Early Periods in Girls: छह साल की उम्र शरीर और दिमाग़ के लिए बेहद नाजुक होती है. इस उम्र में बच्चे कार्टून देखते हैं, साइकिल चलाना सीखते हैं और होमवर्क के लिए मम्मी से डांट खाते हैं लेकिन इंग्लैंड की रहने वाली गैबी के लिए छह साल की उम्र का मतलब कुछ और था. गैबी को पहली बार पीरियड्स 6 साल की नाजुक उम्र में शुरू हो गये थे. बेटी की यह हालत देखकर माँ की रातों की नींद उड़ गई थी. क्या थी वजह? आइये जानते हैं.
गैबी की मां ने जब अपनी बेटी में ये बदलाव देखा तो वह तुरंत डॉक्टर के पास पहुंचीं लेकिन उन्हें भी अंदाजा नहीं था कि आगे क्या होगा. बाल रोग विशेषज्ञों की पूरी टीम गैबी के केस पर रिसर्च करने में जुट गई. डॉक्टर्स ने अपने करियर में पहले कभी ऐसा मामला नहीं देखा था. यह सेंट्रल प्रिकॉशियस प्यूबर्टी का बेहद दुर्लभ और एक्सट्रीम केस था.
डॉक्टर इसे CPP कहते हैं. नॉर्मल भाषा में इसका मतलब हुआ, समय से पहले यौवन आना. लड़कियों में आमतौर पर पीरियड्स 10 से 14 साल के बीच शुरू होते हैं लेकिन CPP में दिमाग गलती से 6-7 साल की उम्र में ही हार्मोन का सिग्नल भेजने लगता है. इसका नतीजा यह होता है कि शरीर 6 साल में ही 14 साल जैसा बर्ताव करने लगता है.
पहले लगता था ये सिर्फ जेनेटिक्स है लेकिन अब डॉक्टर मानते हैं कि इसके पीछे कई वजहें हैं. फैट सेल्स एस्ट्रोजन बनाती हैं. जंक फूड और कम खेलने से बच्चियां पहले मोटी हो रही हैं और दिमाग़ को लग रहा है कि अब बड़ी हो गई. प्लास्टिक की बोतल, कॉस्मेटिक, शैंपू में पाए जाने वाले BPA और Phthalates ये शरीर में जाकर नकली एस्ट्रोजन की तरह काम करते हैं. कई घंटों की स्क्रीन रौशनी और कम नींद से तनाव पैदा होता है और यह तनाव भी हार्मोन को ट्रिगर करता है. इन सब के अलावा प्रोसेस्ड फूड भी बड़ी वजह हैं. UK में पिछले 10 साल में 8 साल से कम उम्र में प्यूबर्टी के केस 200 फीसदी बढ़े हैं. भारत में भी पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजिस्ट रिपोर्ट यही कह रही है.
गैबी का शरीर जब 6 साल का था उसका दिमाग 14 साल जैसा बर्ताव करने लगा. वो कार्टून और गुड़ियों की दुनिया में थी लेकिन उसका दिमाग़ उसे ऐसी दुनिया में धकेल रहा था जिसके लिए वो तैयार ही नहीं थी.
डॉक्टर बताते हैं कि ऐसे बच्चों को 3 बड़े खतरे होते हैं. पहला मेंटल ट्राउमा. पीरियड्स से शरीर में बदलाव आते हैं और कई बार ऐसी बच्चियां स्कूल में मजाक बन जाती हैं. 6 साल की बच्ची ये सब समझ नहीं पाती ऐसे में डिप्रेशन और एंग्जायटी का खतरा बहुत बढ़ जाता है.
दूसरा खतरा हाइट रुक जाने का होता है. शरीर जल्दी बड़ा तो होता है लेकिन ग्रोथ प्लेट जल्दी बंद हो जाती है. नतीजा यह होता है कि एडल्ट होने पर हाइट कम रह जाती है. तीसरा और सबसे बड़ा खतरा, यौन शोषण का होता है. बाहर से 14 साल की दिखने वाली बच्ची को लोग 14 साल का ही समझते हैं इसीलिए गैबी की मां घबराई थीं और इसी डर की वजह से बाल रोग विशेषज्ञों को रिसर्च करनी पड़ी.
अच्छी खबर ये है कि CPP का इलाज संभव है. हार्मोन इंजेक्शन से प्यूबर्टी को रोका जा सकता है. इलाज की इस प्रक्रिया में शरीर को पॉज बटन दबाकर नॉर्मल उम्र तक आने दिया जाता है लेकिन प्रॉब्लम ये है कि समय रहते मां-बाप इस प्रॉब्लम को पहचान ही नहीं पाते. अगर 8 साल से पहले लड़कियों में ब्रेस्ट डेवलपमेंट, 9 साल से पहले पीरियड्स या 9 साल से पहले लड़कों में आवाज बदलना और बाल आएं तो तुरंत पीडियाट्रिशियन से मिलना चाहिए. ऐसे मामलों में जल्दी बड़ी हो रही है, अच्छी बात है कहकर टालना खतरनाक है. गैबी का केस चौंकाने वाला है इस केस में सिर्फ 6 साल में ही गैबी का शरीर पूरी तरह मेच्योर हो चुका था.
कई मामलों में गलती पेरेंट्स की भी होती है. हम बच्चों को जल्दी बड़ा करना चाहते हैं. जल्दी फोन पकड़ा देते हैं. जल्दी मेकअप किट इस्तेमाल करने की छूट दे देते हैं और प्रकृति ने भी मानो रफ्तार पकड़ ली है लेकिन बचपन वापस नहीं आता. 6 साल की उम्र पीरियड्स की नहीं, प्ले की होती है. मां-बाप को ये तय करना होगा कि कहीं अनजाने में हम अपने बच्चों को समय से पहले बड़ा तो नहीं कर रहे क्योंकि जब शरीर समय से पहले दौड़ने लगता है तो मासूमियत पीछे छूट जाती है और गैबी जैसी हजारों बच्चियों को अपनी उम्र से पहले ही बड़ी होने की सजा भुगतनी पड़ती है. Early Periods in Girls





