Crime Stories: आवाज सुनकर पूर्णिमा कमरे से बाहर निकल कर सामने आई. तभी उन में से एक युवक ने पिस्तौल से उस पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं. इस के बाद दोनों वहां से भाग गए. गोलियों की आवाज सुन कर पूर्णिमा की मम्मी और भाई बाहर निकल कर देखने लगे, जहां पूर्णिमा खून से लथपथ पड़ी हुई थी.उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डौक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया.
सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ की तो मुरली शंकर और पूर्णिमा के प्रेम संबंधों की जानकारी सामने आई. पूर्णिमा चौहान पिछले 4 सालों से पंजाब की एक आयुर्वेदिक दवा कंपनी में सेल्स और मार्केटिंग का काम कर रही थी. उस की शादी राजगढ़ जिले में हुई थी, लेकिन रिश्ता टूट जाने पर वह पिछले 2 सालों से अपने पेरेंट्स के साथ ही रह रही थी.
इसी कंपनी में मुरली शंकर चौहान भी काम करता था. खूबसूरत युवती को देख कर मुरली शंकर की नीयत डोल गई. घर में 40 साल की पत्नी चंपा के होते हुए वह पूर्णिमा पर डोरे डालने लगा. आयुर्वेदिक दवाओं की मार्केटिंग के लिए अक्सर पूर्णिमा और शंकर चौहान साथसाथ अलगअलग शहरों में आतेजाते थे. पूर्णिमा का अपने पति से रिश्ता खत्म हो चुका था, ऐसे में अपनी जिस्मानी जरूरत को पूरा करने के लिए वह भी मुरली पर फिदा हो गई.
पूर्णिमा और मुरलीशंकर के प्रेम संबंधों की जानकारी मुरली की पत्नी चंपा को लग चुकी थी. इस से उन के वैवाहिक जीवन में कोहराम मच गया था. चंपा ने अपने पति मुरलीशंकर और पूर्णिमा को समझाने की कोशिश की. चम्पा की समझाईश पर उसका पति मुरलीशंकर मान भी गया और उसने पूर्णिमा से दूरी बना ली , किंतु पूर्णिमा मानने के बजाय मुरलीशंकर पर लगातार शादी करने का दबाव बनाने लगी .परेशान होकर मुरलीशंकर और चंपा ने पूर्णिमा को रास्ते से हटाने का योजना बनाई.
इस के लिए मुरली शंकर ने छत्तीसगढ़ के बंजारा के रहने वाले राजेंद्र महंत से संपर्क किया.मुरली को पता था कि राजेंद्र एक शूटर है ,जो झारखंड में हुए एक गोलीकांड में जेल की हवा खाने के बाद फिलहाल जमानत पर चल रहा था. चंपा और मुरली ने राजेंद्र महंत से संपर्क करते हुए अपनी परेशानी बताई. राजेंद्र पैसों की तंगी से जूझ रहा था, इसलिए पूर्णिमा को रास्ते से हटाने के लिए उस ने 4 लाख रुपए की मांग की .चंपा और मुरली ने 4 लाख रुपए में पूर्णिमा की हत्या की सुपारी दे दी.
राजेंद्र महंत के पास पिस्टल थी. पहले राजेंद्र ने एक पंजाबी मूवी शूटर देखी था, उसे देख कर उसने पूर्णिमा को शूट करने का प्लान बनाया. राजेंद्र का आसपास के इलाके में बड़ा खौफ था,वह गांव वालों को धौंस जमा कर कहता था कि वो लारेंस विश्नोई के गैंग में काम करता है .
सुपारी की रकम जुटाने के लिए चंपा चौहान ने अपनी पोस्ट औफिस की एफडी तुड़वाई और वहां से रकम निकाल कर राजेंद्र महंत को 2 लाख रुपए एडवांस के तौर पर दिए थे. हत्या के बाद शेष रकम देने की बात तय हुई थी.
संदेह के आधार पर पुलिस ने मुरली और चंपा चौहान से पूछताछ की है. पहले तो वह बारबार अपने बयान बदल रहे थे, परंतु पुलिस की सख्ती के आगे दोनों ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया और पुलिस को पूरी कहानी बता दी.
पूछताछ से पता चला कि राजेंद्र महंत ने अपने साथियों गौरीशंकर सिदार, सुनील महंत, राकेश महंत, वेदप्रकाश महंत उर्फ सोनू, सुमित गबेल और चंद्रशेखर महंत के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई. तय योजना के अनुसार 26 जून, 2026 को गौरीशंकर सिदार और सुनील महंत बाइक से जोंगरा पहुंचे, जहां गौरीशंकर ने पिस्तौल से पूर्णिमा पर गोली चला दी.
घटना के बाद दोनों आरोपी सुमित गबेल द्वारा पहले से उपलब्ध कराई गई बाइक से फरार हो गए. हत्या के बाद आरोपी अलगअलग राज्यों में छिप गए. फरारी के दौरान राकेश महंत ने दोनों को दूसरे राज्यों में भगाने में मदद की. बाद में चंपा चौहान से सुपारी की रकम ले कर राजेंद्र महंत, वेदप्रकाश महंत और चंद्रशेखर महंत ने उसे आपस में बांट लिया.
तकनीकी जांच और मोबाइल लोकेशन के आधार पर पुलिस ने राजेंद्र महंत को झारखंड के जमशेदपुर, गौरीशंकर सिदार और सुनील महंत को महाराष्ट्र के पुणे से हिरासत में लिया. पूछताछ में उन्होंने भी हत्या की पूरी साजिश का खुलासा कर दिया. Crime Stories
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