Modern Relationships: मानव सभ्यता का वैवाहिक व दांपत्य संबंधों का इतिहास भी किसी सरकारी योजना की तरह रहा है- हर कुछ दशकों में नई स्कीम लौंच हो जाती है. कभी बहुविवाह था, कहीं एक पत्नी के कई पति थे. फिर स्वयंवर आया, जहां कन्याएं वर चुनती थीं और वर लोग ऐसे लाइन लगाते थे जैसे आजकल रसोईगैस व डीजल-पैट्रोल के लिए आम आदमी. उस के बाद गंधर्व विवाह आया- दो दिल मिले, समाज बाद में मिलता था. फिर बाल विवाह का दौर आया, जहां दूल्हादुलहन से ज्यादा समझदार तो बरात का घोड़ा होता था.

समय आगे बढ़ा तो अरेंजड मैरिज आई, जिस में 2 लोग कम बल्कि 2 खानदान ज्यादा समीप आते थे. फिर लव मैरिज आई, जहां पहले प्यार होता था, बाद में दोनों परिवारों को ब्लडप्रैशर. अब लिवइन रिलेशनशिप का दौर है- जब तक वाईफाई और विचार मिलें, तब तक साथ रहो.

दुनिया अब इस से भी आगे निकल चुकी है. हर तरफ ‘स्ट्रैटजिक रिलेशनशिप’ का युग है. देशों के स्ट्रैटजिक पार्टनर हैं, कंपनियों के स्ट्रैटजिक प्लान टेकओवर व अलायंस हैं, नेताओं के स्ट्रैटजिक समर्थन हैं. अमेरिका का भारत से स्ट्रैटजिक रिश्ता है, पाकिस्तान से भी है. कल कौन किस के साथ प्रैस कौन्फ्रैंस कर दे, कोई भरोसा नहीं. अब जब पूरी दुनिया रणनीति पर चल रही है तो प्रेमसंबंध पीछे क्यों रहें? भविष्य में शादीविवाह या लिवइन नहीं, केवल ‘स्ट्रैटजिक रिलेशनशिप’ होंगी.

इस में लड़कालड़की एक छत के नीचे नहीं, बल्कि एक ‘कौमन अंडरस्टैंडिंग डौक्यूमैंट’ के नीचे रहेंगे. अब प्रेम नहीं, ‘म्यूचुअल लौजिस्टिक सपोर्ट’ होगा. वह प्रेमी या प्रेमिका कम जबकि ‘24×7 लौजिस्टिक सपोर्ट यूनिट’ ज्यादा होगा या होगी. पहला नियम होगा- ‘कोई भावनात्मक निवेश नहीं, केवल परिचालन समन्वय.’ आसान भाषा में कहें तो यह ‘नो इमोशनल इन्वैस्टमैंट, ओनली म्यूचुअल व्हीकल’ होगा. लड़की के फ्लैट में पानी न आए तो लड़का तत्काल सहायता देगा. लड़के के यहां मेड छुट्टी मार दे तो लड़की रणनीतिक सहायता उपलब्ध कराएगी.

इसे प्यार नहीं, ‘घरेलू आपदा प्रबंधन संधि’ कहा जाएगा. पहले लोग कहते थे- ‘तुम्हारे बिना जी नहीं सकते.’ अब लोग कहेंगे- ‘तुम्हारे वाईफाई बिना वर्क फ्रौम होम नहीं हो सकता.’ रिश्तों में अब भावना नहीं, ‘शर्तें लागू’ होंगी.

सुबह का मैसेज भी ऐसा आएगा- ‘डियर पार्टनर, कल रात आप की लोकेशन पर सफल स्टे औपरेशन हेतु धन्यवाद.’ इस नए युग में प्रेमीप्रेमिका नहीं होंगे, बल्कि ‘रणनीतिक बहुपयोगी साथी’ होंगे. दोनों का रिश्ता बिलकुल भारतअमेरिका जैसा होगा- जरूरत पड़ने पर साथ, बाकी समय स्वतंत्र विदेश नीति और कभीकभी आलोचना.

अब ब्रेकअप भी नहीं होगा. ‘स्ट्रैटजिक डाइवर्जेंस’ यानी आपसी परंतु व्यक्तिगत हितों के तहत दूरी निर्माण हेतु रणनीतिक अलगाव होगा जिसे आप सहमति आधारित बिछड़ाव कह सकते हैं. दोनों इंस्टाग्राम पर संयुक्त बयान जारी करेंगे- ‘हम ने आपसी हितों को ध्यान में रखते हुए अपने संबंधों की पुनर्समीक्षा कर इस रणनीतिक साझेदारी को 9 माह बाद समाप्त कर दिया है.’

पहले प्रेम में लोग चांदतारे तोड़ने की बातें करते थे. अब लोग कहेंगे- ‘तुम मेरी इमरजैंसी बैकअप पार्किंग हो.’ यहां तक कि डेटिंग ऐप्स भी बदल जाएंगी. टिंडर की जगह नया ऐप आएगा- ‘नाटो फौर सिंगल्स,’ जहां बायो में लिखा होगा- ‘आवश्यकता है सीमित देयता युक्त दीर्घावधि रणनीतिक सहयोग की.’

सालगिरह भी नहीं मनाई जाएगी. उस की जगह ‘वार्षिक संबंध समीक्षा बैठक’ होगी, जिस में दोनों पिछले वर्ष की उपलब्धियां और कमियां प्रस्तुत करेंगे. ‘इस वर्ष आप ने
14 बार खाना और्डर किया, जबकि समझौते के अनुसार 20 बार करना था.’ बच्चों का प्रश्न उठेगा तो लोग कहेंगे, ‘फिलहाल हम केवल पायलट प्रोजैक्ट चला रहे हैं, फुल स्केल प्रोडक्शन बाद में देखेंगे.’

मांबाप भी अब पूछेंगे, ‘बेटा, लड़की कैसी है?’ तो जवाब मिलेगा, ‘मम्मी, बहुत बढ़िया है. 3 महीने से हमारा रणनीतिक सहयोग सफलतापूर्वक चल रहा है.’

दरअसल, आज का युवा प्यार से ज्यादा स्पेस चाहता है. उसे साथी कम, सुविधा ज्यादा चाहिए. वह ऐसा रिश्ता चाहता है जिस में रोमांस भी हो और स्वतंत्रता भी लेकिन जिम्मेदारी कम और मजेदारी असीमित हो. भविष्य में हो सकता है विवाह मंडप की जगह कौन्फ्रैंसरूम हों और पंडित की जगह रिलेशनशिप कंसल्टैंट बैठा हो. फेरे लेने के बजाय दोनों ‘एमओयू’ साइन करें.

और अंत में नोटरी की आवाज आए, ‘अब आप दोनों सात जन्मों के नहीं, अगले 6 महीनों के स्ट्रैटजिक पार्टनर घोषित किए जाते हैं.’ Modern Relationships                                l

 

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