Psychology of Clothing: साल 2012 में अमेरिका के रिसर्चर्स हाजो एडम और एडम गैलिंस्की ने एक रिसर्च पब्लिश की थी, जिस में ‘ऐंकलोथ्ड कौग्निशन’ नाम की थ्योरी सामने आई. इस रिसर्च के मुताबिक हम जो कपड़े पहनते हैं, उस का असर सिर्फ इस बात पर निर्भर नहीं करता है कि दूसरे हमें कैसे देखते हैं, बल्कि इस पर भी करता है कि हम खुद को कैसा महसूस करते हैं.

रिसर्च में पाया गया कि जब लोग ऐसे कपड़े पहनते हैं जिन्हें वे प्रोफैशनल, जिम्मेदार या खास मानते हैं, तो उन का ध्यान, आत्मविश्वास और काम पर फोकस भी बेहतर हो सकता है. यानी, कई बार अच्छा ड्रैसिंग सैंस लोगों को मानसिक रूप से काम के लिए तैयार करता है.

ड्रैस कोड माहौल पर निर्भर

असल में औफिस में कैजुअल, फौर्मल या यूनिफौर्म पहनना सही है या नहीं, यह पूरी तरह से कंपनी के माहौल और नियमों पर निर्भर करता है. आजकल ज्यादातर स्टार्टअप्स, टैक और क्रिएटिव कंपनियों में कैजुअल कपड़े पहनने की आजादी होती है, जबकि सुरक्षा, अनुशासन और पहचान से जुड़े क्षेत्रों जैसे पुलिस, सेना, अस्पताल (डाक्टर और नर्स), एयरलाइंस, रेलवे और होटल उद्योग के कार्यालयों में यूनिफौर्म अनिवार्य होती है.

इस के अलावा कुछ सरकारी विभागों और प्राइवेट कंपनियों में भी काम के आधार पर वरदी का नियम होता है. यहां पर औफिस में यूनिफौर्म रखने के कई महत्त्वपूर्ण कारण होते हैं, जिन में सब से मुख्य कारण समानता, अनुशासन और पेशेवर पहचान बनाना है, जिस में सभी कर्मचारी एकजैसे दिखते हैं, अमीर और गरीब का भेदभाव खत्म होता है और कपड़ों को ले कर आपसी मुकाबला नहीं होता.

इतना ही नहीं, ग्राहकों के लिए स्टाफ को पहचानना आसान होता है. यह ब्रैंड की छवि को मजबूत करता है. कर्मचारियों में कंपनी के प्रति गर्व की भावना आती है, टीमवर्क को बढ़ावा मिलता है.

खुद पर होता है भरोसा

यहां यह भी समझना आवश्यक है कि आप कुछ भी पहन कर औफिस नहीं जा सकते. वहां आप को एक शालीन, स्मार्ट और साफसुथरा लुक अपनाना चाहिए. इस के अलावा कपड़े आप के बौडी टाइप के अनुसार फिट भी होने चाहिए, ताकि आप को किसी प्रकार की असहजता महसूस न हो, जिस का असर आप के व्यक्तित्व पर पड़ता हो.

साइकोलौजिस्ट राशिदा कपाड़िया कहती हैं कि कपड़े केवल शरीर ढंकने के लिए नहीं होते. हम क्या पहनते हैं, उस का असर हमारे मूड, आत्मविश्वास और व्यवहार पर भी पड़ता है. यही वजह है कि इंटरव्यू, मीटिंग या किसी खास मौके पर लोग अपने कपड़ों का खास ध्यान रखते हैं. अच्छे कपड़े पहनने से कई लोगों को खुद पर ज्यादा भरोसा महसूस होता है.

राशिदा का मानना है कि कुछ लोगों को अच्छी ड्रैस पहनना हमेशा अच्छा लगता है और यह उन की आदत होती है. ग्लैमर वर्ल्ड को अगर लें, तो वहां सभी हर अवसर पर अच्छा ड्रैसअप करते हैं क्योंकि यह उन की पसंद के अलावा जरूरी भी होता है. वे लोगों के बीच अपनी अलग छवि बनाने की कोशिश करते हैं. इसलिए वे हमेशा बाजार या डिजाइनर से नई स्टाइल के कपड़े खरीदना पसंद करते हैं.

इस के अलावा आज की यंग लड़कियां हमेशा टिपटौप रहना पसंद करती हैं क्योंकि इस से उन को खुद की आजादी और खूबसूरती को दिखाना होता है. साथ ही, वे सोशल मीडिया से अधिक प्रभावित भी होती हैं. केवल लड़कियां ही नहीं, आज के लड़के भी स्मार्ट लुक को अपनाना पसंद करते हैं क्योंकि यह उन की इमेज का प्रतीक होता है.

क्या कहती है रिसर्च

शोध यह भी बताते हैं कि जब इंसान खुद को आईने में देख कर अच्छा महसूस करता है, तो उस का आत्मविश्वास बढ़ता है. यह आत्मविश्वास मीटिंग में बोलने, नए लोगों से मिलने में भी अच्छा महसूस कराता है. यही वजह है कि कई कंपनियां कर्मचारियों को साफसुथरे और प्रोफैशनल कपड़े पहनने की सलाह देती हैं. इस से न सिर्फ कंपनी की अच्छी छवि बनती है, बल्कि कर्मचारी में आत्मविश्वास की भावना भी बढ़ती है.

सैल्फ एक्सप्रैशन का तरीका

हर व्यक्ति का व्यक्तित्व अलग होता है. कोई साधारण कपड़े पसंद करता है, तो कोई रंगबिरंगे या ट्रैंडी कपड़े पहनना पसंद करता है. यह जरूरी नहीं कि महंगे कपड़े पहनने वाला घमंडी हो. असल में पहनावे से वह अपनी पसंद और पर्सनैलिटी को एक्सप्रैस कर रहा होता है. इसे सैल्फ एक्सप्रैशन करने का तरीका भी माना जा सकता है. साइकोलौजी भी यही है कि कपड़े हमारे सोचने और महसूस करने के तरीके को प्रभावित करते हैं. इसलिए किसी इंसान को सिर्फ उस के कपड़ों से नहीं, बल्कि उस के बिहेवियर, काम और पर्सनैलिटी से पहचानना चाहिए.

फायर बिग्रेड में काम करने वाली पहली फायर वूमन हर्शिनी कान्हेकर कहती हैं कि उन्होंने जब यूनिफौर्म पहना, तब उन्हें गर्व महसूस हुआ क्योंकि वे एक नेक काम का हिस्सा बन रही हैं, जिस का सपना उन्होंने बचपन से देखा है. इस प्रकार किसी अवसर या स्थान के अनुसार सही कपड़े पहनना बहुत जरूरी है क्योंकि सही पहनावा आसपास और औफिस में हमारे सम्मान को बढ़ाता है, साथ ही, सलीकेदार कपड़े किसी के भी मूड को अच्छा बना सकते हैं और व्यक्ति काम में बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार रहता है. Psychology of Clothing

 

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