Shehzad Poonawalla: फायरब्रांड प्रवक्ता शहजाद पूनावाला का भारतीय जनता पार्टी से मोहभंग हो गया है. उन्होंने अपने X बायो से ‘नेशनल स्पोक्सपर्सन, बीजेपी’ का टैग हटा दिया है. शहजाद ने अपने दूसरे सोशल मीडिया हैंडलों के डिस्क्रिप्शन से भी बीजेपी शब्द हटा दिया है और उसकी जगह भारतीय लिख दिया है. बायो बदलने के कुछ देर बाद उन्होंने अपने दो पुराने वीडियो भी दोबारा शेयर किए, जिनमें वह सक्रिय राजनीति छोड़ने की इच्छा का जिक्र करते नजर आए. एक वीडियो में शहजाद पूनावाला कहते हैं कि समाज सेवा राजनीति से कहीं बड़ी है. 2025 के लोकसभा चुनाव के बाद वह सक्रिय राजनीति छोड़ने का मन बना चुके थे.

38 वर्षीय शहजाद पूनावाला बीते कुछ सालों से टीवी डिबेट और राजनीतिक मंचों पर बीजेपी का प्रमुख चेहरा रहे हैं. वे सरकार के पक्ष को बड़े प्रभावशाली ढंग से लोगों के सामने रखने की क्षमता रखते हैं. मंच पर वे विपक्षी नेताओं से जम कर वाद-विवाद ही नहीं करते, कई बार उनसे भिड़ भी जाते हैं. ऐसे में बीजेपी से उनका जाना पार्टी को धक्का पहुंचाएगा.

गौरतलब है कि 2017 में राहुल गांधी को के नेतृत्व को नकारने और वंशवाद के मुद्दे पर कांग्रेस का विरोध करने के बाद पूनावाला कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए थे. बीजेपी का दामन थाम कर अपनी राजनीतिक पहचान बनाने वाले शहजाद पूनावाला को पार्टी ने 2021 में दिल्ली बीजेपी के सोशल मीडिया प्रकोष्ठ का प्रभारी बनाया था. वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के मुखर समर्थक रहे हैं और टीवी डिबेट में कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखे हमले करते रहे हैं. इसीलिए अगर वे वास्तव में सक्रिय राजनीति या बीजेपी से अलग होते हैं, तो दिलचस्प विडंबना यह होगी कि जिस व्यक्ति ने वर्षों तक कांग्रेस नेताओं से पूछा कि नेता अपनी पार्टी क्यों छोड़ रहे हैं, अब वही अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर सवालों के केंद्र में होगा.

बीजेपी के पास प्रवक्ताओं की कमी नहीं है. सुधांशु त्रिवेदी जैसे नेता संसद और मीडिया दोनों मंचों पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखते हैं. संबित पात्रा ने भी लंबे समय तक टीवी डिबेट की राजनीति में बीजेपी की विशिष्ट शैली तैयार की है.

लेकिन पूनावाला की उपयोगिता कुछ अलग रही है. वे कांग्रेस की राजनीतिक संस्कृति को भीतर से देखने का दावा करते हुए बीजेपी के पक्ष में तर्क रखते रहे हैं. इसलिए राहुल गांधी और कांग्रेस पर उनका हमला बीजेपी के लिए केवल एक प्रवक्ता का हमला नहीं, बल्कि ‘पूर्व कांग्रेस नेता की गवाही’ के रूप में पेश किया जाता रहा है.

यही वजह है कि यदि वे वास्तव में बीजेपी छोड़ते हैं, तो नुकसान केवल एक टीवी प्रवक्ता का नहीं होगा बल्कि पार्टी एक ऐसे चेहरे को खोएगी जिसने कांग्रेस-विरोध को अपनी राजनीतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया.

बीजेपी की मीडिया राजनीति समय के साथ काफी बदली है. एक दौर था जब शाहनवाज हुसैन और मुख्तार अब्बास नकवी पार्टी प्रवक्ता के रूप में सबसे पहचाने जाने वाले मुस्लिम चेहरों में थे. टीवी चैनलों से लेकर मंचों तक उनकी आवाज सुनाई पड़ती थी. समय बदला और पार्टी के मीडिया चेहरे भी बदल गए. मुसलमान को गाली देने वाली पार्टी ने शाहनवाज हुसैन और मुख़्तार अब्बास नकवी को किनारे कर सुधांशु त्रिवेदी, संबित पत्रा और सहजाद पूनावाला जैसे नेताओं को प्रवक्ता के तौर पर स्थापित किया. शहजाद पूनावाला ने तो डिजिटल मीडिया और टीवी बहस की तेज रफ्तार वाली राजनीति में अपनी अलग जगह बनाई. अब अगर ऐसा नेता सक्रिय राजनीति छोड़ने की तरफ बढ़ता है तो स्वाभाविक सवाल होगा – क्या पार्टी के भीतर कुछ गड़बड़ है? कहीं ऐसा तो नहीं कि बीते कुछ समय से संसद के भीतर और बाहर जिस तरह बीजेपी की भद्द पिट रही है उसने पूनावाला का बीजेपी से मोहभंग कर दिया? Shehzad Poonawalla

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