Indian Citizenship: विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पासपोर्ट सिर्फ विदेश यात्रा का दस्तावेज है, नागरिकता का प्रमाण नहीं है. गृह मंत्री और मुख्य चुनाव अधिकारी कहते हैं कि आधार कार्ड और वोटर आईडी नागरिकता साबित करने वाले कागज नहीं हैं. सो, सवाल उठता है कि आखिर भारत का नागरिक है कौन?
हजारों रुपए खर्च कर के, पुलिस वैरिफिकेशन में ऊपरी खर्च दे कर, सालों इंतजार कर के पासपोर्ट बनवाया जाता है. विदेश की धरती पर भारतीय पहचान के लिए यह सब से मजबूत दस्तावेज होता है. विदेश में किसी संकट के समय इसी दस्तावेज के आधार पर भारतीय नागरिकों की पहचान होती है. अब बीजेपी सरकार कह रही है, नहीं, यह सिर्फ यात्रा का टिकट है.
आधार कार्ड को हर जगह इस्तेमाल करवाया गया है. बैंक, राशन, टैक्स सब में. वोटर आईडी से हम वोट डालते हैं, देश चलाते हैं. लेकिन सरकार कहती है, ये भी नागरिकता के कागज नहीं हैं. यह जनता के साथ मजाक है. ऐसा गैरभाजपाई को चिन्हित करने के लिए किया जा रहा है. एनआरसी के नाम पर एक झटके में भारत की 140 करोड़ जनता की नागरिक पहचान ही खत्म की जा रही है. बीजेपी सरकार 12 साल से सत्ता में है. एनआरसी और सीएए जैसे मुद्दों पर शोर मचाया, देश को बांटने की कोशिश की लेकिन समस्या का हल नहीं निकला. अब पासपोर्ट, आधार या वोटर आईडी के बारे में सरकार कह रही है कि ये कागज तो हैं लेकिन नागरिकता का प्रमाण नहीं हैं.
जन्म प्रमाणपत्र, मातापिता के कागजात, दादापरदादा के रिकौर्ड, ये सब हर किसी के पास कहां से आएंगे? 90 साल का वृद्ध जन्म प्रमाणपत्र कहां से निकालेगा या बनवाएगा? बीजेपी सरकार की यह नीति असल में जनता को बेवकूफ समझने और भ्रमित करने वाली राजनीति का हिस्सा है. एक तरफ वह सब का साथ, सब का विकास का नारा देती है, दूसरी तरफ रोजमर्रा के जरूरी दस्तावेजों को रद्दी बता कर लोगों में डर पैदा कर रही है. क्या यह जानबूझ कर किया जा रहा है ताकि बाद में कोई नया रजिस्टर या कानून ला कर लोगों को और परेशान किया जा सके? शायद यह जिम्मेदारी पंडों, भाजपा नेताओं को दे दी जाएगी जो नागरिकता का व्यापार करना शुरू करेंगे. Indian Citizenship





