Uttar Pradesh Politics: बीती एक जुलाई को सपा प्रमुख अखिलेश यादव का 53 वा जन्मदिन सपाइयों ने पूरे धूमधाम से मनाया . लेकिन लखनऊ में वही वेवकूफी कर दी जिसके चलते वह पिछला विधानसभा चुनाव हारी थी जबकि लोकसभा चुनाव में उसे उम्मीद से परे रिकार्ड 37 सीटें मिली थी. यह नादानी थी अखिलेश को पोस्टरों में कृष्ण रूप में दिखाने की , जिसके एक हाथ में संविधान है. सपा युवजन सभा के महासचिव अजय फौजी ने इस मौके पर कहा कि हमने अखिलेश को कृष्ण रूप में संविधान धारण किए हुए चित्रित किया है. क्योंकि वे संविधान में भरोसा करते हैं. इस अति उत्साही कार्यकर्त्ता के मुताबिक भगवान कृष्ण ने लोगों को सही मार्ग दिखाया धर्म के लिए खड़े रहे.

अव्वल तो कृष्ण के हाथ में संविधान दिखाना ही संविधान और उसके निर्माता भीमराव आम्बेडकर और संविधान सभा का अपमान है जिन्होंने दलितों , आदिवासियों , औरतों और मुसलमानों को वो हक दिए थे जो कृष्ण के दिए धर्म ने उनसे छीन रखे थे आम्बेडकर तो सीधे सीधे श्रीमदभगवद्गीता को वर्ण व्यवस्था का पालक पोषक मानते थे. भाजपा भी उन्हें छीनने और खत्म करने में कोई असर नहीं छोड़ रही और जो भी कर रही है वह पूजा पाठ , भगवानो और मूर्तियों की आड़ में ही कर रही है.

यह बात सपाई करें तो बात बन भी सकती है क्योंकि लोकसभा चुनाव में जीत उसे संविधान खतरे में है और भाजपा अगर 400 सीट ले गई तो आरक्षण बगैरह खत्म कर देगी और लोकतंत्र भी कहीं नहीं दिखेगा जैसी बातों और दावों के चलते ही मिली थी  . दलित , मुसलमान और आदिवासियों पर इसका वाजिब असर पड़ा था क्योंकि वे बेहतर जानते समझते हैं कि उनके अधिकारों की रक्षा सिर्फ संविधान ही कर सकता है, कोई राम या कृष्ण नहीं क्योंकि इन्हें पूजने बाले मनुवादी हैं जिनका मकसद ही वर्ण व्यवस्था थोपना है .

लेकिन यह हकीकत वोटर को बताने के बजाय सपाई भगवान – भगवान और पूजा पाठ का खेल खेलने लगे हैं तो उस पर से उसके कोर वोटर का भरोसा उठ रहा है. अगर यही हाल रहा तो दलितो और पिछड़ों की तरह मुसलमानों और यादवों को भी कोई और ठिकाना ढूँढना पड़ेगा. फिर कोई भगवान वैतरणी पार नहीं करवा पाएगा. लोग सपा जैसी पार्टियों से उम्मीद यह करते हैं कि कम से कम वह तो धरम करम के चक्कर में न पड़े. समाजवादी पार्टी के पास अच्छे विचारकों की कमी नहीं है जो टीवी डिबेटों में जमकर पाखंडवाद की पोल खोलते हैं पर वे पार्टी के कर्ताधर्ताओं में नहीं हैं और आम वर्कर को मैसेज नहीं दे पा रहे हैं. Uttar Pradesh Politics

 

 

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