Chauhan Movie Teaser: ‘पठानों से कह दो कि चौहान आ गए हैं’ यह डायलौग अजय देवगन की आने वाली फिल्म ‘चौहान’ के टीजर में सुनाई दिया जिस पर सोशल मीडिया में खासा हंगामा बरपा हुआ है. शुरुआत में कुछ लोगों ने इसे शाहरुख खान की फिल्म ‘पठान’ पर तंज माना लेकिन अब क्षत्रिय परिषद के स्टेटमैंट के बाद यह विवाद इतिहास की बहस में बदल गया है.

‘चौहान’ फिल्म का टीजर आने के बाद जैसे ही पठान बनाम चौहान की बहस छिड़ी, राजपूत संगठन क्षत्रिय परिषद ने टीजर पर आपत्ति जताई. संगठन का कहना है कि फिल्म में चौहान वंश की ऐतिहासिक विरासत का इस्तेमाल मौजूदा राजनीतिक या सांप्रदायिक संदेश देने के लिए नहीं किया जाना चाहिए. इतिहास को फिल्मी संवादों के जरिए तोड़मरोड़ कर पेश किया जा रहा है. इतिहास को सांप्रदायिक लामबंदी का औजार बनाना सही नहीं है. चौहान एक ऐतिहासिक राजपूत वंश हैं. हम राजपूत इतिहास को राजनीतिक या वैचारिक उद्देश्यों के लिए हथियार बनाने या राजपूत पहचान को इस्तेमाल करने की हर कोशिश को खारिज करते हैं.

रिपोर्टों के अनुसार, संगठन ने यह भी कहा कि इतिहास में चौहान और पठानों के संबंध केवल एक लाइन के डायलौग से नहीं समझे जा सकते. अलगअलग कालखंडों में चौहान शासकों और पठान शासकों के बीच संघर्ष भी हुए और राजनीतिक हालात के अनुसार समझौते भी हुए, इसलिए इतिहास को चौहान बनाम पठान जैसी सरल कहानी बना कर दिखाना उचित नहीं है.

‘पठानों से कह दो कि चौहान आ गए हैं’ फिल्म के टीज़र में ऐसा डायलौग क्यों रखा गया, इस का सही जवाब तो इस फिल्म के निर्माता अजय देवगन ही दे सकते हैं लेकिन यह पक्का है कि फिल्म में ऐसे डायलौग जानबूझ कर विवाद पैदा करने और एक खास तरह के औडियंस को खुश करने के लिए डाले जाते हैं. पिछले कुछ सालों के दौरान कई फिल्मों के प्रचार में धर्म और इतिहास से जुड़े विवादों का इस्तेमाल फिल्मों को हिट कराने के मकसद के लिए होता रहा है. यह निर्माता, निर्देशक और ऐक्टर की अपनी कट्टरता को स्क्रीन के माध्यम से प्रचारित करने के लिए किया जाता है.

आज ऐसा माहौल बन गया है कि फिल्म निर्माता जानबूझ कर हिंदूमुसलिम या इतिहास से जुड़े इमोशनल मुद्दे जोड़ देते हैं जिस से सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो जाए और वही बहस फिल्म के लिए मुफ्त का प्रचार बन जाती है. इस से लोगों की जिज्ञासा बढ़ती है और दर्शक केवल विवाद देखने के लिए सिनेमाघर पहुंच जाते हैं. जो धर्म के बहकावे में आ कर हेट को धर्म का हिस्सा मानते हैं वे इन डायलौग्स से बहुत खुश होते हैं. धर्म की रोटी खाने वालों के लिए तो ये संवाद या थीम सोने की खान ही हैं. धर्म हमेशा दूसरों को और अगर बाहर वाले दूसरे न मिलें तो अपनों के किन्हीं हिस्सों को खलनायक बना कर पैसे वालों और शक्तिशाली को विवादों में घसीटते रहते हैं. भक्त तभी माल और जान देने को तैयार होते हैं.

ऐतिहासिक चरित्र का इस्तेमाल वर्तमान की सांप्रदायिक राजनीति को भड़काने के लिए करना इतिहास से खिलवाड़ है और यह समाज को तोड़ता भी है. फिल्मकारों की जिम्मेदारी केवल मनोरंजन कराना ही नहीं बल्कि समाज के प्रति अपनी जवाबदेही और इतिहास के साथ ईमानदारी बरतना भी है. लेकिन इन फिल्मकारों को न तो इतिहास की समझ है और न ही समाज की परवा. किसी एक समुदाय के खिलाफ माहौल बनाने वाले डायलौग से फिल्म को फायदा हो सकता है लेकिन इस से कंस्टीटूशन के सैक्युलर मूल्यों की मौत तय होती है.

अजय देवगन की पिछले कुछ वर्षों की फिल्मों पर नजर डालें तो यह साफ दिखाई देता है कि उन्होंने कई ऐसी फिल्मों में काम किया है जिन में राष्ट्रवाद और धार्मिक उन्माद वाले एलिमैंट्स रहे हैं. यही वजह है कि पिछले एक दशक से अजय देवगन की फ़िल्में आरएसएस के नैरेटिव को मजबूत करती दिखाई पड़ती हैं. फिल्मों के जरिए इतिहास को ‘हम बनाम वे’ की कहानी में बदल देना बिलकुल भी सही नहीं है. अगर फिल्में भी धार्मिक पहचान के नाम पर औडियंस को टारगेट करने की कोशिश करेंगी तो इस से समाज में पहले से मौजूद विभाजन और गहरे हो जाएंगे.

यह न भूलें कि महाराणा सांगा की सेना में महमूद लोदी भी शामिल थे, जिन्होंने खानवा के युद्ध में राणा सांगा के साथ लड़ाई लड़ी. महाराणा प्रताप की सेना में हकीम खान सूर सेनानायक थे, जिन्होंने हल्दीघाटी के युद्ध में नेतृत्व किया. राजा मानसिंह अकबर के सब से भरोसेमंद सेनापतियों में थे. दूसरी ओर, अनेक अफगान और तुर्क शासकों के विरुद्ध मुसलिम सरदार भी दूसरे पक्ष में लड़ते रहे. उस दौर में वफ़ादारी वंश, राज्य और सत्ता के आधार पर बदलती रहती थी और यह हर खेमे की सच्चाई थी. इसी ऐतिहासिक तथ्य की ओर इशारा करते हुए क्षत्रिय परिषद ने भी कहा कि भारतीय इतिहास को सांप्रदायिकता के चश्मे से देखना इतिहास को भुनाना है.

यह भी न भूलें कि इतिहास बहुत छोटीछोटी घटनाओं के सहारे लिखा जाता है. यह गुजरे ज़माने का एक छोटा सा आभास देता है. सदियों पुरानी कहानियों, पत्थरों पर बनाई मूर्तियों, कटेफटे दस्तावेजों पर आज सिर फोड़ने की जरूरत नहीं है. Chauhan Movie Teaser

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