीदेवता और आराध्य तो हर समय उन युद्धों में लगे रहते थे जो अपनों या अपने जैसों के खिलाफ लड़े गए थे. उन युद्धों में जीत की कोरी कल्पित कहानियों को ले कर हम एकदूसरे का सिर ही नहीं फोड़ रहे बल्कि अपनी कमाई का एक मोटा हिस्सा उन्हें दे देते हैं जो इन युद्ध करने वालों की रक्षा करने का वादा करते हैं.

रूस आजकल यूक्रेन से युद्ध करने में जुटा है. और्थोडौक्स चर्च के कहने पर शुरू किया गया यह युद्ध बेमतलब का था. यूक्रेन छोटा सा देश है जो कभी आजाद रहा तो कभी आसपास के किसी बड़े देश की गुलामी करता रहा. वहां और्थोडौक्स चर्च की एक अलग शाखा है जिस ने यूक्रेनियों को बहुत बड़े रूस से लडऩे को तैयार किया.

अब रूस के लौहपुरुष माने जाने वाले व्लादिमीर पुतीन संकट में हैं. यूक्रेनी कौमेडियन वोलोदिमिर जेलेंस्की की छोटी मगर कर्मठ सेना ने रूसियों को चने चबवा दिए हैं. पुतिन अब अपने देश में बेगाने हो गए हैं. लोग सवाल उठाने लगे हैं कि उन के बच्चों को तो फ्रंट पर जबरन लड़नेमरने को भेजा जा रहा है मगर पुतिन, रूस के स्पोक्समैन दिमित्री पेस्कोव और प्रमुख स्टेट मीडिया एंकर व्लादिमीर सोलोब्योव के बेटेबेटियां फ्रंट पर क्यों नहीं हैं? इन अफसरों, नेताओं के बच्चे सुरक्षित जगहों से व्यापार करने में लगे हैं.

रूस में आजादी तो कभी नहीं थी पर जो थोड़ीबहुत छूट आज के इंटरनैट युग में कंपल्सरी है वह भी बंद न हो जाए, इसलिए रेडियो बिकने फिर शुरू हो गए हैं ताकि इंटरनैट बंद होने पर जनता का संपर्क बना रहे.

रूसी खजाना खाली हो चुका है. तेल का संकट पैदा हो गया है क्योंकि यूक्रेनी ड्रोनों ने रिफाइनरी और औयल स्टोरेजों पर हमला कर उन्हें जला दिया है. रूस ककी राजधानी मास्को तक सुरक्षित नहीं है. कहा जाता है कि पुतिन की लौहपुरुष की छवि अब दयनीय हो गई है जो मरने के डर से मरा जा रहा है ठीक वैसे ही जैसे नरेंद्र मोदी की स्थिति भारत में हो गई है.

इस युद्ध का कोई लाभ नहीं है. द्वितीय विश्वयुद्ध करोड़ों की जानें ले गया और उस से ज्यादा विज्ञान व तकनीक से पैदा हुए सुखों को उस ने 10-15 साल तक पूरी दुनिया से छीन लिया.

आज भी हर देश अपनी आय का 6-7 फीसदी युद्ध की तैयारी में लगा देता है जो मेहनत की कमाई को अंधेरे व गहरे में कुएं में डालने जैसा है. युद्ध की प्रेरणा देना देशभक्ति कहा जाता है जबकि हकीकत में यह जनद्रोह है. सेनाओं पर किया गया खर्च धर्म पर किए गए खर्च की तरह जनता के प्रति क्रूरता है. आज रूसी जनता कराह रही, यूक्रेनी जनता सिर की छत ढूंढ़ रही है, इजराइली भयभीत हैं, गाजापट्टी टूट सी गई है, ईरान को तहसनहस कर दिया गया है. यह सब क्यों, क्योंकि धर्म ने युद्धों की महिमा का बखान किया और वार मशीन ने धर्म की रक्षा की. Russia Ukraine War

 

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