Hindi Stories: नवाबों का शहर लखनऊ अपनी तहजीब, धीमी रफ्तार और शांत जीवनशैली के लिए जाना जाता था. यहां के गोमती नगर और हजरतगंज के कैफे और रैस्टोरैंट में लोग अब भी फुरसत से मिलते थे, जहां मुलाकातें घंटों चलने वाली गंभीर और हलकीफुलकी बातचीत पर आधारित होती थीं. आर्यन मेहरा, एक 26 वर्षीय आईटी पेशेवर, इसी शहर की शांति और तहजीब का हिस्सा था. आर्यन सफल था, पर अकेला था और वह डेटिंग ऐप्स पर किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश में था, जिस के साथ वह अपनी भावनाएं साझा कर सके, अपनी रोजमर्रा की जिंदगी के सुखदुख की बात कर सके.

उसे अकसर दिल्ली और मुंबई से दोस्त फोन कर के आगाह करते थे कि मैट्रो शहरों में डेटिंग सीन अब केवल ‘नैटवर्किंग’ और ‘शोऔफ’ का खेल बन कर रह गया है. यहां हर मुलाक़ात के पीछे एक छिपी हुई व्यावसायिक मंशा होती है. आर्यन का दोस्त रवि दिल्ली में रहता था और उस ने एक दिन उसे एक नए हैरान कर देने वाले ट्रैंड के बारे में बताया. रवि ने कहा कि कुछ रैस्टोरैंट कालेज की लड़कियों को फ्रीलांसर की तरह हायर कर रहे हैं.

“यार आर्यन, उन का काम सिर्फ ऐप पर लड़कों को लुभाना, विश्वास जीतना और फिर उन्हें उसी रैस्टोरैंट में बुला कर सब से महंगा खाना व शराब का और्डर करवाना है. हर बिल पर लड़की को सीधा 20 प्रतिशत कमीशन मिलता है,” रवि ने गुस्से से कहा.

आर्यन को यह बात भयानक और अविश्वसनीय लगी. उस ने राहत की सांस ली कि शुक्र है, लखनऊ अभी इस ‘जहरीली हवा’ से बचा हुआ है. लेकिन लखनऊ में भी कुछ लोग थे जिन की आंखें इस नए, अनैतिक बाजार पर थीं.

मिस्टर गुप्ता, जो गोमती नगर में ‘द सेफायर’ नामक एक लग्जरी रैस्टोरैंट के मालिक थे, अपने बिजनैस की धीमी ग्रोथ से परेशान थे. ‘द सेफायर’ में इंटीरियर शानदार था, लेकिन ग्राहक कम आते थे. मिस्टर गुप्ता ने दिल्ली के एक बिजनैस फोरम में इस ‘सीक्रेट पार्टनर’ मौडल के बारे में सुना. उन का चेहरा लालच से चमक उठा. उन्होंने सोचा, ‘लखनऊ की तहजीब और इस कमीशन मौडल का मिश्रण बिजनैस को रातोंरात आसमान पर पहुंचा देगा.’ उन्होंने तुरंत इस योजना पर काम करना शुरू कर दिया, जिसे वे गोपनीय तरीके से ‘प्रोजैक्ट सफेद गुलाब’ कहते थे.

इसी शहर में, एक साधारण मध्यवर्गीय परिवार की लड़की अंजलि रहती थी. अंजलि (20 वर्ष) लखनऊ विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान की छात्रा थी और पढ़ने में बहुत तेज थी. उस के पिता एक छोटी सरकारी नौकरी से रिटायर हो चुके थे और घर की आर्थिक स्थिति अब तंग थी. उस की छोटी बहन को इंजीनियरिंग की कोचिंग के लिए पैसे चाहिए थे और उस की मां की दवाओं का खर्चा भी लगातार बढ़ रहा था. अंजलि पार्टटाइम ट्यूशन पढ़ाती थी. लेकिन कालेज की फीस और घर के बढ़ते खर्चों के सामने उस की कमाई अपर्याप्त थी. वह हमेशा तनाव में रहती थी, खुद को परिवार का बोझ समझने लगी थी.

एक दिन, अंजलि दोपहर के समय ट्यूशन से लौट रही थी. उस के कंधे पर ट्यूशन की किताबें और मन में कालेज फीस का बोझ था. तभी मिस्टर गुप्ता का फोन आया, जो उस के पिता के पुराने परिचित थे. उन्होंने जानपहचान का हवाला देते हुए बहुत ही पेशेवर लहजे में कहा कि वे ‘द सेफायर’ में उस से मिलना चाहते हैं, उन के पास अंजलि के लिए एक ‘व्यावसायिक अवसर’ है. अंजलि, जो कमाई के अवसर की तलाश में थी, अनिच्छा से रैस्टोरैंट पहुंची. ‘द सेफायर’ का भव्य, शानदार इंटीरियर अंजलि के साधारण जीवन के विपरीत था और उसे वहां पहुंचते ही थोड़ी असहजता महसूस हुई.

मिस्टर गुप्ता ने उसे एक शांत कोने में बिठाया और खुद को एक विजनरी बिजनैसमैन के तौर पर पेश किया. उन्होंने बहुत ही चिकनीचुपड़ी बातें करते हुए अंजलि को यह ‘फ्रीलांसर’ मौडल समझाया. उन्होंने कहा, “देखो अंजलि, यह ज़माना स्मार्ट वर्क का है. यह कोई गलत काम नहीं है, यह बस एक उच्चस्तरीय मार्केटिंग स्ट्रैटेजी है. तुम बुद्धिमान हो और तुम्हारी बातचीत करने का तरीका बहुत ही अच्छा है. सो, तुम्हें अपनी इस सामाजिक कुशलता का उपयोग करना चाहिए.” उन्होंने इसे ‘ग्राहक अनुभव को बढ़ाने’ के रूप में पेश किया.

“तुम्हें किसी को छूना नहीं है. किसी से झूठ नहीं बोलना है. बस, डेटिंग ऐप्स पर पुरुषों को लुभाना है. उन से अच्छी बातचीत करनी है और उन्हें हमारे रैस्टोरैंट में बुलाना है. यहां का माहौल बेहतरीन है. तुम्हारा काम, बस, उन्हें हमारे बेस्ट फूड और वाइन का सुझाव देना है. तुम हर बिल का सीधा 20 प्रतिशत कमीशन लोगी.” यह आंकड़ा इतना बड़ा था कि अंजलि की आंखों के सामने एक पल के लिए उस की बहन की रुकी हुई कोचिंग फीस और मां की दवाओं का पूरा खर्चा घूम गया. मिस्टर गुप्ता ने उस के नैतिक द्वंद्व को समझते हुए कहा, “तुम अपने परिवार के लिए कमा रही हो, अंजलि. यह ‘एंपावरमैंट’ है, मजबूरी नहीं.”

अंजलि का दिल बैठ गया. उस की नैतिक शिक्षा और आत्मसम्मान जोर से चिल्लाए- यह धोखा है, यह अनैतिक है. लेकिन जब मिस्टर गुप्ता ने उसे बताया कि वह एक महीने में 20 से 30 हजार रुपए आसानी से कमा सकती है, तो उस की आंखों के सामने छोटी बहन की कोचिंग फीस और मां की दवाएं आ गईं. उस रात अंजलि सो नहीं पाई. उस ने खुद को बारबार समझाया कि वह किसी को धोखा नहीं दे रही है, बस, अपने परिवार के लिए ‘तेज पैसा’ कमा रही है. यह उस की मजबूरी थी, उस का अस्थाई समझौता. आख़िरकार, आर्थिक तंगी के दबाव में अंजलि ने भारीमन से मिस्टर गुप्ता के ‘प्रोजैक्ट सफ़ेद गुलाब’ का पहला ‘सीक्रेट पार्टनर’ बनने का फैसला कर लिया.

अगले दिन अंजलि ने डेटिंग ऐप्स पर एक आकर्षक और सामान्य प्रोफाइल बनाई. उस ने अपनी प्रोफइल में लिखा कि वह कला और मनोविज्ञान में गहरी रुचि रखती है, यह सब आर्यन को आकर्षित करने के लिए बिलकुल सटीक था. दूसरी तरफ़, आर्यन ऐप्स पर ईमानदारी से एक सार्थक कनैक्शन ढूंढ़ रहा था. कुछ ही दिनों में उस की नजर अंजलि की प्रोफइल पर पड़ी. उन की बातचीत शुरू हुई.

अंजलि की बातों में एक अजीब गहराई थी, जो आर्यन को तुरंत पसंद आई. वह मनोविज्ञान की छात्रा थी, इसलिए वह आर्यन की बातों को ध्यान से सुनती, सहानुभूति दिखाती और ऐसे सवाल पूछती जिस से आर्यन को लगता कि उसे जीवन में आखिरकार कोई सच्चा साथी मिला है. अंजलि, अपने कमीशन के लक्ष्य को साधते हुए भी, सचमुच अच्छी तरह से बातचीत कर रही थी. लगभग 2 हफ्तों तक उन की बातचीत टैक्स्ट और फोनकौल तक सीमित रही, जिस में विश्वास की मजबूत नींव रखी गई. आर्यन पूरी तरह से अंजलि की सादगी और उस की बौद्धिक बातों पर मोहित हो चुका था.

अब अंजलि को अपनी योजना पर अमल करना था. एक दिन आर्यन ने मिलने का प्रस्ताव रखा. अंजलि ने थोड़ी झिझक दिखाते हुए कहा, “हां, पर मैं ऐसी जगह मिलना चाहूंगी जहां हम इत्मीनान से बात कर सकें और जहां का माहौल अच्छा हो.” उस ने थोड़ी देर रुक कर, लापरवाही से कहा, “मैं ने गोमती नगर में ‘द सेफायर’ के बारे में बहुत सुना है. क्या हम वहीं चलें?”

आर्यन को ‘द सेफायर’ महंगा लगता था. लेकिन उस ने अंजलि की पसंद को सम्मान दिया. “ज़रूर अंजलि, तुम्हारे लिए कुछ भी.” इस एक वाक्य ने अंजलि के दिल में अपराधबोध की एक और गहरी परत जोड़ दी. वह जानती थी कि वह उस व्यक्ति के विश्वास को तोड़ रही है जो उस की सादगी पर यकीन कर रहा था.

‘द सेफायर’ में पहली डेट एक शांत मंगलवार की शाम को तय हुई. रैस्टोरैंट का माहौल सचमुच शानदार था- धीमी रोशनी, पियानो संगीत, और मखमली सीटें. मुलाक़ात उम्मीद से बेहतर रही. आर्यन अंजलि की आंखों में देखता रहा. उन के बीच की कैमिस्ट्री स्पष्ट थी.

जैसे ही वेटर मैन्यू ले कर आया, अंजलि ने अपना ‘काम’ शुरू कर दिया. उस ने कहा, “आर्यन, मैं ने सुना है यहां की ‘ब्लैक ट्रफल पास्ता’ और उन की वाइन लिस्ट अविश्वसनीय है. हम दोनों में से कोई तो इसे ट्राई करे? मैं ने कभी इतना महंगा सीफूड नहीं खाया है. तुम वाइन की एक अच्छी बोतल जरूर और्डर करो, यह शाम स्पैशल है.”

आर्यन पहले तो झिझका. उस के दिमाग में 1,500 रुपए के पास्ता और 4,000 रुपए की वाइन का खयाल आया. यह उस के सामान्य डेटिंग बजट से बहुत ज़्यादा था. लेकिन अंजलि के चेहरे पर आई मासूमियत और उस के बारबार आग्रह ने उसे पिघला दिया. अंजलि ने महंगी भगवा रंग की ड्रैस पहन रखी थी, हाथ में 4-5 कलेवे बंधे हुए थे.

“मेरी मां बहुत धार्मिक हैं और उन का बाराबंकी के प्रसिद्ध स्वामी योगानंद अद्वैत के यहां आनाजाना लगा रहता है. उन्हीं के कहने पर मैं ने भगवा कलर में यह ड्रैस बनवाई है, सिर्फ तुम्हारे लिए.”

उस ने आर्यन का हाथ पकड़ते हुए कहा, “गुरुजी को तुम्हारा प्रोफाइल दिखाया था, उन्होंने कहा था, ‘बेटी, यह लड़का समय का बहुत बलवान है कि तुम उसे मिली हो. तुम जीवनभर सफल रहोगे, यह मेरा आशीर्वाद है’. तभी तो मैं आई हूं कि तुम्हारे साथ मैं सेफ हूं, सुखी रहूंगी. गुरुजी का वचन कभी गलत नहीं होता.”

आर्यन भी साधारण पूजापाठी घर से था, वह इंप्रैस हुआ कि एक महान संत का आशीर्वाद प्राप्त है.

आर्यन ने सब से महंगी वाइन और कुछ डिशेज और्डर कर दीं. रात खत्म हुई. बिल आया: 7,850 रुपए. आर्यन ने भारीमन से बिल चुकाया. जैसे ही आर्यन बाहर निकला, अंजलि चुपके से वाशरूम की ओर बढ़ी, जहां मिस्टर गुप्ता के मैनेजर ने उसे 20 प्रतिशत कमीशन के रूप में 1,570 रुपए नकद सौंप दिए.

ऐसा 2 बार हुआ और द सेफायर में हर बार उस का बिल 8 से 10 हजार रुपए का आता.

आर्यन सीधा और सच्चा जरूर था लेकिन बेवकूफ़ नहीं. आईटी प्रोफैशनल होने के नाते उस का दिमाग कोडिंग, लौजिक और पैटर्न पर काम करता था. जब वह तीसरी रात अपने फ्लैट पर लौटा, तो 7,850, 8000 और 9,766 रुपए के बिल उस की स्टडी टेबल पर रखे थे. वह बारबार अंजलि की बातों और उस के व्यवहार का विश्लेषण कर रहा था. अंजलि का बारबार ‘द सेफायर’ के ही विशिष्ट और सब से महंगे मैन्यू पर जोर देना, वेटर के आते ही अचानक उस की बातों का लहजा बदल जाना आर्यन के तार्किक दिमाग को खटक रहा था.

अचानक उस के कानों में रवि की वह बात गूंजज उठी- ‘हर बिल पर लड़की को सीधा 20 प्रतिशत कमीशन मिलता है.’ आर्यन ने ठंडी सांस ली. उस ने तय किया कि वह अंजलि से तब तक दोबारा नहीं मिलेगा और न ही उस पर कोई सीधा आरोप लगाएगा जब तक कि वह खुद अपनी आंखों से सच का पता नहीं लगा लेता.

उस दिन बुधवार था. शाम के ठीक 6 बजे आर्यन ने अपनी कार गोमती नगर के उस चौराहे पर पार्क की, जहां से ‘द सेफायर’ का मुख्य दरवाजा और उस की चमचमाती नियान लाइट साफ दिखाई देती थी. उस ने अपनी कार की खिड़कियों पर अंदर से काले सूती परदे लगा दिए थे ताकि बाहर से कोई देख न सके कि कार के भीतर कौन बैठा है. उस के हाथ में उस का डीएसएलआर कैमरा था, जिस में एक शक्तिशाली जूम लैंस लगा हुआ था.

शाम के 7 बज कर 20 मिनट हुए. ‘द सेफायर’ के सामने एक औटो आ कर रुका. आर्यन ने कैमरे का लैंस घुमाया और फोकस सैट किया. औटो से अंजलि उतरी. आज उस के साथ आर्यन नहीं, बल्कि जींस और टीशर्ट पहने एक नया लड़का था. अंजलि के चेहरे पर वही चिरपरिचित, सादगीभरी मुसकान थी, जिस ने कुछ दिनों पहले आर्यन का दिल जीता था. वही भगवा रंग की औफ शोल्डर ड्रैस पहने थी. दोनों हंसते हुए रैस्टोरैंट के भीतर चले गए. आर्यन का दिल एक पल के लिए बैठ गया. उस का संदेह अब एक पक्के यकीन में बदल रहा था. वह पूरे 3 घंटे वहीं बैठा रहा. रात के 10 बज कर 15 मिनट पर वह लड़का बाहर निकला. उस के चेहरे पर भारी बिल चुकाने का अफसोस साफ झलक रहा था. उस के जाने के 5 मिनट बाद अंजलि बाहर आई और उस ने एक कैब ली. आर्यन ने इस पूरे वाकए का वीडियो रिकौर्ड कर लिया.

गुरुवार की शाम को आर्यन फिर उसी जगह तैनात था. आज हवा में थोड़ी ठंडक थी लेकिन रैस्टोरैंट के सामने का माहौल गरम था. रात के 8 बजे एक सफेद रंग की एसयूवी आ कर रुकी. इस बार अंजलि एक सूटबूट पहने कौर्पोरेट लुक वाले व्यक्ति के साथ थी. अंजलि ने उस का हाथ थाम रखा था. आर्यन ने कैमरे का शटर बटन दबाया- ‘क्लिक, क्लिक, क्लिक.’ तसवीरें गवाही दे रही थीं कि अंजलि रोज एक नया शिकार ढूंढ़ रही थी.

शुक्रवार को आर्यन ने अपनी रणनीति बदली. वह अपनी कार से उतरा और सादे कपड़ों में, सिर पर कैप लगा कर चुपके से ‘द सेफायर’ के अंदर चला गया. रैस्टोरैंट में काफी भीड़ थी. उस ने देखा कि अंजलि एक और लड़के के साथ कोने वाली टेबल पर बैठी थी और बाकायदा वही महंगी वाइन की बोतल टेबल पर खुली हुई थी. आर्यन चुपके से वाशरूम वाले कौरिडोर की तरफ बढ़ गया. वहां की धीमी रोशनी में उस ने देखा कि मैनेजर एक काले रंग का रजिस्टर ले कर खड़ा था.

कुछ ही देर बाद अंजलि वाशरुम के बहाने टेबल से उठी और उस कौरिडोर में आई. आर्यन ने बिना कोई आवाज किए अपने स्मार्टफोन का कैमरा औन किया और उसे अपनी शर्ट की जेब के स्लिट से बाहर निकाल लिया. वीडियो रिकौर्ड हो रहा था.

“आज का कितना हुआ, राहुल जी?” अंजलि की आवाज में कोई संकोच नहीं था, बल्कि एक पेशेवर लहजा था. मैनेजर ने रजिस्टर देखा, “बिल 9,500 रुपए का है, अंजलि जी. आप का 20 परसंत यानी 1,900 रुपए.”

मैनेजर ने बाकायदा नोटों की गड्डी अंजलि के हाथ में थमाई. अंजलि ने बड़ी कुशलता से उन पैसों को गिना और अपने पर्स के गुप्त पौकेट में रख लिया. इस पूरे दृश्य का एक बेहद साफ, हाई-डैफिनीशन वीडियो आर्यन के फोन में सेव हो चुका था. आर्यन चुपके से रैस्टोरैंट से बाहर आ गया. चार दिनों के भीतर आर्यन के पास अंजलि, मिस्टर गुप्ता और उन के ‘प्रोजैक्ट सफेद गुलाब’ के खिलाफ पुख्ता सुबूतों का एक ऐसा डिजिटल डोजियर तैयार था, जिसे कोई भी अदालत या समाज झुठला नहीं सकता था.

शनिवार की सुबह आर्यन ने अंजलि को एक बहुत ही सामान्य और मीठा संदेश भेजा, “अंजलि, आज दफ्तर में मुझे एक बहुत बड़ा इंसैंटिव मिला है. मैं यह खुशी तुम्हारे साथ बांटना चाहता हूं. आज शाम फिर ‘द सेफायर’ में मिलते हैं, तुम्हारी पसंदीदा जगह.”

अंजलि ने तुरंत रिप्लाई किया, “ओह, वाओ आर्यन. मुझे बहुत खुशी हुई. मैं शाम 8 बजे वहीं मिलूंगी.” अंजलि के मन में लालच का ग्राफ बढ़ गया था, उसे लगा कि आज का बिल कम से कम 10 से 12 हजार रुपए का बनेगा और उस का हफ्ते का सब से बड़ा कमीशन आज ही आएगा.

शाम 8 बजे ‘द सेफायर’ की मखमली लाइटों के बीच दोनों आमनेसामने बैठे थे. अंजलि ने हमेशा की तरह अपनी कला और मनोविज्ञान की बातें शुरू कीं, “आर्यन, तुम सचमुच बहुत मेहनती हो. आज की शाम कुछ स्पैशल होनी चाहिए. यहां की जो ‘सिग्नेचर इटैलियन रेड वाइन’ है, हमें आज वही और्डर करनी चाहिए, साथ में प्रीमियम सीफूड प्लैटर भी.”

आर्यन ने मुसकराते हुए वेटर को बुलाया, “हां, बिलकुल. जो भी सब से बेस्ट है वह सब ले आओ.”

खाना टेबल पर आ गया. वाइन के गिलास भरे गए. अंजलि बेहद उत्साहित हो कर बातें कर रही थी जबकि आर्यन की आंखें उस की हरेक बनावटी मुसकान के पीछे छिपे उस लालच को देख रही थीं. आर्यन ने कहा कि आज उस का पेट खराब है और वह कुछ खा नहीं पाएगा और ड्रिंक भी नहीं ली कि उस से पेट में जलन होगी. वह शादी की बात करने लगा. दोनों हनीमून तो स्विटजरलैंड में ही मनाएंगे. बातों में उलझा कर वह बस घड़ी की सूइयों को देख रहा था. रात के साढ़े नौ बज चुके थे. टेबल पर काफी सारा पास्ता, कीमती सीफूड और तीनचौथाई से ज़्यादा वाइन की बोतल बची हुई थी.

अंजलि ने हमेशा की तरह अपना पर्स उठाया, “आर्यन, मैं बस दो मिनट में वाशरूम से आती हूं, तब तक तुम बिल चैक कर लो.”

“रुको अंजलि,” आर्यन की भारी और शांत आवाज ने उसे अपनी सीट पर ही रोक दिया.

आर्यन ने हाथ उठा कर वेटर को इशारा किया. वेटर दौड़ता हुआ आया, “जी सर, बिल?”

“बिल बाद में लाना, भाई. अभी हम बैठे हैं. मैडम से बहुत सी राज की बातें करनी हैं.” आर्यन ने सीधे वेटर की आंखों में देखते हुए कहा, “पहले यह जो ‘ब्लैक ट्रफल पास्ता’ और सीफूड प्लैटर बचा है, इसे बहुत अच्छे से पैक कर दो. और हां, यह जो वाइन की महंगी बोतल है, इस पर वापस कौर्क लगाओ और इसे एक अच्छे टेकअवे बैग में डाल दो.”

वेटर का मुंह खुला का खुला रह गया. ‘द सेफायर’ जैसे लग्जरी रैस्टोरैंट में जहां लोग सिर्फ़ दिखावे और रसूख के लिए आते थे, वहां किसी लड़के को अपनी डेट के सामने बचा हुआ खाना और शराब पैक कराते देखना एक अजूबा था. अंजलि का चेहरा अजीब से संकोच और घबराहट से लाल हो गया. उसे लगा कि आसपास के लोग उन्हें देख रहे हैं.

“आर्यन, यह तुम क्या कर रहे हो?” अंजलि ने फुसफुसाते हुए कहा, उस की आवाज में चिड़चिड़ापन था. “कितना अजीब लग रहा है, लोग क्या सोचेंगे? हम किसी छोटेमोटे ढाबे पर नहीं बैठे हैं.”

आर्यन ने बड़ी सहजता से वेटर के हाथ से पैक किया हुआ कैरी बैग लिया, जिस में खाना और वाइन की बोतल सुरक्षित थीं. उस ने बैग को अपने पास रखा और अंजलि की तरफ देखा. उस की आंखों में अब कोई प्यार नहीं था, बल्कि एक ऐसा ठंडापन था जो अंजलि के दिल को कंपा गया.

“अजीब क्यों, अंजलि?” आर्यन ने  कहा, “जब पैसे देने हैं, तो सामान बरबाद क्यों करना? वैसे भी, लखनऊ की तहज़ीब हमें अन्न का अपमान करना नहीं सिखाती. और जहां तक लोगों के सोचने की बात है, तो आज की रात के बाद मिस्टर गुप्ता और तुम्हारे बारे में लोग जो सोचेंगे, उस की चिंता करो.”

अंजलि की सांसें जैसे थम गईं, “मतलब, मैं समझी नहीं?”

आर्यन ने अपनी पैंट की जेब से एक सफेद कागज का मुड़ा हुआ परचा निकाला और उसे अंजलि के वाइन गिलास के ठीक नीचे दबा दिया.

“इस स्लिप को बहुत ध्यान से पढ़ना, अंजलि. यह तुम्हारे और तुम्हारे मालिक मिस्टर गुप्ता के नाम मेरा आखिरी संदेश है,” आर्यन ने कहा और अपनी सीट से खड़ा हो गया और पैक्ड फूड ले कर चला गया. वेटर देख रहा था पर अंजलि के चेहरे पर आए पसीने को भांपते हुए उस ने आर्यन को कुछ नहीं कहा और न ही उन दोनों बाउंसर्स को इशारा किया जो गेट पर रहते हैं.

अंजलि ने कांपते हुए हाथों से उस परचे को खोला. उस की आंखें जैसेजैसे शब्दों पर आगे बढ़ रही थीं, उस के चेहरे का खून सूखता जा रहा था. उस परचे पर लिखा था:

“अंजलि, तुम्हारी कला और मनोविज्ञान का कोर्स यहां समाप्त होता है. तुम दोनों का ‘प्रोजैक्ट सफेद गुलाब’ और कमीशन का धंधा पूरी तरह बेनकाब हो चुका है. पिछले 4 दिनों में तुम जिन 5 अलगअलग लड़कों को प्यार का नाटक कर के यहां लूटने लाई हो, उन सब के ‘द सेफायर’ से निकलते हुए एचडी वीडियो मेरी कार के डैशकैम और कैमरे में महफूज हैं. और हां, वाशरूम के बाहर जो तुम मैनेजर से 20 प्रतिशत कमीशन के नोट गिनती हो, उस का भी एक बहुत साफ वीडियो मेरे पास सुरक्षित है. यह स्लिप पढ़ते ही मिस्टर गुप्ता को बता देना कि अगर दोबारा किसी सीधे और ईमानदार लड़के की भावनाओं का सौदा इस रैस्टोरैंट में हुआ, तो ये सारे वीडियो पुलिस के पास, सोशल मीडिया पर और लखनऊ के हर न्यूज़ चैनल पर लाइव होंगे. तुम्हारा खेल खत्म.”

परचा पूरा पढ़ते ही अंजलि के हाथ से कागज छूट कर फर्श पर गिर गया. उस का पूरा शरीर थरथर कांप रहा था, माथे पर पसीने की बूंदें आ गईं. वह कुछ बोलने के लिए उठी, “आर्यन, मेरी बात सुनो, मैं मजबूर थी, मेरी बहन…”

लेकिन आर्यन उस की एक भी झूठी कहानी सुनने के लिए वहां नहीं था. वह अपना पैक किया हुआ खाना और कीमती वाइन की बोतल हाथ में थामे, बिना पीछे मुड़े, पूरे स्वाभिमान और कड़े कदमों के साथ ‘द सेफायर’ के मुख्य दरवाजे से बाहर निकल चुका था.

अंजलि उस आलीशान और महंगी मखमली सीट पर अकेली बैठी रह गई. उस की आंखों से अब अपराधबोध और खौफ के आंसू बह रहे थे. उस का पूरा वजूद उस एक परचे के नीचे दब चुका था. Hindi Stories

लेखक – संजीव स्नेही 

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