16 Crore Google Searches Claim: “मर्द को बिना सबूत कैसे मारे, ये लाइन गूगल पर 16 करोड़ बार सर्च की गई” पिछले एक साल से सोशल मीडिया पर यह मैसेज तेजी से वायरल किया जा रहा है. साथ में कैप्शन होता है कि देखो औरतें कितनी खतरनाक हो गईं हैं. लोग इस मेसेज को सच मानते हैं और तुरंत फॉरवर्ड कर देते हैं जबकि यह पूरी तरह भ्रामक मेसेज है. असल में यह सिर्फ एक झूठा प्रोपगेंडा भर नहीं हैं, यह एक सोची-समझी मर्दवादी साजिश है जिसका मकसद औरतों की आवाज को कुचलना है. औरतों की सुरक्षा और उनके हितों के लिए बने कानूनों को बदनाम करने और घरेलू हिंसा के असली मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए ही ऐसे प्रोपगंडा को फैलाया जाता है.

इस मर्दवादी षड्यंत्र के पीछे के असली खेल को समझने से पहले आइये तथ्यों की बात कर लेते हैं. गूगल आज तक ये डेटा पब्लिक नहीं करता कि दुनिया में किसी एक पूरे वाक्य को कितनी बार सर्च किया गया. गूगल सिर्फ रिलेटिव ट्रेंड बताता है, कुल संख्या नहीं तो 16 करोड़ का आंकड़ा कहां से आया? कोई सोर्स नहीं, कोई सरकारी रिपोर्ट नहीं. ये नंबर हवा में इसलिए उछाला गया क्योंकि 16 करोड़ सुनते ही लोग चौंक जाते हैं और बिना सोचे मेसेज को फॉरवर्ड कर देते हैं.

अगर सच में इतनी बड़ी संख्या में औरतें हिंसा सर्च कर रही होतीं तो गूगल खुद ही कटघरे में खड़ा हो जाता क्योंकि यह कोई मज़ाक का मामला नहीं है बल्कि संगीन जुर्म की प्लानिंग का मामला है. गूगल ऐसे किसी खतरनाक और गंभीर क्राइम से जुड़े सर्च को तुरंत फ्लैग कर देता है और यूजर का डाटा साइबर सेल को भेज देता है.

अब आते हैं असली डेटा पर. मर्दवादी नैरेटिव ये दिखाने की कोशिश करता है कि औरतें खतरनाक होती जा रहीं हैं लेकिन NCRB की 2022 की रिपोर्ट कहती है कि भारत में घरेलू हिंसा के 1.43 लाख केस दर्ज हुए. इनमें 99 प्रतिशत पीड़ित महिलाएं थीं. एक साल में दहेज हत्या के 6219 केस हुए. मतलब हर दिन औसतन 17 औरतें दहेज के लिए मारी गईं. रेप के 31,516 केस दर्ज हुए, जिनमें 96 प्रतिशत मामलों में आरोपी विक्टिम का जानने वाला था.

NFHS-5 का डेटा कहता है कि 15 से 49 साल की हर 3 में से 1 शादीशुदा महिला ने अपने पति द्वारा शारीरिक या यौन हिंसा झेली है. WHO कहता है कि दुनिया भर में हर 11 मिनट में एक महिला अपने पार्टनर या परिवार के हाथों मारी जाती है और हैरानी की बात यह है कि यह तमाम जघन्यतम अपराध औरतों की सुरक्षा के लिए बने तमाम कानूनों के बावजूद हो रहे हैं. अगर क़ानून नहीं होते तो यह आंकड़े हजार गुना ज्यादा होते.

अब आप खुद तुलना कीजिए. एक तरफ 16 करोड़ का फर्जी गूगल सर्च वाला नेरेटिव और दूसरी तरफ हर दिन सैकड़ों औरतों की हत्या, मारपीट और रेप. यह रेप मारपीट और हत्याएं कौन कर रहा है? पुरुष ही न? हैरानी की बात है कि पुरुषों को हर दिन रेप और हत्या करने के तरीके गूगल पर सर्च करने की जरुरत ही नहीं पड़ती, समाज ही सिखा देता है.

औरतें मर्दों का क़त्ल कर रही हैं, इस प्रोपगैंडा के पीछे औरतों के हितों से जुड़े कानूनों को कमजोर करने की गहरी साजिश भी है. भारत में महिलाओं की सुरक्षा के लिए 498A, घरेलू हिंसा अधिनियम 2005, दहेज निषेध कानून और POCSO जैसे कानून बने हैं. ये कानून इसलिए बने क्योंकि सदियों तक औरतों के साथ जुल्म होते रहे. अब जब इन कानूनों की वजह से कुछ केस में सजा होने लगी है तो मर्दवादी लॉबी इन्हें औरतों का हथियार कहकर बदनाम कर रही है. गूगल सर्च वाला नेरेटिव इसी प्रोपगैंडा का हिस्सा है. इसका मकसद ये साबित करना है कि कानून का मिसयूज हो रहा है इसलिए कानून ही खत्म कर दो. जबकि सरकारी डेटा बताता है कि 498A में कंविक्शन रेट सिर्फ 18 से 20 फीसदी ही है मतलब 80 फीसदी केस में कोर्ट सबूत न होने पर बरी कर देता है.

औरतें गूगल सर्च पर पतियों को मारने की कला सीख रहीं हैं इस नेरेटिव का एक मकसद यह भी है कि औरतों को पहले से इतना डरा दो कि जब वह घर में लगातार पिट रही हो तो गूगल पर डोमेस्टिक वॉइलेंस हेल्पलाइन या कानूनी मदद जैसी चीजें सर्च ही न करें. अगर वह अपनी सुरक्षा के लिए इस तरह का कुछ भी सर्च करेगी तो उसे ये वायरल मैसेज दिखाकर डरा दिया जाएगा कि देखो तुम लोग तो मर्दों को मारना चाहती हो, तुम भी पकड़ी जाओगी. ये एक तरह का साइकोलॉजिकल टेरर है. मकसद है कि औरत घुटटी रहे, पिटती रहे लेकिन न किसी से कहे और न किसी से हेल्प मांगे.

औरतों से जुड़े असली मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए भी यह प्रोपगेंडा बेहद कारगर साबित होता है. जब भी दहेज, रेप, मेरिटल रेप, ऑनर किलिंग, लव मैरिज, लव अफेयर या वर्कप्लेस पर भेदभाव की बात होती है तो तुरंत इस तरह के नेरेटिव खड़े किये जाते हैं ताकि बहस का रुख ही पलट जाए और लोग कहने लगें, मर्द खतरे में हैं.

अगली बार जब आपके पास 16 करोड़ सर्च वाला मैसेज आए तो उससे 3 सवाल पूछिए. सोर्स क्या है? NCRB का डेटा क्या कहता है? और इस झूठ को फैलाने से किसको फायदा हो रहा है? जवाब आपको खुद मिल जाएगा. सच्चाई ये है कि मर्दवादी मानसिकता को सबसे ज्यादा डर इस बात से लगता है कि अब औरतें चुप नहीं बैठेंगी, वो सवाल पूछेंगी, वो कानून का रास्ता अपनाएंगी और वो इंसाफ लेकर रहेंगी. 16 Crore Google Searches Claim

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