IIM Rohtak Corruption: अभी हाल ही में प्रधानमंत्री ने यह दावा किया था कि उनकी सरकार में करप्शन जीरो है, बीजेपी सरकार ने करप्शन को जड़ से खत्म कर दिया है लेकिन CAG की 2026 की रिपोर्ट में रोहतक IIM में भ्रष्टाचार का ताज़ा मामला सामने आया है और इस मामले ने जीरो करप्शन के दावे की पूरी पोल खोल कर रख दी है.
देश के सबसे प्रतिष्ठित माने जाने वाले मैनेजमेंट संस्थान में 88.64 लाख रुपये ऐसे 10 लोगों को सैलरी के रूप में बांट दिए गये हैं जिनका न कोई सर्विस रिकॉर्ड है, न कोई अपॉइंटमेंट लेटर है और न ही चयन से जुड़ा कोई दस्तावेज है. यह सीधे सीधे सरकारी खजाने की लूट है और यह लूट किसी चपरासी या क्लर्क ने नहीं बल्कि संस्थान के डायरेक्टर और टॉप मैनेजमेंट ने मिल कर की है. सबसे शर्मनाक बात यह है कि इन अधिकारियों ने शिक्षा मंत्रालय द्वारा मंजूर नियामावली में खुद ही 28 बदलाव कर लिए और अपने वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों को खुद ही बढ़ा लिया. यह किस तरह का जीरो करप्शन मॉडल है जहां नियम बनाने वाला खुद ही नियम तोड़ कर खुद को ही फायदा पहुंचा रहा है?
इस पूरे घोटाले की परत दर परत अगर आप देखेंगे तो आपको हैरानी होगी कि भ्रष्टाचार का ऐसा खेल किसी प्राइमरी स्कूल का नहीं बल्कि देश के एक IIM में चल रहा था. CAG की रिपोर्ट के खुलासे में पता चला है कि संस्थान ने 3.96 करोड़ रुपये से 724 AC खरीदे लेकिन स्टॉक रजिस्टर में सिर्फ 18 AC दर्ज हैं और बाकी 706 AC का कोई पता ही नहीं है. आखिर 706 AC हवा में तो नहीं उड़ गए? जाहिर है वह या तो कागजों पर ही खरीदे गए या खरीद कर किसी नेता, अफसर या उनके रिश्तेदारों के घरों में लगा दिए गए. और तो और 1.64 करोड़ का टेंडर ऐसे वेंडर को दे दिया गया जो तकनीकी योग्यता ही पूरी नहीं करता था. यह वही पुराना तरीका है जिसमें अपने चहेते ठेकेदार को काम देकर कमीशन खाया जाता है.
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मजाक फैकल्टी के वर्कलोड और इंसेंटिव को लेकर है. CAG कहती है कि IIM Rohtak में एक फैकल्टी को साल में सिर्फ 99 सत्र यानी कुल 7,425 मिनट पढ़ाना होता है. अगर छुट्टियां और वीकेंड हटा दें तो यह प्रति वर्किंग डे सिर्फ 34.38 मिनट बनता है. मतलब आधे घंटे से भी कम काम और उसके लिए 2019-20 से 2023-24 के बीच 4.11 करोड़ रुपये इंसेंटिव के रूप में बांट दिए गए. कई मामलों में तो यह इंसेंटिव उनकी बेसिक सैलरी से भी ज्यादा था. 2023-24 में अकेले 42 फैकल्टी को 220.76 लाख रुपये इंसेंटिव दिया गया. सवाल यह है कि यह कौन सी दुनिया है जहां आधे घंटे काम करने पर करोड़ों का इंसेंटिव मिलता है? यह इंसेंटिव नहीं बल्कि लूट के पैसे को हजम करने का तरीका है.
लूट का यह पैसा छात्रों की जेब से ही आया है. CAG की रिपोर्ट में साफ लिखा है कि संस्थान ने 2018-19 के बाद से कोई सालाना बजट ही तैयार नहीं किया. बिना बजट के ही मनमर्जी से फीस 35 फीसदी तक बढ़ा दी गई. 2018-19 में जो औसत फीस 6.40 लाख थी उसे 2023-24 में 8.64 लाख कर दिया गया. इस मनमर्जी वसूली से 217.91 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बचत जमा हो गई. यानी छात्रों को लूट कर वह पैसा गिफ्ट बांटने में उड़ाया गया. कोरोनाकाल में जब पूरा देश ऑक्सीजन और दवाओं के लिए तरस रहा था और छात्रों के माता-पिता की नौकरियां जा रही थीं तब IIM Rohtak के अफसर सरकारी पैसे से 58.31 लाख के महंगे गिफ्ट बांट रहे थे.
20.76 लाख के लैपटॉप, 10.24 लाख के 30 iPad, 10.69 लाख के iPhone, 3.39 लाख की फिटनेस बाइक. यह कौन सी पढ़ाई है जिसमें फिटनेस बाइक गिफ्ट में दी जाती है? जब सरकारी पैसे से पर्सनल केस लड़ने की बारी आई तो 11 बिलों पर तो व्हाइटनर लगा कर केस का नाम नंबर ही मिटा दिया गया और 7 बिल तो गायब ही कर दिए गए. यह जीरो करप्शन नहीं बल्कि सौ प्रतिशत लूट पर जीरो अकाउंटेबिलिटी है.
यही इस सरकार का जीरो करप्शन मॉडल है. ऊपर बैठे लोगों को पता है कि उनका कुछ बिगड़ेगा नहीं. पिछले 12 सालों में सबसे ज्यादा नुकसान शिक्षा व्यवस्था का ही हुआ है. सरकारी स्कूलों की स्थिति बद से बदतर होती गई, मर्जर के नाम पर हजारों स्कूल बंद कर दिए बचे खुचे स्कूलों में भी शिक्षा के नाम पर बच्चों को मिड डे मील खिला कर धर्म परोसा जा रहा है. अब यूनिवर्सिटीज को बर्बाद करने की तैयारी है. रोहतक आईआईएम इसका एक छोटा सा उदाहरण है. IIM Rohtak Corruption





