Temple Theft: जितना ज्यादा पूजापाठ भारतीय हिंदू करते हैं उतना शायद कोई और समाज नहीं करता. धर्म पर हिंदुओं, चाहे वे कहीं भी रह रहे हों, का खर्च और धर्मों के लोगों से ज्यादा होता है. यह बात दूसरी है कि हिंदू भक्त लडऩेमरने और मेहनत में उतने तेज हैं या नहीं कि जितने दूसरे धर्मों के हैं पर चोरी में वे सब से तेज दिख रहे हैं. धर्म और चोरी का चोलीदामन का साथ है, यह राम मंदिर में चोरी के मामले से भी स्पष्ट है जिस में फिलहाल 8 लोग गिरफ्तार किए गए हैं और बीसियों पर पुलिसिया नजर है. राम जी की कृपा रही तो सभी, रमाशंकर यादव को छोड़ कर, जल्दी जमानत पा कर बाहर आ जाएंगे.
चोरी के मामलों में भारतीयों का कोई सानी नहीं. हां, विदेशों में जम कर डंका बज रहा है क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय आजकल विदेश यात्रा पर जा रहे हैं. 3 करोड़ 27 लाख भारतीय भारत से गल्फ देशों, अमेरिका, इंगलैंड, थाईलैंड, सिंगापुर गए और सब जगह से उन के होटलों से सामान चोरी की रिपोर्ट्स आ रही हैं, गंदगी फैलाने और होटलों से चोरी करने के मामले ज्यादा रोशनी में इसलिए भी आते हैं क्योंकि उन की संख्या बहुत बड़ी है.
चोरी के मामले में इंडियन रेलवे भी भारतीय रेल यात्रियों से बहुत परेशान है. पिछले 4 सालों में रेल के एसी कोचों में मिलने वाले बैडिंग में से 1.27 करोड़ चादर, तौलिए, ब्लैंकेट, तकिए कवर चोरी कर लिए गए. भारत में जैसेजैसे धार्मिक पर्यटन बढ़ रहा है वैसेवैसे चोरी भी बढ़ रही है.
आश्चर्य यह है कि देश हो या विदेश, ये यात्री अच्छाखासा पैसा दे कर एसी कंपार्टमैंट में सफ़र करने के साथ अच्छे होटलों में ठहरने के ठीकठाक पैसे देते हैं. यानी, ये यात्रि किसी भी सूरत में गरीब, पैसे के मारे, अनपढ़ नहीं थे. कुछ मंदिरों में पाप धोने गए थे तो कुछ विदेशों में सुंदर स्थान देखने व जीभर के सुंदर लड़कियों को देखने का पाप करने गए थे. दोनों तरह के मध्यवर्ग और उच्चवर्ग के लोग चोरी करने से बाज नहीं आते.
असल में कहने को धर्म सदाचार सिखाता है पर हिंदू धर्म समेत सभी धर्मों का सदाचार से कोई वास्ता न कभी रहा है न आज है. रामायण, महाभारत दोनों चोरियों पर आधारित कहानियां हैं. एक में सिंघहासन और पत्नी चोरी का मामला तो दूसरी में राज्य के विभाजन और जुए में चोरी थी. सदाचार सिखाने वाला धर्म अमृत कलश की चोरी के विष्णु के मोहिनी अवतार का महिमामंडन नहीं करता.
सदियों से इस तरह की चोरियों को सुनसुन कर भक्तों को ऐसे हादसे आम व्यवहार लगने लगते हैं. ऐसे में वे कब, क्या कर बैठें और उन के दिमाग पर शिकन भी न आए तो कोई आश्चर्य की बात नहीं. धर्म का नैतिकता, तार्किकता, सच्चरित्रता से कभी वास्ता नहीं रहा पर धर्मों ने हमेशा ढोल बजाया है कि जो भक्त बड़ा है वह अपनेआप में सच्चरित्र है. धर्म के इशारों पर कुछ को पनाह देने, कुछ को खाना खिलाने और कुछ को रक्षा करने पर भक्तों की भरी सभा में इतनी चर्चा की जाती है कि उन के सारे सामाजिक बुरे काम छिप जाते हैं.
रेलों से चोरी किए तौलिए, बैडशीट, तकिए कोई कीमती नहीं होते, वे कई बार इस्तेमाल हो चुके होते हैं. कितने ही तो टैंडर से खरीदे गए घटिया क्वालिटी के होते हैं. उन्हें चोरी कर के ले जाने वाले ज्यादातर खुद उन्हें इस्तेमाल भी नहीं करेंगे क्योंकि वे उन से अच्छी क्वालिटी की चीजें खरीदने की क्षमता रखते हैं. यह तो धर्म की अनैतिकता और बेईमानी की शिक्षा का परिणाम है कि भारतीय इतने ज्यादा चोर हैं. Temple Theft





