Life After Divorce: तलाक के बाद एक्स के नजदीकियों से कैसे संबंध रखे जाएँ और रखे भी जाएँ या नहीं इसे लेकर कोई गाइड लाइन किसी ने जारी नहीं की है तो जाहिर है यह निहायत ही व्यक्तिगत बात है जो हालातों पर निर्भर करती है ये संबंध इस बात पर भी निर्भर होते हैं कि तलाक हुआ कैसे था अगर विवादों और फसादों के चलते हुआ था तो इन्हें निभाने में कठिनाई होती है लेकिन अगर स्वस्थ तरीके और सहमति से तलाक हुआ था तो एक्स के नजदीकी ज्यादा दूर नहीं लगते.
`स्टिल फ्रेंड्स लिविंग हैप्पीली आफ्टर.. .इवन इफ योर मेरिज फाल्स अपार्ट` किताब अमेरिका की मशहूर लेखिका बारबरा क्विक की लिखी हुई है जिसमे खासतौर से तलाक को बहुत कडवा और दर्दनाक माना गया है. अपनी किताब में बारबरा कुछ वास्तविक कहानियों के जरिए एक दूसरे पहलू की तरफ पाठकों का ध्यान खींचती हैं. यह पहलू उन कुछ कपल्स की आपबीती है जिन्होंने तलाक के बाद भी दोस्ती, सभ्यता और परिवार को बनाए रखा.
बिलाशक तलाक के बाद सहज रहना आसान नहीं रह जाता जिसकी एक बड़ी वजह पूर्वाग्रही सामाजिक नजरिया है. खासतौर में भारत में जहाँ तलाक एक संगीन गुनाह करार दे दिया गया है. लेकिन अच्छी बात यह है कि नए दौर के कपल्स अब इस आरोप से खुद को मुक्त रखते बिना किसी परवाह या हिचक के तलाक की तरफ बढ़ रहे हैं. वे बेहतर जानते समझते हैं कि समाज को हमारी परेशानियों और तनाव से कोई सरोकार नहीं. वह तो सिर्फ धर्म के इशारे पर नाचते तलाक पर अपनी एकतरफा राय कायम किए बैठा है.
इस राय का एक और एक तरफा पहलू यह है कि तलाकशुदा महिला अपने पूर्व व वर्तमान जन्मो के कर्मों का फल भोग रही है. बिना पति के उसकी हालत एक कटी पतंग सरीखी जैसी हो जाती है जिसे लूटने का हक हर किसी को है. और तलाकशुदा का पारिवारिक के साथ साथ सामाजिक जीवन भी खत्म सा हो जाता है. हकीकत यह है कि यह हो नहीं जाता बल्कि एक साजिश के तहत जानबूझ कर कर दिया जाता है. जिससे विवाह नाम की संस्था और व्यवस्था की अहमियत बनी रहे और तलाकशुदा महिला अहिल्या सी श्रापित जिन्दगी जिए.जिसकी हालत देखकर दूसरी महिलाएं बजाय तलाक का रास्ता चुनने के पति व ससुराल बालों के जुल्म सहती उनकी चाकरी में लगी रहें.
इसमें कोई शक नहीं कि तलाक के बाद अक्सर महिला खुद को अकेला सा और समाज से अलग थलग पाती है. तलाक की त्रासदी उसे बहुत भीतर तक से तोड़ जाती है. अब लेकिन हालात बदल रहे हैं, भले ही वे बहुत संतोषजनक न हों. जैसे शादी के बाद महिला खुश रहती है वैसे ही तलाक के बाद क्यों नहीं रह पाती. जबकि तलाक कोई गुनाह या पाप नहीं बल्कि सुकून से जीने का क़ानूनी लाइसेंस है. असल में तलाकशुदा महिलाओं को दूसरा लाइफ पार्टनर आसानी से नहीं मिलता वजह हरेक फर्स्ट तो फर्स्ट सेकंड हेंड `मर्द` को भी वर्जिन महिला चाहिए. यह और बात है कि आज के परिवेश में यह नामुमकिन सी बात है.
इन हालातों से बचने यह बेहद जरुरी हो जाता है कि तलाकशुदा महिला तलाक की त्रासदी और दुःख दर्दो को भूलते जिंदगी जिन्दादिली से जिए. यानी खुश और तनाव मुक्त रहते जैसे उसका मन करे वैसे लाइफ एन्जॉय करे..
इस एन्जोयंनेस का एक तरीका यह भी है कि एक्स के परिवारजनों दोस्तों और परिचितों से संबंध और सपर्क अपनी तरफ से न तोड़े जाएँ. और न ही यह मान लिया जाए कि तलाक एक्स के पूरे परिचित दायरे से हो गया है. इसलिए उन्हें एक बार टटोल लेना हर्ज की बात नहीं जो सालों तक भाभी भाभी कहते आपको सम्मान भी देते थे और तलाक पर दुखी अगर नहीं थे तो खुश भी नहीं थे.
एक्स के परिचितों से संबंध व संपर्क बनाए रखने का एक फायदा यह भी होता है कि आपकी भड़ास उपयुक्त जगह पर निकलती है. लेकिन तलाक या उससे पहले की बातों से अव्वल तो जितना हो सके बचना चाहिए लेकिन बात कभी छिड़ ही जाए तो हालातों पर चर्चा में बहुत एहतियात रखी जाना जरुरी है.
झूठे आरोप लगाना, प्राइवेसी उजागर करना या अंतरंग चेट बगैरह पब्लिक करने से आपको कोई फायदा नहीं होने बाला उलटे इमेज बिगड़ सकती है. मकसद एक स्वस्थ मित्रता और संबंध होना चाहिए जिससे मन हल्का रहे. वजह ये वो लोग हैं जिनके साथ आपने लम्बा वक्त गुजारा है त्यौहार साथ मनाए हैं, पार्टियों में साथ शिरकत और मस्ती की है और सुख दुःख में एक दूसरे के भागीदार रहे हैं.
इसका यह मतलब भी नहीं कि संबंध बनाए रखने अतिरिक्त प्रयास किए जाएँ बल्कि बेहतर तो यह होता है कि त्योहारों, जन्मदिन और शादी की सालगिरह बगैरह पर उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स के जरिए औपचारिक शुभकामनाए दे दी जाएँ. अगर सामने से ठीक ठाक रेस्पांस मिले तो आगे की भूमिका तय की जा सकती है.
याद रखें तलाक पति से हुआ है पूरी दुनिया से नहीं हुआ है जो सबसे कन्नी काट ली जाए यही गलती अधिकतर पत्नियाँ करती हैं यह एक तरह की गिल्ट ही है. जिसके चलते वे खुद को एक तयशुदा दायरे में समेट कर रख लेती हैं. अगर तलाक स्वस्थ ढंग से हुआ है यानी दोनों की सहमति से बिना किसी विवाद फसाद के हुआ है तो एक्स से भी सम्पर्क रखना कोई गुनाह नहीं. यह ठीक है कि ऐसे तलाको की दर न के बराबर है जिनमे पत्नी ने पति के साथ साथ ससुराल बालों से भी संबंध रखे हों.
बेंगलुरु में रह रही शुभ्रा का तलाक पति एश्वर्य से हुए कोई तीन साल बीत चुके हैं तलाक की वजह पैसा खर्च करने की दोनों की अलग अलग आदतें थीं. जब दोनों में से कोई अपनी आदत बदलने राजी नहीं हुआ तो दोनों ने हिन्दू मेरिज एक्ट की धारा 13 ( बी ) के तहत परस्पर सहमति से तलाक ले लिया और अलग रहने लगे. शुभ्रा बताती है मैं वक्त मिलने पर कभी कभी एश्वर्य के बुजुर्ग पेरेंट्स से मिलने चली जाती हूँ, उनके हाल चाल पूछ लेती हूँ. हमारे तलाक का अफ़सोस उन्हें भी है लेकिन मुझे आया देख उनकी बूढ़ी हड्डियों में जान आ जाती है.
पति और उसके नजदीकियों से दूर रहने की एक अहम वजह क़ानूनी खामियां भी हैं जो यह कहती हैं कि तलाक चाहिए तो पति पत्नी एक दूसरे पर जायज नाजायज आरोप लगाएं. यानी तलाक की वजह पैदा कर कोर्ट के सामने पेश करें. इससे होता यह है कि दोनों झूठे आरोपों के चलते एक दूसरे को दुश्मन समझने लगते हैं. और फिर एक दूसरे को फूटी आँख भी नहीं सुहाते. इसका इकलौता हल यही है कि बिना कोई आरोप मढ़े तलाक हो और जल्दी हो जिससे बैर बढ़े नहीं.
याद यह भी रखना चाहिए कि तलाक के साथ सब कुछ खत्म नही हो जाता बल्कि एक नई जिंदगी इंतजार कर रही होती है.. अतीत को भूलना मुश्किल जरुर होता है लेकिन नामुमकिन नहीं होता. जरूरत तलाक को महज एक घटना मानना और समझना है जिसमे पति पत्नी दोनों की कोई गलती अक्सर नहीं होती. एक दूसरे से पटरी न बैठना, स्वभाव मेल न खाना, कुछ आदतों को बर्दाश्त न कर पाना जैसी बातें बेहद सहज है.
और इससे बाहर निकलने के लिए ही तलाक कानून वजूद में लाया गया है. जिसका पूरा श्रेय संविधान और उससे बने कानूनों को जाता है. सरिता के सितम्बर ( प्रथम ) 2024 के अंक में विस्तार से इन कानूनों के बारे में लेख `कानूनों से 1947 के बाद बदलाव की हवा` शीर्षक से प्रकाशित किया गया था. रही बात एक्स के परिचितों और रिश्तेदारों से नजदीकी की तो यह हर्ज की बात नहीं बशर्ते इसे बतौर भड़ास इस्तेमाल न किया जाए .कितना अच्छा और सुखद हो अगर आप या कोई और बारबरा क्विक की किताब का एक पात्र बनना चाहे. Life After Divorce




