नौकरी छोड़ कर करोड़पति बनने की कहानियां तो खूब सुनीं लेकिन फेल होने वालों का क्या?
Startup Reality: के एल बंसल, भारत की सब से बड़ी पाइप कंपनी के मालिक, पहले एक आम इंजीनियर की जौब करते थे जिसे छोड़ कर, आज 4,700 करोड़ का एम्पायर बना चुके हैं. ऐसे ही तमाम उदाहरण आप को सोशल मीडिया पर मिल जाएंगे जो ऐसा दावा करते हैं कि अपनी लाखों की सेफ जौब छोड़ कर वे करोड़ों के मालिक बन गए हैं. वे करोड़पति बने कैसे? क्या एक ही बार में सफलता मिल गई थी? नौकरी छोड़ने के बाद बिजनैस नहीं चला तो आगे की क्या प्लानिंग थी? इन सब सवालों के जवाब कोई नहीं जानता, न ही कोई बात करता है. दिखती है तो, बस, सफलता.
कोई कहता है कि 9 से 5 की नौकरी छोड़ कर उस ने अपना पैशन चुना और अब जिंदगी पहले से ज्यादा खुशहाल है. किसी की पोस्ट में लिखा होता है, “अगर आप रिस्क नहीं लेंगे तो जिंदगीभर दूसरों के लिए काम करते रह जाएंगे.”
ऐसी कहानियां पढ़ कर लगता है कि शायद हमें भी बोरिंग नौकरी छोड़ देनी चाहिए. आखिर कब तक नौकरी की वही दिनचर्या, बौस की डांट, टारगेट और महीने की तय सैलरी? क्यों न नौकरी छोड़ कर कुछ अपना किया जाए?
लेकिन ऐसी पौलिश्ड कहानियों के बीच एक जरूरी सवाल अकसर कोई नहीं सोचता कि जिन लोगों ने नौकरी छोड़ी और उन का स्टार्टअप नहीं चला, उन का क्या हुआ?
वे लोग कहां हैं जिन्होंने अपनी अच्छीखासी नौकरी छोड़ दी, बचत स्टार्टअप में लगा दी, कई महीने या साल मेहनत की और आखिर में बिजनैस बंद करना पड़ा? उन लोगों की कहानियां सोशल मीडिया पर उतनी दिखाई क्यों नहीं देतीं?
सफलता की कहानी में असफल लोगों की जगह नहीं होती
मान लीजिए 100 लोगों ने अपनी नौकरी छोड़ कर बिजनैस या स्टार्टअप शुरू किया. उन में से 5 लोग बहुत सफल हो गए. उन की कमाई कई गुना बढ़ गई. वे सोशल मीडिया पर अपनी कहानी साझा करेंगे. इंटरव्यू देंगे, पौडकास्ट पर जाएंगे और बताएंगे कि उन्होंने कैसे नौकरी छोड़ी, रिस्क लिया और सफलता हासिल की.
लेकिन बाकी 95 लोग? हो सकता है कुछ वापस नौकरी में चले गए हों. कुछ ने अपनी बचत गंवाई हो. कुछ पर कर्ज हो गया हो. कुछ ने बिजनैस बंद कर दिया हो और कुछ आज भी अपने फैसले से उबरने की कोशिश कर रहे हों. लेकिन उन के पास वायरल होने वाली कहानी नहीं है. यही सोशल मीडिया की सब से बड़ी समस्या है. वहां सिर्फ सक्सैस दिखाई देती है.
हम भी उन्हीं लोगों को ज्यादा देखते हैं जो सफल हुए. असफल लोगों की आवाज कम सुनाई देती है. इसलिए हमें लगता है कि नौकरी छोड़ कर स्टार्टअप करना ज्यादातर लोगों के लिए काम करता है.
‘नौकरी छोड़ो और अपना काम करो’ सुनने में अच्छा लगता है
आजकल ‘Follow Your Passion’ यानी अपने पैशन को फौलो करने की सलाह बहुत दी जाती है. यह सोच जेनजी में सब से ज्यादा देखने को मिलती है. जेनजी वह पीढ़ी है जो किसी के और्डर्स पर काम नहीं करना चाहती. इस जेनरेशन वाले खुद का स्टार्टअप करने में भरोसा करते हैं ताकि पहले ही दिन उन्हें सीईओ की गद्दी मिल जाए. सोशल मीडिया पर सक्सैस स्टोरीज देख कर इन का मनोबल और बढ़ जाता है. इस में बुराई नहीं है लेकिन सिर्फ पैशन होने से बिजनैस सफल नहीं होता.
अगर किसी को खाना बनाना पसंद है तो इस का मतलब यह नहीं कि वह रैस्टोरैंट चलाने के लिए तैयार है. अगर किसी को वीडियो बनाना पसंद है तो इस का मतलब यह नहीं कि वह सफल कंटैंट क्रिएटर बन जाएगा. अगर किसी को कपड़े डिजाइन करना पसंद है तो इस का मतलब यह नहीं कि वह फैशन ब्रैंड चला पाएगा.
पैशन आप को काम शुरू करने की एनर्जी दे सकता है लेकिन बिजनैस चलाने के लिए उस से कहीं ज्यादा चीजों की जरूरत होती है. मार्केट की समझ, पैसे का मैनेजमैंट, ग्राहक, सेल्स, मार्केटिंग, टीम और सब से जरूरी यह समझ कि लोग वास्तव में आप के प्रोडक्ट या सर्विस के लिए पैसे देंगे या नहीं.
पूजापाठ वाली बात यहां बिलकुल फिट बैठती है
कई बार लोग कहते हैं, “पूजापाठ करो, भगवान फल जरूर देंगे.” लेकिन सिर्फ पूजा करने से फसल नहीं उगती. खेत में बीज डालना पड़ता है, पानी देना पड़ता है, मेहनत करनी पड़ती है. मौसम खराब हो सकता है, फसल खराब हो सकती है और पूरी मेहनत के बावजूद नुकसान भी हो सकता है. बिजनैस भी कुछ ऐसा ही है.
“मैं अपने पैशन को फौलो कर रहा हूं” एक शुरुआत हो सकती है, लेकिन यह सफलता की गारंटी नहीं है.
आप को मार्केट में उतरना होगा, ग्राहक समझने होंगे, अपनी गलतियां स्वीकार करनी होंगी और जरूरत पड़ने पर अपना आइडिया बदलना भी होगा.
Quibi- बड़ा आइडिया, बड़ा निवेश, लेकिन असफलता
2020 में लौंच हुआ यह वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफौर्म मोबाइल पर छोटे वीडियो कंटैंट के लिए बनाया गया था. इस के पीछे हौलीवुड के बड़े नाम और अरबों डौलर का निवेश था. कंपनी ने इसे बड़े स्तर पर लौंच किया और उम्मीद थी कि लोग मोबाइल पर छोटे एपिसोड देखने के लिए पैसे देंगे. लेकिन उम्मीद के मुताबिक यूजर नहीं आए. लौंच के कुछ महीनों बाद ही कंपनी गंभीर संकट में आ गई और वह बंद हो गई. यानी, कभीकभी अच्छी तैयारी के बावजूद बिजनैस फेल हो सकता है.
दूसरे व्यक्ति की सफलता आप के लिए फिट नहीं
सोशल मीडिया पर सफलता की कहानी अकसर अधूरी होती है. मान लीजिए, कोई व्यक्ति कहता है, “मैं ने 25 लाख की नौकरी छोड़ी और आज अपने बिजनैस से सालाना 1 करोड़ रुपए कमा रहा हूं.” यह सुनने में अच्छा है लेकिन कुछ सवाल और पूछे जाने चाहिए. क्या 1 करोड़ उस का मुनाफा है या टर्नओवर? बिजनैस शुरू करने में कितने पैसे लगे? उस के पास पहले से कितनी बचत थी? क्या उस के परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत थी? उस के कितने असफल प्रयोग हुए जिन्हें वह सोशल मीडिया पर नहीं बताता?
नौकरी सिर्फ सैलरी नहीं देती
नौकरी को अकसर लोग सिर्फ महीने की सैलरी से जोड़ कर देखते हैं. लेकिन नौकरी आप को बहुत सी दूसरी चीजें भी देती है- अनुभव, नैटवर्क, इंडस्ट्री की समझ, प्रोफैशनल स्किल्स, टीम के साथ काम करने का अनुभव और कई बार बिजनैस की बारीकियां समझने का मौका. कई सफल उद्यमियों ने सीधे कालेज से निकल कर कंपनी शुरू नहीं की. उन्होंने पहले नौकरी की, इंडस्ट्री को समझा और फिर अपना काम शुरू किया. इसलिए नौकरी को समय की बरबादी समझना भी सही नहीं है.
असफलता की भी कहानी बनाना जरूरी है
हमें सोशल मीडिया पर ऐसी कहानियों की भी जरूरत है जिन में अंत में सफलता नहीं मिली. कोई बताए कि उस ने 15 लाख रुपए लगाए और बिजनैस बंद करना पड़ा. कोई बताए कि उस ने नौकरी छोड़ी लेकिन 6 महीने बाद नौकरी में लौटना पड़ा. कोई बताए कि उस का आइडिया अच्छा था लेकिन ग्राहक नहीं मिले. ऐसी कहानियां भी उतनी ही जरूरी हैं, क्योंकि उन से दूसरे लोग सीख सकते हैं. अगर हम सिर्फ सफल लोगों की बातें सुनेंगे तो हमें लगेगा कि हर बड़ा रिस्क अंत में बड़ा रिटर्न देता है. जबकि, असल जिंदगी में ऐसा नहीं होता. Startup Reality





