Social Media Influencers: सोशल मीडिया ऐसे बड़े समुद्र में तबदील हो चुका है जिस में मीठा पानी भी खारे पानी में बदल जाता है. यहां अगर अच्छा इन्फ्लुएंसर भी है तो भी वह गंदों के बीच ढक दिया जाता है. इन्फ्लुएंसरों में इस दुनिया की कोई समझ है, उन में कोई मोरैलिटी है. कंटैंट का संपादन और जिम्मेदारी तो दूरदूर तक नहीं. इस मीडिया के तकरीबन हर प्लेटफौर्म पर कोई भी कैमरा और माइक उठा कर कुछ भी कहता नजर रहा है जिस की कोई क्रैडिबिलिटी नहीं. ऐसे इन्फ्लुएंसर्स अपने फौलोअर्स और व्यूअर्स का समय पैसा बरबाद कर रहे हैं. आइए, मिलाते हैं कुछ इन्फ्लुएंसर्स से और जानते हैं वे अपने कंटैंट की रैंकिंग में कहां ठहरते हैं.

 क्या होती है रील वर्सेज रि­यलिटी

शहर दिखाई देता है. ऊपर से देखने पर शहर के घर और इमारतें बेहद छोटी नजर आती हैं. नजारा इतना शानदार होता है कि कोई भी उसे देख कर प्रभावित हो जाए. इसी जगह पर एक बड़ा पत्थर भी दिखाई देता है, जो देखने में ऐसा लगता है मानो उस के नीचे सीधी गहरी खाई हो. अगर कोई वहां से गिर जाए तो उस का बचना लगभग नामुमकिन होगा. इसी दौरान एक युवक उस पत्थर के किनारे पहुंचता है और दूसरा उस का हाथ पकड़ लेता है. इस के बाद पहला युवक नीचे की ओर लटक जाता है. कैमरे में यह दृश्य बेहद खतरनाक दिखाई देता है. ऐसा लगता है कि अगर उस का हाथ छूट गया तो वह सीधे खाई में जा गिरेगा.

वीडियो देखने वाले लोगों की धड़कनें भी इस दौरान बढ़ जाती हैं. कई लोगों को लगता है कि युवक अपनी जान जोखिम में डाल कर खतरनाक स्टंट कर रहा है. कुछ सैकंड तक पूरा सीन इतना असली और डरावना दिखाई देता है कि किसी को भी यकीन हो जाए कि यह बहुत बड़ा जोखिम है.

लेकिन कहानी में असली मोड़ इस के बाद आता है. जैसे ही कैमरे का एंगल बदलता है, पूरी सच्चाई सामने आ जाती है. तब पता चलता है कि जिस जगह को अब तक गहरी खाई समझा जा रहा था, उस के ठीक नीचे थोड़ी ही दूरी पर जमीन मौजूद है. यानी, अगर कोई वहां से नीचे उतर भी जाए या कूद जाए तो उसे कोई खास खतरा नहीं होगा. असल में पूरा खेल कैमरे के एंगल का था. जिस तरीके से वीडियो रिकौर्ड किया गया, उस से ऐसा भ्रम पैदा हुआ कि युवक बहुत ऊंचाई पर खड़ा है और उस के नीचे कुछ भी नहीं है. जबकि हकीकत में स्थिति बिलकुल अलग थी. कैमरे की सही पोजीशन और फ्रेमिंग ने एक साधारण जगह को बेहद खतरनाक और रोमांचक बना दिया.

यही कारण है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर चीज पर आंख बंद कर के भरोसा नहीं करना चाहिए. कई बार वीडियो एडिटिंग, कैमरा एंगल और क्रिएटिव शूटिंग के जरिए ऐसे दृश्य तैयार किए जाते हैं जो वास्तविकता से काफी अलग होते हैं. देखने वालों को लगता है कि वे जो देख रहे हैं, वही सच है, लेकिन परदे के पीछे की कहानी कुछ और ही होती है. इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है.

रील्स के लिए बाहुबली बना युवक

सोश्ल मीडिया पर ज्यादा लाइक, व्यूज और फौलोअर्स पाने की चाहत कई लोगों को ऐसे कदम उठाने पर मजबूर कर रही है, जो उन की जान तक के लिए खतरा बन सकते हैं. उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से सामने आया एक ताजा मामला इसी बढ़ती प्रवृत्ति की ओर इशारा करता है. यहां एक बंदे ने खुद को ताकतवर और अलग साबित करने के लिए ऐसा स्टंट किया, जिस का वीडियो देखते ही देखते इंटरनैट पर वायरल हो गया. हालांकि, वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने भी तुरंत कार्रवाई करते हुए बंदे के खिलाफ कदम उठा लिया.

दरअसल, प्रतापगढ़ के प्रसिद्ध बेल्हा देवी मंदिर घाट पर शूट किए गए एक वीडियो में एक बंदा अपनी पल्सर बाइक को दोनों हाथों से उठाते हुए नजर आता है. हैरानी की बात यह है कि बाइक उठाने के बाद उस की पत्नी उसी बाइक पर बैठ जाती है और बंदा बाइक के साथसाथ पत्नी का वजन भी उठाने की कोशिश करता दिखाई देता है. इस पूरे स्टंट को कैमरे में रिकौर्ड कर सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया, जहां यह तेजी से लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया.

सोशल मीडिया पर उस के अकाउंट को हजारों लोग फौलो करते हैं. बताया जा रहा है कि उस के इंस्टाग्राम अकाउंट पर 14 हजार से अधिक फौलोअर्स हैं. यही वजह है कि उस का नया वीडियो भी काफी तेजी से वायरल हुआ और बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच गया. हालांकि, एक वीडियो को किसी अन्य यूजर द्वारा एक्स प्लेटफौर्म पर साझा किया गया है.

600 मिलियन अंधदर्शक

इंस्टाग्राम पर कई बार ऐसी रील्स वायरल हो जाती हैं जिन्हें देख कर लगता है कि इस में ऐसा क्या खास था. कंटैंट क्रिएटर अभिषेक शर्मा (ladkahai99) की एक रील को 60 करोड़ से ज्यादा बार देखा जा चुका है और उसे 1 करोड़ से ज्यादा लाइक्स मिले हैं. यह संख्या बहुत बड़ी है. रील मजेदार है, लेकिन उस में न कोई नई जानकारी है, न कोई सीख और न ही कोई गहरा संदेश. लोग उसे देखते हैं, 2–3 सैकंड हंसते हैं और फिर अगले वीडियो पर चले जाते हैं. तो फिर ऐसे वीडियो इतने बड़े स्तर पर वायरल कैसे हो जाते हैं?

आज अधिकांश लोग इंस्टाग्राम पर मनोरंजन के लिए आते हैं. वे लंबे वीडियो या गंभीर विषयों के बजाय ऐसे छोटे वीडियो देखना पसंद करते हैं जो बिना ज्यादा सोचविचार के तुरंत हंसा दें या कुछ सैकंड के लिए ध्यान खींच लें.

इस के अलावा, जब कोई रील ज्यादा लोगों द्वारा पूरी देखी जाती है, उस पर लाइक, शेयर और कमैंट आते हैं तो इंस्टाग्राम उसे और ज्यादा लोगों तक पहुंचाना शुरू कर देता है. धीरेधीरे वही रील करोड़ों लोगों की स्क्रीन पर दिखाई देने लगती है. ऐसे कंटैंट को सब से ज्यादा वे लोग देखते हैं जो खाली समय में सिर्फ टाइमपास करना चाहते हैं. उन के लिए सोशल मीडिया ज्ञान लेने की जगह नहीं, बल्कि कुछ मिनटों के मनोरंजन का जरिया होता है. यही वजह है कि कई बार हलकाफुलका और बिना किसी खास उद्देश्य वाला कंटैंट भी रिकौर्डतोड़ व्यूज हासिल कर लेता है. यह जरूरी नहीं कि सब से ज्यादा देखा जाने वाला कंटैंट सब से ज्यादा उपयोगी भी हो.

 जिंदगी को जीना है तो निकल पड़ो

सोशल मीडिया पर एक ऐसे अंकल की वीडियो तेजी से वायरल हो रही है जिन्होंने अपनी जिंदगी के एक्सपीरियंस से आजकल के यूथ को ऐसी सीख दी कि उन की बातें इतनी सीधी और सच्ची हैं कि लाखों लोगों ने उन से खुद को जुड़ा हुआ महसूस किया. वीडियो में वे ट्रैवलिंग को ले कर अपनी सोच शेयर करते हैं. वे बताते हैं कि जिंदगी को सिर्फ जीना नहीं, बल्कि महसूस करना भी जरूरी है.

ये अंकल सोशल मीडिया पर instauncle_9 के नाम से हैं और अब तक इन के 4 लाख से ज्यादा फौलोअर्स हो चुके हैं. वीडियो में अंकल कहते हैं कि आजकल 20-30 साल के बहुत से युवा घूमनेफिरने की बातें तो खूब करते हैं लेकिन अकसर प्लान बनातेबनाते ही समय निकाल देते हैं. वहीं उन की उम्र के लोग, जो 60-70 साल के हैं, अब बिना ज्यादा सोचे निकल पड़ते हैं. इस के पीछे की वजह बताते हुए वे कहते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ इंसान को एहसास होने लगता है कि इंतजार करतेकरते जिंदगी का बहुत बड़ा हिस्सा निकल जाता है.

उन का मानना है कि कई लोग सही समय का इंतजार करते रहते हैं. कभी पैसे का बहाना, कभी काम का दबाव और कभी जिम्मेदारियों का हवाला दे कर अपने सपनों को टालते रहते हैं लेकिन एक दिन अचानक पता चलता है कि जवानी गुजर चुकी है, दोस्त अपनीअपनी जिंदगी में बिजी हो चुके हैं और शरीर में पहले जैसी ताकत नहीं बची है. तब समझ आता है कि जिन सफरों को कल पर टालते रहे, उन्हें उसी वक्त जी लेना चाहिए था.

अंकल कहते हैं कि घूमनेफिरने का सब से अच्छा समय युवावस्था ही होती है. इसी उम्र में एनर्जी होती है, नई चीजें सीखने की उत्सुकता होती है और जिंदगी को खुल कर देखने का नजरिया भी बनता है. जब इंसान जवान होता है, तब वह पहाड़ चढ़ सकता है, लंबी यात्राएं कर सकता है, नए लोगों से मिल सकता है और अनगिनत एक्सपीरियंस अपने साथ जोड़ सकता है. यही एक्सपीरियंस आगे चल कर जिंदगी की सब से खूबसूरत यादें बन जाते हैं.

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए वे कहते हैं कि अगर कोई इंसान खुद दुनिया देखने नहीं निकलता तो उस की जिंदगी काफी हद तक दूसरों की कहानियों तक ही सीमित रह जाती है. सोशल मीडिया पर लोगों की तसवीरें और वीडियो देख कर दुनिया को समझा नहीं जा सकता. असली एक्सपीरियंस तब मिलता है जब आप खुद किसी नई जगह पर जाते हैं, वहां के लोगों से मिलते हैं और वहां की संस्कृति को करीब से महसूस करते हैं.

अंकल की यह सोच लोगों को इतनी पसंद आई कि उन की दोनों रील्स पर करोड़ों व्यूज आ चुके हैं. खास बात यह है कि सिर्फ उन की उम्र के लोग ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में युवा भी उन्हें फौलो कर रहे हैं. उन की बातें युवाओं के दिल को छू रही हैं क्योंकि वे किसी किताब की सीख नहीं, बल्कि जिंदगी जी कर हासिल किए गए एक्सपीरियंस शेयर करते हैं.

कैमरा औन होते ही शुरू खतरनाक ड्रामा

रील बनाना या वीडियो तैयार करना अपनेआप में कोई गलत बात नहीं है. कई लोगों ने इसी के जरिए पौपुलैरिटी हासिल की है और अपने लिए नए अवसर भी बनाए हैं लेकिन जब पौपुलैरिटी पाने की चाहत लोगों को अपनी सुरक्षा और समझदारी से दूर ले जाने लगे, तब यह चिंता का विषय बन जाता है.

इन दिनों भी ऐसा ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देख कर लोग हैरानी जता रहे हैं और नाराजगी भी.

वायरल हो रहे इस वीडियो में एक महिला चलती ट्रेन के दरवाजे पर खड़ी दिखाई देती है. वीडियो की शुरुआत में वे ट्रेन के गेट के दोनों तरफ के दोनों हैंडल को पकड़ कर बाहर की तरफ झुकी हुई नजर आती है. ऐसा लग रहा है जैसे वे किसी फिल्मी सीन की शूटिंग कर रही हो. वीडियो रिकौर्ड करने वाला व्यक्ति उस के सामने मौजूद होता है और महिला उस से कैमरा चालू करने व रिकौर्डिंग शुरू करने के लिए कहती है.

इस के बाद महिला और अधिक पीछे की ओर झुक जाती है. वह चलती ट्रेन के दरवाजे से बाहर की तरफ लटकते हुए अभिनय करती है और कैमरे के सामने संवाद बोलती है. वीडियो में उसे यह कहते सुना जा सकता है, ‘अरे, मैं ट्रेन में वीडियो बनवाऊं तो कोई बोलेगा क्या?’ उस का यह अंदाज देखने वालों को हैरान कर देता है क्योंकि जिस तरह से वह ट्रेन के दरवाजे पर खड़ी हो कर वीडियो बना रही है, उस में जरा सी चूक भी बड़ा हादसा बन सकती थी.

वीडियो में दिखाई गई लापरवाही ने सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. यही वजह है कि यह क्लिप तेजी से वायरल हो गई और लोगों ने इस पर जम कर गुस्सा निकाला. ये वायरल वीडियो एक्स प्लेटफौर्म पर @ChapraZila नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है. वीडियो सामने आने के बाद यह तेजी से लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया. फिलहाल यह क्लिप सोशल मीडिया पर खूब देखी जा रही है और लोग इसे ले कर अलगअलग तरह के रिऐक्शन दे रहे हैं.

डफली पर सोशल मुद्‍दे

सोशल मीडिया पर तरहतरह के रंगबिरंगे लोग दिखाई देते हैं. उन का कंटैंट पेश करने का स्टाइल भी निराला होता है. जैसे, इंस्टा क्रिएटर विपिन अपने इंस्टा अकाउंट में नाचगाने और डफली के साथ सार्वजनिक परेशानियों व मुद्दों को उठाता है, जैसे सड़क के गड्ढ़े, बंद नालियां, गलीमहल्ले में भरा नाले का पानी, कूड़ेकचरे का ढेर. अपनी रील्स में वह इन्हीं के बीच डफली ले नाचता है और सरकारी विभागों खासकर धौलपुर परिषद को टैग करता है.

रील्स पर मिले मिलियंस व्यूज, हजारों शेयर और कमैंट्स कई बार सरकार को जगा देते हैं और वह आवश्यक कदम उठा परेशानी को दूर करती है, जैसे एक 4 मिलियन व्यूज वाली रील में सड़क पर जमा गंदे पानी, जो लोगों के घरों में जा रहा था, को सिर्फ 24 घंटे में निकाल दिया गया. मगर कई बार हजारों मिलियन व्यूज के बाद भी रील्स सिर्फ रील्स बन कर ही रह जाती हैं और इन परेशानियों पर कोई ध्यान नहीं देता.

विपिन इन मुद्दों को निराले ढंग से सामने रखता रहा है. कमैंट्स में लोग उस के अंदाज को देख कहते हैं, ‘बिना कुछ कहे बहुतकुछ कह दिया’, ‘धौलपुर परिषद को जगाने का काम जो यहां की जनता नहीं कर पाई, आप कर रहे हो’, ‘हमारे शहर भी आ कर ऐसी रील्स बनाओ, शायद हमारे यहां की परिषद भी जाग जाए’, ‘आप अच्छा काम कर रहे हो.’ मगर यहां सोचने की बात तो यह कि क्या रील्स बनेगी तभी परिषद या सरकार अपनी जिम्मेदारी समझेगी, क्या वह इन रील्स में दिखाई गंदगी पर अपना नाम साफ करने से पहले खुद ही सफाई नहीं कर सकती.

महिला ने इंडियंस को दी सलाह

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक भारतीय महिला का वीडियो लोगों के बीच चर्चा में है. वह अपनी क्लिप में लोगों को सलाह देती नजर आती है कि अगर मौका मिले तो कम से कम 5 से 6 साल के लिए भारत से बाहर जा कर रहना चाहिए. उस का मानना है कि विदेश में बिताए गए ये कुछ साल किसी भी इंसान की सोच, व्यक्तित्व और फाइनैंशियल कंडीशन को पूरी तरीके से बदल सकते हैं.

वीडियो की शुरुआत एक टैक्स्ट मैसेज से होती है, जिस में लिखा होता है कि बस 5-6 साल के लिए इंडिया छोड़ दो. इस के बाद वह चलते हुए कैमरे से बात करती है और लोगों को समझाने की कोशिश करती है कि विदेश जा कर रहना सिर्फ पैसे कमाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा एक्सपीरियंस है जो इंसान को अंदर से मजबूत बनाता है. उस का कहना है कि जब कोई बंदा अपने देश और आरामदायक माहौल से बाहर निकल कर किसी नए देश में रहता है तो उसे हर छोटीबड़ी चीज खुद संभालनी पड़ती है. वहां परिवार का सहारा नहीं होता, दोस्त कम होते हैं और हर दिन नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे हालात इंसान को आत्मनिर्भर बनाते हैं और उसे जीवन के कई जरूरी सबक सिखाते हैं.

उस ने यह भी कहा कि विदेश में रहने से लोगों की सोच का दायरा बढ़ता है. अलगअलग संस्कृतियों के लोगों से मिलने का मौका मिलता है, इस से नई परिस्थितियों में खुद को ढालने की क्षमता डैवलप होती है.

कई देशों में मिलने वाली सैलरी और वहां के कामकाजी अवसर लोगों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. यही वजह है कि बड़ी संख्या में यूथ विदेश जा कर काम करने का सपना देखते हैं. हालांकि, उन की यह सलाह सभी लोगों को पसंद नहीं आई. वीडियो वायरल होने के बाद कमैंट सैक्शन में लोगों के अलगअलग रिऐक्शन देखने को मिले. कुछ लोगों ने उस की बात का समर्थन किया, जबकि कई लोगों ने उस की इस सोच पर सवाल उठाए.

एक यूजर ने मजाकिया अंदाज में लिखा, ‘मैम, मैं 5 वर्षों से दुबई में हूं, लेकिन मेरी जिंदगी तो अभी तक नहीं बदली?’ वहीं दूसरे यूजर ने पूछा कि विदेश जाने के लिए पैसे कहां से लाएं? एक अन्य व्यक्ति ने लिखा कि दीदी, बाहर जाना तो चाहते हैं लेकिन कोई अच्छी लिंक या मौका ही नहीं मिल रहा. काफी समय से कोशिश कर रहे हैं. वहीं किसी ने सवाल किया कि यह भी बता दीजिए कि विदेश जाने में कुल कितना खर्च आएगा?

वीडियो पर सब से ज्यादा चर्चा उन लोगों की टिप्पणियों को ले कर हुई जिन्होंने इस सलाह का विरोध किया. एक यूजर ने लिखा कि अगर कोई वहां जा कर आप से कहे कि अपने देश वापस जाओ तो? हमारे देश में किसी चीज की कमी नहीं है. जरूरत सिर्फ अच्छी शिक्षा और सही स्किल्स की है. अपने देश में रह कर सम्मान के साथ काम करना ज्यादा बेहतर है, बजाय इस के कि विदेश जा कर छोटेमोटे काम किए जाएं. धीरेधीरे यह वीडियो सिर्फ एक साधारण सलाह तक सीमित नहीं रहा बल्कि इस ने एक बड़ी बहस को जन्म दे दिया. लोग इस बात पर चर्चा करने लगे कि सफलता पाने के लिए क्या सच में विदेश जाना जरूरी है या फिर सही मेहनत और अवसरों के जरिए भारत में रह कर भी वही मुकाम हासिल किया जा सकता है. सोशल मीडिया पर किसी रील को देख कर इन्फ्लुएंस होने से अच्छा है आप खुद पर काम करें. हर किसी की फाइनैंशियल और लाइफ सिचुएशन एक तरह की नहीं होती.

अपूर्वा मखीजा की दो कौड़ी की बातें

सोशल मीडिया की दुनिया में अपनी बेबाक राय और अनोखे अंदाज के लिए पहचानी जाने वाली अपूर्वा मखीजा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

सोशल मीडिया पर नाम से पौपुलर इन्फ्लुएंसर और कंटैंट क्रिएटर अपूर्वा मखीजा एक बार फिर अपने एक बोल्ड और विवादित बयान के कारण सु​​​​र्खियों में आ गई है. अपूर्वा मखीजा ने अपनी वीडियो क्लिप के जरिए बताया कि एक बार एक कास्टिंग डायरैक्टर ने उन्हें गलत इरादे से अप्रोच किया था. इस के बाद उन्होंने अपनी मैनेजर का नंबर उस कास्टिंग डायरैक्टर को दे दिया था.

‘2 रुपए के रोल के लिए मैं किसी के साथ नहीं सो सकती, लेकिन हां, अगर कोई दुबई का शेख मेरे ऊपर 10-15 करोड़ रुपए फेंक कर मारेगा तो मैं इस के बारे में सोच सकती हूं लेकिन किसी एक मामूली रोल के लिए ऐसा कभी नहीं करूंगी.’

अपूर्वा का दुबई के शेख और पैसों के लिए सोने की बात करने वाला यह बयान सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया. इंटरनैट यूजर्स उन्हें इस बयान के लिए बुरी तरह ट्रोल कर रहे हैं. यूजर्स का कहना है कि एक इन्फ्लुएंसर होने के नाते उन्हें इस तरह के संवेदनशील विषयों पर ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

आज ज्यादातर इन्फ्लुएंसर सोशल मीडिया पर लोगों को किस चीज के लिए इन्फ्लुएंस कर रहे हैं, क्या इस बात के लिए कि महिलाओं का शरीर कोई सामान है जो अपनी सहूलियत के हिसाब से खरीद सकते हैं. आज की जेनरेशन को सोशल मीडिया किस तरह नचा रहा है और पौपुलर होने के चक्कर में लोग कुछ भी करने, किसी भी हद तक गिरने के लिए तैयार हैं. ये सबकुछ फौलोअर गेन करने के लिए किया जा रहा है. लोग खुद पर नियंत्रण खो रहे हैं.

जेनजी के लिए बड़ी सीख अपराजिता

सोशल मीडिया के मौजूदा दौर में हर रोज हजारों कंटैंट क्रिएटर्स अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं. इंस्टाग्राम प्लेट्फौर्म पर @heyaprajita नाम से मशहूर अपराजिता ने अपनी क्रिएटिविटी और रिलेटेबल कंटैंट से सोशल मीडिया पर पहचान बनाई है.

अपराजिता बंसल एक फेमस डिजिटल कंटैंट क्रिएटर, मौडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं. वे इंस्टाग्राम पर ‘heyaprajita’ हैंडल के जरिए लोगों से जुड़ी हुई हैं. हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों में होने वाली पारंपरिक खेती, बागबानी और सस्टेनेबल लाइफस्टाइल को वे बहुत ही खूबसूरती से प्रेजैंट करती हैं. अपराजिता पहाड़ों से सीधे लोगों के घरों तक शुद्ध और कैमिकल मुक्त फल पहुंचा रही हैं.

अपराजिता पहाड़ों में खेती और स्टार्टअप से कृषि क्रांति लाती ‘आप की पसंदीदा किसान’ हैं जहां ग्रामीण युवा शहरों की तरफ भाग रहे हैं, वहीं हिमाचल प्रदेश की रहने वाली अपराजिता बंसल ने एक अलग ही मिसाल पेश की है. अपराजिता अपने सोशल मीडिया प्लेटफौर्म पर पहाड़ों में सेब की खेती की नैचुरल फा​​​​​​​​र्मिंग और विलेज लाइफ की रियलिटी दिखाती हैं.

वे केवल रील्स नहीं बनातीं, बल्कि वे ‘फल फूल’ नाम के एक सफल डायरैक्ट-टू कंज्यूमर स्टार्टअप की कोफाउंडर भी हैं. उन्होंने बिचौलियों की मनमानी को खत्म कर किसानों को उन का असली हक दिलाया है.

उन की रील्स में सेब की तुड़ाई और उन की कड़े परिश्रम से की जाने वाली पैकेजिंग, घर के पौधों की देखभाल और और्गेनिक सब्जियां उगाने के टिप्स, क्लाइमेट चेंज का पहाड़ों और खेती पर पड़ने वाला असर देखा जा सकता है.

अपराजिता बंसल का पेज जेनजी के लिए एक बड़ी सीख है. उन्होंने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर के खेती में भी एक बेहद सम्मानजनक, मुनाफेदार और सस्टेनेबल कैरियर बनाया जा सकता है. वे सही मायनों में सोशल मीडिया की ‘पसंदीदा किसान’ हैं जो पहाड़ों की मिट्टी की और्गेनिक फल को देश के कोनेकोने तक पहुंचा रही हैं.

दिखावा पड़ा भारी

आज के समय में सोशल मीडिया पर पहचान बनाने और वायरल होने की होड़ इतनी बढ़ गई है कि कई लोग अपनी निजी जिंदगी भी खुल कर दिखाने लगे हैं. कई बार यही चीज परेशानी की वजह बन जाती है. हाल ही में ऐसा ही एक मामला सोशल मीडिया क्रिएटर rachna_gurjar_ji से जुड़ कर सामने आया, जिस ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा.

रचना गुर्जर पहले अपने वीडियो और लाइफस्टाइल कंटैंट के कारण चर्चा में रहती थी. उस के सोशल मीडिया अकाउंट पर अकसर गांव की जिंदगी, परिवार के साथ बिताए पल और महंगे गहनों की झलक देखने को मिलती थी. इसी वजह से उस ने कम समय में अच्छी पहचान बनाई और उस के वीडियो काफी वायरल होने लगे.

लेकिन इस बार वजह कुछ और रही. खबरों के मुताबिक, मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित उस के घर में चोरी की घटना हुई, जिस में लाखों रुपए के सामान के नुकसान की बात सामने आई.

बताया गया कि चोर घर में अंदर घुसने के लिए बाहर की सुरक्षा को नुकसान पहुंचा कर दाखिल हुए और फिर परिवार को बिना भनक लगे वारदात को अंजाम दिया. सुबह परिवार को घटना की जानकारी मिली.

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई कि क्या निजी जिंदगी को बहुत ज्यादा सार्वजनिक करना जोखिम बढ़ा सकता है. वहीं रचना ने कहा कि मेहनत से कमाई गई चीजों को दिखाना गलत नहीं है और किसी भी चोरी के लिए जिम्मेदार केवल अपराधी होते हैं. यह घटना एक सवाल जरूर छोड़ती है कि सोशल मीडिया पर मौजूद रहना और अपनी उपलब्धियां साझा करना तो ठीक है लेकिन अपनी सुरक्षा और निजी जानकारी का संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है.

वायरल होने की दौड़ में कभीकभी जरूरत से ज्यादा निजी चीजें दिखाना बाद में मुश्किलें बढ़ा सकती हैं.

गरीबी का रोना रोता रोनित बाबू

सोल मीडिया पर वायरल होने के लिए लोग तरहतरह के तरीके अपनाते हैं. इन में एक तरीका छोटे बच्चों से रील बनवाना भी है. 7 से 10 साल के बच्चे जब कैमरे के सामने बड़े लोगों जैसी बातें करते हैं, संघर्ष, जिम्मेदारी या जिंदगी के अनुभवों पर डायलौग बोलते हैं तो लोग हैरान हो जाते हैं. यही हैरानी कई बार उन्हें वीडियो पूरा देखने व शेयर करने के लिए प्रेरित करती है.

ऐसे कई अकाउंट हैं जहां बच्चों को कंटैंट का मुख्य चेहरा बनाया जाता है. उदाहरण के तौर पर, इंस्टाग्राम पर ronit_babu_vloger नाम का एक अकाउंट है, जिस की कई रील्स में गरीबी, मेहनत और संघर्ष जैसे विषय बारबार दिखाई देते हैं. इस तरह का कंटैंट लोगों की भावनाओं को छूने की कोशिश करता है, जिस से वीडियो पर ज्यादा व्यूज, लाइक्स और कमैंट आने की संभावना बढ़ जाती है. हालांकि, यह भी समझना जरूरी है कि हर ऐसा वीडियो सिर्फ वायरल होने के लिए बनाया गया हो, यह कहना सही नहीं होगा लेकिन यह सच है कि सोशल मीडिया पर भावनात्मक और चौंकाने वाला कंटैंट अकसर एल्गोरिदम में तेजी से आगे बढ़ जाता है. इसलिए कई क्रिएटर्स ऐसे विषयों और प्रस्तुतीकरण का इस्तेमाल करते हैं जो लोगों का ध्यान तुरंत खींच लें.

यही वजह है कि आज सोशल मीडिया पर सिर्फ अच्छी जानकारी या रचनात्मक कंटैंट ही नहीं, बल्कि भावनात्मक, नाटकीय और ध्यान खींचने वाले वीडियो भी तेजी से वायरल हो जाते हैं. ऐसे में दर्शकों के लिए भी यह जरूरी है कि वे किसी भी वायरल वीडियो को सिर्फ उस के व्यूज देख कर महत्त्वपूर्ण न मानें, बल्कि यह भी सोचें कि उस में वास्तव में क्या संदेश या मूल्य है. इस बच्चे के अकाउंट पर 2 लाख से ज्यादा फौलोअर्स हैं और लगभग हर रील पर अच्छेखासे व्यूज हैं. क्या यही इस बच्चे का फ्यूचर है?

पंडित बन कर लड़के ने की बंपर कमाई

सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है जिस में एक लड़के ने ऋषिकेश के घाटों पर ‘तिलक लगाने’ को ले कर एक अनोखा एक्सपैरिमैंट किया और दिखाया कि कैसे इस काम के जरिए एक बढ़िया कमाई की जा सकती है.

यह वीडियो ‘नाम के एक सोशल मीडिया हैंडल से शेयर किया गया है. वीडियो में दिख रहा शख्स कोई प्रोफैशनल पंडित नहीं है, बल्कि उस ने बस एक एक्सपैरिमैंट के तौर पर ऋषिकेश में लोगों को तिलक लगाना शुरू किया. काम शुरू करने से पहले उस ने बाकायदा पूरी प्लानिंग की. उस ने सब से पहले पारंपरिक भारतीय कपड़े पहने, ताकि वह वहां के धार्मिक माहौल में पूरी तरह रचबस सके और लोग उसे देख कर कतराएं नहीं, बल्कि सहज महसूस करें.

पूरी तैयारी के साथ वह हाथ में पूजा की थाली ले कर घाट की तरफ निकल पड़ा. दिन के वक्त उस ने अपनी शुरुआत मुख्य घाटों से थोड़ी दूर यानी आसपास की सड़कों और गलियों से की. वहां से गुजरने वाले लोगों को रोकरोक कर उस ने तिलक लगाना शुरू किया. शुरूशुरू में रिस्पौंस खास नहीं था. कुछ लोग मुसकरा कर रुक जाते और माथे पर तिलक लगवा लेते तो कई लोग बिना सुने ही आगे बढ़ जाते. इस शुरुआती दौर में मेहनत ज्यादा थी और कमाई न के बराबर.

उस ने करीब 20 लोगों को तिलक लगाया. सिर्फ और सिर्फ 3 घंटे के अंदर उस ने तिलक लगा कर कुल 2,350 रुपए कमा लिए. इस वीडियो को देख कर लगता है कि भारत में लोग आस्था के प्रति इतने अंधे हैं कि किसी चीज की जरूरत हो न हो लेकिन आस्था और भगवान के नाम पर कुछ भी करने लगते हैं और इस का फायदा Tan_E जैसे लोग उठाते हैं.

जीरो स्किल्स लेकिन फौलोअर्स हजारों

आज सोशल मीडिया पर ऐसे कई कंटैंट क्रिएटर्स हैं जो कोई खास जानकारी या क्रिएटिव कंटैंट नहीं बनाते, फिर भी उन के लाखों व्यूज और हजारों फौलोअर्स होते हैं. ऐसी ही एक कंटैंट क्रिएटर है roshani2_3, जिस के लगभग 95 हजार फौलोअर्स हैं. उस की कई रील्स पर मिलियन व्यूज भी आ चुके हैं, जबकि उस के वीडियो में अकसर सिर्फ साधारण हरकतें, बिना मतलब की ऐक्टिंग या ऐसा कंटैंट होता है जिसे देखने के बाद लोगों को कोई नई जानकारी नहीं मिलती.

सवाल यह है कि ऐसा कंटैंट इतना चलता क्यों है? इस का सब से बड़ा कारण सोशल मीडिया का एल्गोरिदम है. अगर कोई वीडियो लोगों का ध्यान कुछ सैकंड के लिए भी रोक लेता है, लोग उसे पूरा देख लेते हैं, उस पर हंसते हैं, शेयर करते हैं या कमैंट कर के बहस शुरू कर देते हैं तो एल्गोरिदम उसे और ज्यादा लोगों तक पहुंचा देता है. यानी, वीडियो अच्छा है या बुरा, इस से ज्यादा फर्क इस बात से पड़ता है कि लोगों ने उस पर कितना समय बिताया.

जब ऐसे वीडियो बारबार वायरल होते हैं तो क्रिएटर्स को लगता है कि यही फार्मूला काम कर रहा है. उन्हें फौलोअर्स, व्यूज और कई बार ब्रैंड प्रमोशन भी मिलने लगते हैं. इसलिए वे बिना रुके उसी तरह का कंटैंट बनाते रहते हैं. असल में, सोशल मीडिया पर सिर्फ क्वालिटी नहीं, बल्कि लोगों का ध्यान खींचने की क्षमता भी मायने रखती है. जब तक दर्शक ऐसे वीडियो देखते रहेंगे, उन पर प्रतिक्रिया देते रहेंगे और उन्हें वायरल करते रहेंगे, तब तक इस तरह का कंटैंट बनना भी जारी रहेगा. कहीं न कहीं, इस ट्रैंड को बढ़ावा देने में दर्शकों की पसंद और उन की देखने की आदत भी उतनी ही जिम्मेदार है.

मांबेटी एक्सप्रैशन क्वीन

सोशल मीडिया पर ऐसे कई अकाउंट तेजी से वायरल हो रहे हैं जिन के कंटैंट में कोई खास जानकारी, क्रिएटिविटी या मेहनत दिखाई नहीं देती. इंस्टाग्राम पर ba.bli5037 नाम का एक अकाउंट भी ऐसा ही उदाहरण है, जहां एक महिला अपनी बेटी के साथ रील्स बनाती हैं. ज्यादातर वीडियो में दोनों सिर्फ हरियाणवी गानों पर लिप सिंक करती हैं या अलगअलग एक्सप्रैशन देती हैं. इस के बावजूद इस अकाउंट पर 2 लाख से ज्यादा फौलोअर्स हैं. हालांकि, इस के लिए सिर्फ कंटैंट बनाने वालों को दोष देना सही नहीं होगा.

अगर लोग ऐसे वीडियो देखना बंद कर दें, लाइक और शेयर न करें तो ऐसे कंटैंट को वायरल होने का मौका ही नहीं मिलेगा. सोशल मीडिया का एल्गोरिदम वही दिखाता है जिसे लोग सब से ज्यादा देखते व पसंद करते हैं. यानी, असली ताकत दर्शकों के हाथ में होती है. आज जरूरत इस बात की है कि हम अपने स्क्रीनटाइम का इस्तेमाल समझदारी से करें. घंटों तक बिना किसी मकसद के ऐसी रील्स देखने के बजाय कुछ नया सीखने, अच्छी किताब पढ़ने, कोई स्किल डैवलप करने या ज्ञानवर्धक कंटैंट देखने में समय लगाएं.

आखिर हम जिस तरह के कंटैंट को अपना समय और ध्यान देते हैं, धीरेधीरे हमारी सोच भी उसी दिशा में जाने लगती है. इसलिए सिर्फ वायरल होने वाले कंटैंट के पीछे भागने के बजाय हमें यह भी सोचना चाहिए कि हम क्या देख रहे हैं और वह हमारे समय के लायक है या नहीं.

कोई इन्हें सिविक सैंस सिखाओ

सोशल मीडिया के अलगअलग प्लेटफौर्म पर इस समय एक वीडियो धड़ल्ले से शेयर किया जा रहा है. उस में ट्रेन में बैठी एक महिला यात्री आराम से मूंगफली खा रही है. हैरान करने वाली बात यह है कि वह छिलकों को डस्टबिन में या किसी पन्नी में रखने के बजाय लगातार अपनी सीट के नीचे फेंकती दिख रही है. यही नहीं, महिला ने वाशबेसिन तक जाने की जहमत भी नहीं उठाई और अपनी सीट पर बैठेबैठे ही बोतल से हाथ धो लिए, जिस से सारा पानी डब्बे के फर्श पर फैल गया.

वायरल हो रहे इस वीडियो को रिकौर्ड करने वाले सहयात्री के मुताबिक, महिला का यह रवैया पूरी 5 घंटे की यात्रा के दौरान जारी रहा. बात सिर्फ गंदगी तक ही सीमित नहीं थी, सहयात्री ने बताया कि महिला ने पूरी रात मोबाइल पर तेज आवाज में वीडियो देखे, जिस से बाकी यात्रियों की नींद में खलल पड़ा. जब वीडियो फिल्माने वाले से पूछा गया कि उस ने महिला को टोका क्यों नहीं तो उस ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, ‘मैं उसे शिष्टाचार का पाठ पढ़ाना चाहता था, लेकिन बहस और टकराव के डर से पीछे हट गया. आप पूरे देश को अकेले नहीं बदल सकते. अगर आप ऐसे लोगों का सामना करेंगे तो वे अपनी गलती मानने के बजाय झगड़ा और हिंसा करने पर उतारू हो जाते हैं.’

इस वीडियो के सामने आने के बाद नैटिजंस का गुस्सा फूट पड़ा. लोग रेलवे की साफसफाई के दावों के बीच यात्रियों की खुद की जिम्मेदारी पर सवाल उठा रहे हैं. एक यूजर ने तंज कसा, ‘लगता है घर में भी ऐसे ही रहती होगी.’ दूसरे ने सुझाव दिया, ‘सीधा फाइन लगाओ, तभी ऐसे लोग सुधरेंगे.’ एक अन्य यूजर ने निराशा जताते हुए लिखा, ‘सिविक सैंस तो जैसे तेल लेने गया है.’ एक अन्य यूजर ने कमैंट किया, ‘शर्म नाम की चीज बची है या नहीं.’

इस वीडियो को शेयर करने वाला सहयात्री है या नहीं, इस की सटीक जानकारी तो नहीं है लेकिन फिलहाल इसे नाम के पेज से इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया है.

यूनीक नहीं कचरा है

 क्या कुछ भी अजीब बना लेने से वह यूनीक बन जाता है? आज सोशल मीडिया के कई रील क्रिएटर कुछ भी आड़ाटेढ़ा बना कर या कबाड़े को बदन पर लपेट कर उसे यूनिक कौस्ट्यूम और स्टाइल का नाम दे रहे हैं. कुछ हट कर बनाना भले यूनीक  हो लेकिन जो पहनने और बनाने के लायक ही न हो, भला उस यूनिकनैस का कोई क्या करेगा. ऐसे ही फालतू के कौस्ट्यूम बनाता है नेनावथ थरून.

अपने 7.73 लाख फौलोअर्स और कंटैंट के साथ यह इंस्टाग्राम पर काफी पौपुलर है. थरून के इंस्टाग्राम अकाउंट @tik_toker_tharun_nayak पर 694 मिलियन, 72 मिलियन, 46 मिलियन व्यूज वाली रील्स मिलेंगी जिन में यूनीकनैस के नाम पर कभी चारपाई के फीतों से ड्रैस बना कर पहनी है, तो किसी में चेहरे पर काजल और पाउडर पोत कर टैलकम पाउडर के डब्बे कानों में लटके हुए हैं, कहीं ड्रैस के नाम पर लोहे का टूटा ट्रंक पहना है. और ऐसी रील्स को लोग मिलियन व्यूज, हजारोंलाखों लाइक्स और शेयर         कर रहे हैं. कमैंट्स में भी लोग इसे क्रिएटिविटी का नाम दे रहे हैं.

अब जरा कोई इन लोगों से पूछे, क्या यह क्रिएटिविटी और यूनीक ड्रैस वे स्वयं कभी किसी पार्टी में पहन कर जाएंगे या रोजमर्रा की जिंदगी में भी पहनेंगे? नहीं न, तो फिर क्यों इस कचरे को क्रिएटिविटी का नाम दे रहे हैं. यहां सोचने की बात यह भी कि जिस कबाड़ में थरून अपना इतना समय देता है, इतनी मेहनत करता है अगर वह वही समय और मेहनत किसी दूसरे अच्छे काम या कोई स्किल सीखने में दे तो सच में वह कुछ यूनीक बना सकेगा.

क्या सिर्फ बदन दिखाना ही कंटैंट है

कुछ कंटैंट क्रिएटर तो अपने बायो में ऐसे वजनदार शब्द लिखते हैं जैसे बहुत ज्ञान की बात करेंगे या बहुत सी इन्फौर्मेशन शेयर करेंगे. मगर करते सिर्फ ओछापना ही हैं.

बायो के लिखे शब्द तो केवल इस बात का सुबूत होते हैं कि इन्होंने इंग्लिश के दोचार वर्ड पढ़सीख लिए हैं, लेकिन किसी विषय का ज्ञान जीरो ही है. अपने ज्ञान की इस शून्यता को वे सोशल मीडिया पर जोरशोर से प्रदर्शित भी करते हैं. ऐसे ही प्रदर्शनकर्ताओं में से एक है ब्रिस्ती मेघला.

ब्रिस्ती अपने इंस्टाग्राम हैंडल @bristi.meghla में खुद की पहचान और काम को हाईलाइट करने के लिए बायो में लिखती है, डांस, लाइफस्टाइल, फैशन. लेकिन इस बायो की सच्चाई असल में पूरी झूठी ही नहीं बल्कि गंदी भी है. अपने पूरे हैंडल में ब्रिस्ती न ढंग का डांस करते दिखेगी, न कोई लाइफस्टाइल टिप दे रही है और न ही कोई फैशन स्किल का डैमो. अगर वह डांस, लाइफस्टाइल, फैशन के नाम पर कुछ भी कर रही है तो वह है सिर्फ नग्नता.

नहाते हुए अपना शरीर दिखाना, बिकिनी पहन कर खाना बनाना या पौधे लगाना कौन सा लाइफस्टाइल स्किल हो गया या कौन सा फैशन सैंस? आज लड़कियों को फैशन के नाम पर सिर्फ कपड़े उतारने का पाठ ही समझ आ रहा है, जबकि फैशन इस मुर्खता से बहुत परे है.

लेकिन फिर भी सोशल मीडिया पर बहुततेरी लड़कियों को यह नग्नता का रास्ता ही पसंद है क्योंकि यहां बिना किसी मेहनत, बिना किसी कला या पढाई के ट्रैंड होना आसान जो है. वहीं, दुनिया तो दूषित सोच रखने वालों से अग्रसित है ही, सो, इन की रील्स को लाइक और व्यूज की कभी कमी नहीं होगी. जैसे ब्रिस्ती की ही रील्स देख लें जहां सिर्फ उस के अधनंगे बद न के आधार पर ही 2.9 मिलियन व्यूज मिले हैं और कमैंट्स में उस के आशिकों का कहना है, ‘तुम ऐसे खाना बनाते बहुत सुंदर दिखती हो,’ ‘चलो बौयज चलो,’ ‘हम भी आएं खाना खाने,’ ‘तुम्हारी लेग पीस अच्छी है,’ ‘माई ब्यूटीफुल डार्लिंग.’ अब इस के 503 हजार फौलोअर्स को कोई बताए कि इन की डार्लिंग शक्ल भले ब्यूटीफुल हो लेकिन बुद्धि और कंटैंट गंदी ही है.

एसी वाली अंडरवियर

सोशल मीडिया पर आजकल ऐसी रील्स की भरमार है जिन का असली मकसद जानकारी देना नहीं, बल्कि लोगों का ध्यान खींच कर ज्यादा से ज्यादा व्यूज बटोरना होता है.
_नाम के पेज पर पड़ी रील इस का एक अच्छा उदाहरण है. इस रील में एक एक लड़का तथाकथित ‘सोलर पावर्ड एसी चड्ढी’ लौंच करता हुआ दिख रहा है. देखने में ऐसा लगता है जैसे यह कोई भविष्य की क्रांतिकारी टैक्नोलौजी हो. थोड़ा सा सामान्य ज्ञान लगाने पर समझ आ जाता है कि यह केवल मजाक और सनसनी फैलाने के लिए बनाया गया कंटैंट है.

हैरानी की बात यह है कि इस तरह की रील को 251 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिले हैं. यानी, करोड़ों लोगों ने अपना समय ऐसी चीज देखने में बिताया जिस का वास्तविक जीवन में कोई उपयोग नहीं है. ऐसे क्रिएटर्स अकसर जानते हैं कि उन की बातों में कोई तर्क नहीं है, लेकिन उन्हें यह भी पता होता है कि जितनी अजीब और बेतुकी चीज दिखाई जाएगी, उतने ज्यादा लोग वीडियो पर रुकेंगे, हंसेंगे, शेयर करेंगे और कमैंट करेंगे. सोशल मीडिया एल्गोरिदम भी इसी तरह के कंटैंट को आगे बढ़ाता है क्योंकि इस से लोगों का स्क्रीन टाइम बढ़ता है.

जहां एक तरफ कुछ क्रिएटर्स शिक्षा, विज्ञान, कैरियर या सामाजिक मुद्दों पर मेहनत से कंटैंट बना रहे होते हैं, वहीं दूसरी तरफ इस तरह की फर्जी और बेतुकी रील्स करोड़ों व्यूज हासिल कर लेती हैं. ‘सोलर पावर्ड एसी चड्ढी’ जैसी रीलें मनोरंजन के नाम पर लोगों की जिज्ञासा का फायदा उठाती हैं. इन में न कोई वास्तविक आविष्कार होता है और न ही कोई सीख. इन का एकमात्र उद्देश्य लोगों को कुछ सैकंड के लिए रोक कर व्यूज और कमाई हासिल करना होता है.

सो, दर्शकों को भी समझदारी दिखानी होगी और यह तय करना होगा कि वे अपना समय किस तरह के कंटैंट पर खर्च कर रहे हैं. आखिर सोशल मीडिया पर हर वायरल चीज मूल्यवान हो, यह जरूरी नहीं है.

कामुक या शर्मिंदगी पैदा करने वाली रील

 अगर किसी रील में कोई व्यक्ति राह चलते लोगों से अजीब, भड़काऊ, कामुक या शर्मिंदगी पैदा करने वाली हरकतें करता है तो लोग अकसर उसे इसलिए नहीं देखते क्योंकि उन्हें वह अच्छा लगता है, बल्कि इसलिए देखते हैं क्योंकि वह उन्हें चौंका देता है. सोशल मीडिया पर ‘शौक वैल्यू’ बहुत बड़ी चीज है. जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक जगह पर ऐसी हरकत करता है जिस की आमतौर पर उम्मीद नहीं की जाती, तो दर्शक वीडियो को अंत तक देखने लगते हैं कि आगे क्या होगा. pratham_jee_ भी कुछ इसी तरह का कंटैंट बनाता है.

इस की रील में एक आदमी दिखता है और दूसरा रील में बोलता भी है और रिकौर्ड भी करता है. यानी, इस का कंटैंट स्क्रिप्टेड होता है. ऐसी रील्स वायरल होने का एक कारण है ‘हेट वाचिंग’. बहुत से लोग ऐसे वीडियो पसंद नहीं करते, लेकिन फिर भी उन्हें देखते हैं, कमैंट करते हैं और दोस्तों को भेजते हैं. वे शायद वीडियो की आलोचना कर रहे होते हैं, लेकिन एल्गोरिदम के लिए हर कमैंट, शेयर और व्यू एक सकारात्मक संकेत होता है. नतीजा यह होता है कि विवादित कंटैंट और ज्यादा वायरल हो जाता है.

दरअसल, कई क्रिएटर्स यह समझ चुके हैं कि ज्ञान, रिसर्च या क्रिएटिविटी से ज्यादा आसान तरीका है लोगों को चौंकाना. इसीलिए वे जानबूझ कर भड़काऊ कंटैंट बनाते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि इस से जल्दी प्रसिद्धि और कमाई मिल सकती है.

 

फूहड़ क्वीन स्वाति गंगवार

 सोशल मीडिया पर आजकल ऐसे कई क्रिएटर्स हैं जो बिना किसी खास जानकारी, हुनर या क्रिएटिविटी के केवल अजीबोगरीब हरकतों के दम पर लाखोंकरोड़ों व्यूज हासिल कर लेते हैं. क्रिएटर भी कुछ इसी तरह का कंटैंट बनाती है. इस की अधिकांश रील्स में खाना बनाने या खाने से जुड़े ऐसे दृश्य दिखाए जाते हैं जो पूरी तरह बेवजह लगते हैं.

वीडियो में कभी टमाटरों को गहनों की तरह पहन लेना, कभी खाने की चीजों के साथ अजीब प्रयोग करना, तो कभी जरूरत से ज्यादा नाटकीय चेहरे बनाना आदि सब दर्शकों का ध्यान खींचने के लिए किया जाता है. ऐसे कंटैंट में न कोई उपयोगी रैसिपी होती है, न कोई नई जानकारी और न ही कोई ऐसा कौशल जिसे देख कर दर्शक कुछ सीख सकें.

फिर भी इन वीडियो को लाखोंकरोड़ों व्यूज मिल जाते हैं क्योंकि सोशल मीडिया एल्गोरिदम अकसर वही कंटैंट आगे बढ़ाता है जो लोगों को कुछ सैकंड के लिए चौंका दे. बहुत से लोग यह देखने के लिए रुक जाते हैं कि आखिर वीडियो में हो क्या रहा है. कुछ लोग मनोरंजन के लिए देखते हैं, कुछ हैरानी में और कुछ केवल दूसरों को भेज कर मजाक बनाने के लिए. लेकिन हर व्यू, लाइक और शेयर उस कंटैंट की पहुंच बढ़ाता है.

यह ट्रैंड एक बड़ी समस्या भी दिखाता है जहां कई क्रिएटर्स अच्छी जानकारी, शिक्षा, खेती, स्वास्थ्य या रोजगार जैसे विषयों पर मेहनत से कंटैंट बना रहे होते हैं, वहीं कई बार बिना किसी सार वाले वीडियो उन से कहीं ज्यादा लोकप्रिय हो जाते हैं. नतीजा यह होता है कि दर्शकों का समय ऐसे कंटैंट पर खर्च होता है जो कुछ मिनटों की हंसी तो दे सकता है लेकिन उस के बाद कोई वास्तविक मूल्य नहीं छोड़ता. यही वजह है कि ऐसे कंटैंट को अकसर ‘व्यूज के लिए बनाया गया कंटैंट’ कहा जाता है, जहां उद्देश्य लोगों को कुछ सिखाना नहीं बल्कि किसी भी तरह उन का ध्यान पकड़ कर वायरल होना होता है.

  कंटैंट विशेष जानकारी,  फिर भी करोड़ों व्यूज

सोशल मीडिया पर कई बार ऐसी साधारण रील्स भी सैकड़ों मिलियन व्यूज हासिल कर लेती हैं जिन में न कोई नई जानकारी होती है और न ही कोई खास कंटैंट. फोटो में दिखाई गई रील भी कुछ ऐसी ही लगती है. mr_rahulj02 के इंस्टाग्राम पर इस रील को देख कर ऐसा मालूम होता है कि लोग किस आधार पर रील को देख रहे हैं.

किसी रील पर 40 करोड़ व्यूज का मतलब है रील में ज्यादा ही कुछ खास कंटैंट होगा. लेकिन जब आप इस रील को देखेंगे तो पाएंगे कि इस में ऐसा कुछ है ही नहीं जिसे 40 करोड़ व्यूज मिल गए. इस में पतिपत्नी के बीच एक हलकीफुलकी बातचीत दिखाई गई है, जहां पत्नी अपने पति पर शक करती हुई नजर आती है. फिर सवाल उठता है कि आखिर ऐसी मामूली रील्स इतनी वायरल कैसे हो जाती हैं? इस की सब से बड़ी वजह है कि यह कंटैंट लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा होता है.

पतिपत्नी के झगड़े, शक, नोकझोंक और रिश्तों की छोटीछोटी बातें लगभग हर व्यक्ति ने कहीं न कहीं देखी या महसूस की होती हैं. जब लोग स्क्रीन पर अपने जीवन जैसी कोई स्थिति देखते हैं तो वे तुरंत उस से जुड़ाव महसूस करने लगते हैं. इस के अलावा ऐसी रील्स बहुत छोटी और आसान होती हैं. इन्हें समझने के लिए किसी विशेष ज्ञान या ध्यान की जरूरत नहीं होती. दर्शक कुछ सैकंड में वीडियो देख लेते हैं और फिर अगली रील पर चले जाते हैं. यही कारण है कि लोग बिना सोचेसमझे एक के बाद एक ऐसे वीडियो देखते रहते हैं.

समस्या यह है कि ऐसे कंटैंट से दर्शकों को कोई विशेष जानकारी, कौशल या सीख नहीं मिलती. यह केवल कुछ सैकंड का मनोरंजन देता है और फिर भुला दिया जाता है. लेकिन क्योंकि यह आसानी से देखा जा सकता है और लोगों की जिज्ञासा बनाए रखता है, इसलिए इस तरह की साधारण रील्स भी आज सोशल मीडिया पर रिकौर्डतोड़ व्यूज बटोर रही हैं.

 बच्चों का काम बस रील बनाना

 आज सोशल मीडिया पर ऐसे कई बच्चे दिखाई दे जाते हैं जो कम उम्र में ही इंटरनैट स्टार बनने का सपना देखते रहते हैं. उन्हीं में से एक है यह बच्चा जो अपनी मजेदार और भावनात्मक रील्स के लिए जाना जाता है और इस के वीडियो पर लाखों व्यूज आ जाते हैं.

लेकिन यह ट्रैंड एक बड़ा सवाल भी खड़ा करता है कि क्या इतनी छोटी उम्र में सोशल मीडिया की दुनिया में डूब जाना बच्चों के भविष्य के लिए सही है? आज कई बच्चे पढ़ाई, खेलकूद और दोस्तों के साथ समय बिताने के बजाय कैमरे के सामने ज्यादा समय बिताने लगे हैं. कुछ बच्चे घंटों रील्स देखते हैं, जबकि कुछ लगातार नई रील्स बनाने में लगे रहते हैं.

कम उम्र में मिलने वाली लाइक्स, फौलोअर्स और तारीफ उन्हें जल्दी प्रसिद्धि का स्वाद चखा देती है. ऐसे में पढ़ाई और दूसरे जरूरी कौशल पीछे छूट सकते हैं. समस्या यह नहीं है कि बच्चे कंटैंट बना रहे हैं. चिंता तब होती है जब सोशल मीडिया ही उन की पूरी पहचान बन जाए. इंटरनैट की लोकप्रियता बहुत अस्थायी होती है. आज जो वीडियो वायरल है, हो सकता है कल कोई उसे याद भी न करे.

इस के अलावा, बच्चों पर लगातार कंटैंट बनाने का दबाव भी बढ़ सकता है. हर समय नया वीडियो बनाने, व्यूज बढ़ाने और लोगों का ध्यान बनाए रखने की चिंता उन के मानसिक तनाव का कारण बन सकती है. इसलिए जरूरी है कि सोशल मीडिया बच्चों की जिंदगी का केवल एक छोटा हिस्सा बने, पूरी जिंदगी नहीं. अगर पढ़ाई, खेल, परिवार और रचनात्मक गतिविधियों के साथ संतुलन बना रहे तो कंटैंट क्रिएशन एक शौक हो सकता है. लेकिन अगर पूरा ध्यान केवल वायरल होने पर केंद्रित हो जाए, तो भविष्य में इस के नकारात्मक परिणाम भी सामने आ सकते हैं. Social Media Influencers

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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