Thar Craze: ट्रैफिक जाम से तंग आ कर लोग अकसर शौर्टकट ढूंढ़ते हैं. उत्तर प्रदेश के एक ड्राइवर ने ऐसा जुगाड़ भिड़ाया कि सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया. शख्स ने अपनी महिंद्रा थार को सीधा पैदल चलने वालों के लिए बने फुटपाथ पर ही चढ़ा दिया. और तो और, बगल में बैठी अपनी मां को इस के फायदे गिनाने लगा. इस अजीबोगरीब हरकत का वीडियो इंटरनैट पर आग की तरह फैल रहा है.

सामने आए वीडियो में साफ दिखता है कि भारी ट्रैफिक में फंसने के बाद ड्राइवर ने धैर्य रखने के बजाय अपनी एसयूवी को सड़क के किनारे के ऊंचे फुटपाथ पर दौड़ा दिया. मजे की बात यह है कि इस दौरान उस ने खुद अपने फोन से वीडियो बनाया और कैमरा अपनी मां की तरफ घुमाते हुए गर्व से कहा, “थार होने का यही फायदा है, आप इसे कहीं भी चढ़ा सकते हैं.”

हैरानी की बात यह रही कि बेटे की इस गैरकानूनी हरकत पर मां मुसकराती नजर आईं. कुछ दूर चलने के बाद उस ने गाड़ी वापस सड़क पर उतारी और रास्ते में एक बाइकर को भी आगे बढ़ने का इशारा किया. इस वीडियो को एक्स पर @Nalanda_index नाम के पेज से शेयर किया गया है.

इंटरनैट यूजर्स ने इस वीडियो पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा कि ऐसी गाड़ियां बेचने से पहले खरीदार का मानसिक परीक्षण अनिवार्य होना चाहिए. वहीं, दूसरे यूजर ने याद दिलाया कि गाड़ी बड़ी होने से आप को सड़क या फुटपाथ पर चलने वाले आम लोगों की जान जोखिम में डालने का लाइसैंस नहीं मिल जाता. कई लोगों ने मां के बरताव पर भी सवाल उठाए और कहा कि अगर उन्होंने ऐसा किया होता, तो घर पर डांट के साथ मां से थप्पड़ भी पड़ता.

हर निजी बात सोशल मीडिया पर दिखाना जरूरी है क्या

सोशल मीडिया ने हमें अपनी जिंदगी दुनिया के सामने रखने का एक ऐसा मंच दे दिया है जहां अब शायद निजी और सार्वजनिक के बीच का फर्क ही खत्म होता जा रहा है. हाल ही में एक महिला ने अपने अकाउंट geetarupshingh पर एक वीडियो पोस्ट किया. उस में वह अपने पति के साथ रेलवे स्टेशन पर बैठी नजर आ रही है. वीडियो पर लिखा है कि उस की सास का निधन हो गया है और वे गांव जाने के लिए निकले हैं. वीडियो को देखने के बाद सवाल उठता है कि आखिर किसी के घर में हुई मृत्यु जैसी निजी और दुखद घटना को भी सोशल मीडिया कंटैंट बना कर पोस्ट करने की जरूरत क्यों पड़ रही है?

हैरानी की बात यह है कि ऐसे वीडियो को भी हजारोंलाखों व्यूज मिल जाते हैं. लोग देखते हैं, कमैंट करते हैं और शेयर करते हैं, जिस से पोस्ट करने वाले को इस तरह के और अधिक कंटैंट बनाने का प्रोत्साहन मिलता है. दुख की घड़ी में परिवार के साथ रहना और अपनों को संभालना स्वाभाविक है, लेकिन कैमरा निकाल कर हर पल रिकौर्ड करना और फिर उसे सोशल मीडिया पर डालना क्या वाकई जरूरी है?

आज सोशल मीडिया पर लाइक्स और व्यूज की होड़ ने इंसान को अपनी जिंदगी के लगभग हर पल को प्रदर्शन में बदलने के लिए मजबूर कर दिया है. हर घटना कंटैंट नहीं होती और हर निजी पल जनता के देखने के लिए नहीं होता. हमें दर्शक के तौर पर भी सोचना होगा कि हम किस तरह के कंटैंट को अपनी नजर, लाइक और शेयर दे कर बढ़ावा दे रहे हैं. Thar Craze

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