Caste Discrimination: अचानक से अनामिका धम्म से सोफे पर पसर गई. उस की आंखें भर आईं. उसे महसूस हुआ कि आज भी 2026 में जातिवाद का दानव जिंदा है.

इतने में अनामिका के मोबाइल की घंटी घनघनाने लगी. विजय था.

“क्या हुआ?” अनामिका ने बेमन से पूछा.

“अरे सुनो, मैं थोड़ी देर में तुम्हारे पास आ रहा हूं. मतलब सिर्फ 5 मिनट में पहुंच जाऊंगा,” दूसरी तरफ से विजय की आवाज आई.

“तुम भी न… पहले क्यों नहीं बताया? मेरा मूड औफ है,” अनामिका एकदम से तमतमाई.

“पर अभी तो तुम्हारी डेट भी दूर है, तो मूड स्विंग क्यों,” विजय ने कहा.

“यह फालतू का जोक मत मारो. मिल कर बात करते हैं,” अनामिका बोली.

थोड़ी देर में विजय अनामिका के फ्लैट पर पहुंच गया. पर अनामिका अभी भी अपसैट थी.

“क्या हुआ है? इतनी उदास क्यों हो?” विजय ने पूछा.

“यार, थोड़ी देर नीचे सोसाइटी के गार्डन में बैठते हैं,” अनामिका बोली.

“चलो,” विजय ने कहा.

गार्डन में एक बैंच पर वे दोनों जा बैठे. विजय के पूछने पर अनामिका ने साहिल की खुदकुशी वाली बात बताई.

“पूरा मामला है क्या?” विजय ने पूछा.

अनामिका बोली, “आईआईटी बौम्बे में एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमैंट में दूसरे साल में पढ़ने वाला एक छात्र साहिल वाकोड़े 18 सितंबर, 2026 की शाम अपने कमरे में मरा पाया गया. इस घटना के बाद स्टूडैंट्स ने एजुकेशन सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी और सिक्योरिटी का मुद्दा उठाते हुए कैंपस में प्रदर्शन किया.

“पवई पुलिस थाने में इस मामले में आकस्मिक मौत की रिपोर्ट दर्ज की गई और मुंबई पुलिस ने जांच शुरू कर दी. मारे गए छात्र के मातापिता ने फैकल्टी टीचर समेत संस्थान के बड़े अफसरों और संबंधित अफसरों के खिलाफ पवई पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई.

“दर्ज शिकायत में कहा गया कि संस्थान के डायरैक्टर और फैकल्टी टीचर ने छात्र को जातिसूचक गालियां दीं और मानसिक रूप से परेशान किया. उन के बेटे को आत्महत्या के लिए उकसाया गया.”

“इस पर आईआईटी बौम्बे का क्या जवाब आया?” विजय ने जिज्ञासा जाहिर की.

“आईआईटी बौम्बे फैकल्टी फोरम के अध्यक्ष प्रोफैसर राजकुमार पंत ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ‘हर संस्थान की तरह हमारे यहां भी छात्रों के कल्याण के लिए एक समर्पित एससीएसटी सैल है. मैं ने इस बारे में संस्थान के डिप्टी डायरैक्टर प्रोफैसर रविंद्र गुडी से बात की और उन्होंने मुझे बताया कि एससीएसटी सैल के मुताबिक, पिछले 3 या 4 महीनों में दिवंगत छात्र की ओर से सैल से संपर्क करने की बिलकुल कोई कोशिश नहीं की गई थी.

“‘हमारा सिर्फ इतना कहना है कि हम शिक्षक हैं और संस्थान के निर्देशों के अनुसार अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं और संस्थान की प्रक्रियाओं का पालन कर रहे हैं. प्रोफैसर दुल्ला ने भी यही किया. कुछ ऐसे हालात होते हैं, जहां किसी को सख्ती से कार्रवाई करनी पड़ती है और उन्होंने नियमों के अनुसार सख्ती से कार्रवाई की. लेकिन मैं व्यक्तिगत रूप से आश्वस्त हूं कि वे ऐसे इनसान नहीं हैं, जो इस तरह के काम में शामिल होंगे. मुझे इस दावे में कोई दम नजर नहीं आता.

“‘मेरा मानना है कि मुंबई क्राइम ब्रांच इस की जांच कर रही है, इसलिए इस मामले पर हमारे पास कहने के लिए कुछ नहीं है.”‘

“छात्रों ने तो प्रदर्शन भी किया था,” विजय बोला.

“हां. समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों में से एक ने छात्रों की सिक्योरिटी और एजुकेशन सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी पर सवाल उठाए.

“उन्होंने कहा, ‘मैं आईआईटी बौम्बे में इलैक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के तीसरे साल में पढ़ रहा हूं. आज हम विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, क्योंकि हमारे कालेज के एक छात्र ने आत्महत्या कर ली है. हम इस मामले में प्रशासन से जवाबदेही और ट्रांसपेरेंसी की मांग को ले कर विरोध कर रहे हैं.’

“उन्होंने आगे कहा, ‘यह इस तरह की पहली घटना नहीं है. इस साल ऐसी 4 घटनाएं हो चुकी हैं, जिन में से 2 पिछले 2 महीनों में हुई हैं. हमें इस बारे में पूरी तरह से अंधेरे में रखा गया है कि ऐसा क्यों हो रहा है या इस के क्या कारण हैं.’

“विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मांग की, ‘हमारी एकमात्र मांग यह है कि डीन, निदेशक और प्रशासन एक रिपोर्ट पेश करें. इस में उन्हें मामले की जांच करनी चाहिए, जवाबदेही और ट्रांसपेरेंसी पक्की करनी चाहिए और यह गारंटी देनी चाहिए कि उन के कार्यकाल के दौरान ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी.’

“साहिल की मां ने अपने बेटे को सताए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि मेरे बेटे को मारा गया, सताया किया गया. मुझे इंसाफ चाहिए. वहीं प्रदर्शन कर रहे कुछ छात्रों ने दावा किया कि परीक्षा में मोबाइल इस्तेमाल करने की घटना के बाद साहिल को एक साल के निलंबन की धमकी दी गई थी.

“छात्रों का कहना था कि ऐसी कार्रवाई होने पर उन्हें होस्टल छोड़ कर परिसर के बाहर रहना पड़ सकता था और इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने में भी देरी हो सकती थी. हालांकि, इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है और आईआईटी की ओर से छात्र के खिलाफ ऐसी किसी कार्रवाई की बात से इनकार किया गया है.

“घटना की जानकारी फैलते ही शुक्रवार देर शाम बड़ी संख्या में छात्र परिसर में जुट गए. उन्होंने प्रशासन से मामले की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने और घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की. हालात को देखते हुए परिसर में पुलिस बल तैनात किया गया.

“डीसीपी दत्तात्रय नलावड़े ने बताया कि छात्र की मौत के बाद कुछ छात्रों ने अपनी मांगों को ले कर प्रदर्शन किया.

“बता दूं कि आईआईटी मुंबई परिसर में पिछले तकरीबन 7 महीनों में छात्र की मौत की यह तीसरी घटना बताई जा रही है. फरवरी में सैकंड ईयर के एक छात्र की होस्टल में मौत हुई थी. इस के बाद जुलाई, 2026 में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में 20 साल के बीटेक के सैकंड ईयर के एक छात्र ने भी आत्महत्या कर ली थी.”

विजय ने थोड़ा सोचा और कहा, “वैसे, प्रोफैसर सूर्यनारायण दुल्ला के बारे क्या जानकारी मिली है अभी तक? उन का क्या पक्ष है इस मामले पर? उन्हें तो निलंबित कर दिया गया है…”

अनामिका बोली, “जहां तक मैं ने खबरों में पढ़ा है, प्रोफैसर सूर्यनारायण दुल्ला इलैक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से बीटैक, आईआईटी बौम्बे से एमटैक और आईआईटी दिल्ली से पीएचडी करने के बाद लंबे समय से पढ़ाई, रिसर्च और संस्थान की प्रशासनिक जिम्मेदारियों में अपनी भूमिका निभा रहे हैं.

“आईआईटी बौम्बे में 20 साल के छात्र साहिल साहिल वाकोड़े की मौत के बाद से ही जिस प्रोफैसर का नाम सब से ज्यादा सुर्खियों में रहा वह है सूर्यनारायण दुल्ला, जिन्हें अब निलंबित कर दिया गया है.

“लेकिन साहिल की मौत से पहले परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल को ले कर मामला सामने आया था. गौरतलब है कि जब शुक्रवार को छात्र साहिल को मिड सैमेस्टर परीक्षा के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था, तो उस वक्त प्रोफैसर सूर्यनारायण दुल्ला परीक्षा में बतौर इनविजिलेटर ड्यूटी कर रहे थे.”

“अनामिका, यह बहुत ही सैंसिटिव मामला है. एक होनहार बच्चा जो इतने शानदार इंस्टीट्यूट में पढ़ रहा था अब इस दुनिया में नहीं है. जेईई एडवांस की परीक्षा पास करना इतना आसान नहीं है. साहिल की आल इंडिया रैंक भी देखी जानी चाहिए.”

अनामिका बोली, “मैं ऐसे ही चैक कर रही थी. देश में अभी 23 आईआईटी हैं. सब से पुराना आईआईटी खड़गपुर है जो साल 1951 में शुरू हुआ था और सब से नए आईआईटी धारवाड़, भिलाई, गोवा, जम्मू, तिरुपति, पलक्कड़ हैं जो साल 2015-16 में शुरू हुए.

“सरकार ने संसद में बताया था कि पिछले 10 साल में आईआईटी में छात्रों की कुल संख्या 65,000 से बढ़ कर तकरीबन एक लाख, 35,000 हो गई है. वैसे, देशभर में कुल 8,876 इंजीनियरिंग कालेज हैं, जिन में से 6,611 निजी और 2,265 सरकारी संस्थान हैं. इन में तकरीबन 15 लाख छात्र आवेदन करते हैं या कह सकते हैं कि पढ़ने आते हैं.”

“तुम ने तो अच्छाखासा आंकड़ा जमा किया हुआ है. लेकिन क्या ऐसा नहीं हो सकता कि हमारे देश में सारी पढ़ाई सरकारी शिक्षा संस्थानों में हो. सब के लिए मुफ्त पढ़ाईलिखाई और समान अवसर. इस से रिजर्वेशन की अहमियत भी अपनेआप खत्म होती जाएगी. जो पढ़ने का इच्छुक है उसे मौका मिले और जो ज्यादा ऊंची पढ़ाई नहीं करना चाहता उस के पास कोई बहाना न हो कि उसे मौका नहीं दिया गया, फिर चाहे वह किसी भी जाति का क्यों न हो?” विजय ने अपने मन की बात रखी.

अनामिका बोली, “सारा खेल ही यही है. यहीं से ब्राह्मणवाद का दबदबा शुरू होता है. पैसे वाले सवर्ण कभी नहीं चाहेंगे कि जो वंचित समाज उन के दरवाजे पर खड़ा होने के लायक नहीं है वह कालेज में उन के बगल वाली सीट पर बैठे और वह भी बिना फीस दिए. पर चूंकि सरकार की नीतियां हैं कि हर किसी को पढ़नेलिखने का हक होना चाहिए तो वे मनमसोस कर रह जाते हैं, पर उन की जबान नहीं रुकती है.

“जो लोग पैसे के दम पर पेपर लीक करा देते हैं उन्हें लगता है कि इंजीनियर और डाक्टर बनना उन की बपौती है तो तुम कौन हुए इसे शेयर करने वाले? क्या ये लोग आज के जमाने में शंबूक और एकलव्य चाहते हैं? यहीं से सरकार की कमियां शुरू होती हैं. बिलकुल हो सकता है कि हर बच्चे को सरकारी और मुफ्त पढ़ाईलिखाई मिले. जो इच्छुक है वह किसी भी स्ट्रीम में पढ़ाई करे.

“देश का असली निर्माण करना है तो हर जना पढ़े. अगर आईआईटी बौम्बे के मामले में यह मान भी लिया जाए कि साहिल परीक्षा केंद्र में मोबाइल ले गया था और प्रोफैसर को शक हुआ था कि वह नकल कर रहा है, तो इस का मतलब यह कतई नहीं है कि छात्र का कैरियर ही दांव पर लगा दिया जाए. उस से फोन ले लेते और थोड़ा डांटडपट देते. इस उम्र में बच्चे इस तरह की बचकानी हरकत कर देते हैं, पर असली सजा उन्हें समझाना है न कि उन्हें बेवजह के तनाव में भर देना. क्या पूरे परीक्षा केंद्र में अकेला साहिल ही नकल करने की कोशिश कर रहा था? यह तो सीधेसीधे कैरियर खत्म करना हुआ न?”

“मामला बहुत पेचीदा है. पढ़नालिखना है बच्चे का बुनियादी हक है. सरकार को और हर तरह के शिक्षण संस्थान को यह बात समझनी होगी कि देश की बुनियाद को वहां की पढ़ाईलिखाई ही मजबूत करती है. बच्चा किस जाति या धर्म का है, वह अमीर है या गरीब है, इस से कोई फर्क नहीं पड़ता,” विजय बोला.

“बहुत देर हो गई है. मुझे घर जा कर कपड़े भी धोने हैं. चलो, अब यहां से चलते हैं…” अनामिका ने बैंच से उठते हुए कहा. Caste Discrimination

विजय ने हां में हां मिलाई.

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...