Houthi Rebels Attack: ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने 6 अगस्त 2026 को यमन और सऊदी अरब में एक साथ बड़े हमले कर पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ा दिया है. बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से किए गए हमलों में यमन के 58 सैनिक मारे गए हैं जबकि बड़ी संख्या में सैनिक घायल हुए हैं. सऊदी अरब के नजरान शहर पर भी हमला हुआ है जिसमें 11 लोग घायल हुए हैं. घायलों की संख्या बढ़ने का अनुमान है. हमलों के बाद कई इलाकों में भयंकर आग लग गई है. हूती विद्रोहियों ने सरकारी सेना के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है.

हूती विद्रोही लंबे समय से ड्रोन, बैलिस्टिक मिसाइलों और क्रूज मिसाइलों के जरिए यमन तथा सऊदी अरब पर हमले करते रहे हैं. इन हमलों के पीछे उनका उद्देश्य यमन में चल रहे गृहयुद्ध में बढ़त हासिल करना और क्षेत्र में अपने प्रभाव का विस्तार करना है. सऊदी अरब के नेतृत्व वाला गठबंधन वर्षों से यमन सरकार का समर्थन करता रहा है, जबकि हूती संगठन को ईरान का समर्थन प्राप्त होने का आरोप लगाया जाता है.

ट्रम्प के सामने कठिन विकल्प

लंबे समय से जारी ईरान अमेरिका युद्ध में अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब ऐसे मोड़ पर पहुंच चुके हैं, जहां उनके सामने केवल दो विकल्प बचे हैं – या तो ईरान के बढ़ते क्षेत्रीय प्रभाव को स्वीकार करें, या फिर संघर्ष को और व्यापक बनाकर सैन्य कार्रवाई तेज करें. मगर ऐसा करने पर उनकी अपनी कुर्सी दांव पर लगी हुई है. दरअसल ट्रंप दो बिल्लियों की लड़ाई में कूद तो गए हैं मगर अब फंदा उनकी अपनी गर्दन में आ फंसा है.

अब तक के युद्ध में अमेरिका ने हवाई और नौसैनिक अभियानों के जरिए कुछ सामरिक सफलताएं जरूर हासिल कीं, लेकिन वह अपने प्रमुख रणनीतिक लक्ष्य पूरे नहीं कर पाए. जबकि युद्ध के बाद ईरान पहले की तुलना में अधिक संगठित और प्रभावशाली होकर उभरा है और हूती जैसे उसके सहयोगी समूह लगातार अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन कर रहे हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस क्षेत्र में कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए, तो लाल सागर, खाड़ी क्षेत्र और पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता और बढ़ सकती है. इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर बहुत गहरा पड़ेगा. Houthi Rebels Attack

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