Hindi Stories: लोकतंत्र का राजा मस्त था. वह अपने अंधाधुंध राजसी खर्चे पूरे करने और विदेशी बैंकों में खुलवाए अपने खाते भरने के लिए जनता पर सेस पर सेस लगा रहा था. बेरोजगारी, महंगाई से त्रस्त जनता को अमीरी के सपने दिखाने के लिए कभी वह आलू से सोना बनाने की विधि बताता तो कभी अपने राज्य के दो जून की रोटी तक न पकने वाले घरों में जलेबियां बनाने की फैक्टरियां लगवा नीलाम जनता को उन्हें दुनियाभर को सप्लाई करवाने का ?झांसा दे अंबानी, अडानी, टाटा, बिरला बनने का सपने दिखाता.

कभी वह गरीब जनता को गरीबी से छुटकारा दिलवाने के लिए विगत राजा द्वारा स्विस बैंकों से कालाधन ला जनता के खातों में 20-20 लाख रुपए डालने का वादा कर जनता के बैंकों में खाते खुलवाता तो कभी महंगी एलपीजी न खरीद पाने वाली जनता को गटर के सड़े पानी से सर्वोत्तम रसोई गैस बनाने की विधि बताता.

रसरंग में मस्त राजा का खजाना जब बिलकुल खाली हो गया तो एक राजहितैषी मंत्री ने राजा से दबी जबान में कहा, ‘राजा साहब, राजा साहब, सरकारी खजाना बिलकुल खाली हो गया है. कहीं से कर्ज मिलने की भी संभावना नहीं. सरकारी कर्मचारियों को वेतन देना तो छोड़ो, पैंशनधारियों को पैंशन देने तक को खजाने में पैसा नहीं. सरकार का दिवालिया पिट गया है. ऐसे में जो आप चाहें तो…’

‘तो क्या, लोकतंत्रीय राजकोष घाटे के लिए ही होता है. किसी एक भी राजा के राजकाल को बताओ जब उस के राजकाल में लोकतंत्रीय राजकोष लाभ में रहा हो. सो, हम भी अपवाद होना नहीं चाहते, सब की तरह विवाद होना चाहते हैं, ’ राजा ने अपना राजमुकुट सीधा करते कहा.

‘महाराज, आप का परमहितैषी होने के नाते आप से करबद्ध निवेदन है कि जनता को दिखाने को ही सही, राजकीय फुजूलखर्ची पर तनिक लगाम लगाइए ताकि जनता को भी लगे कि आर्थिक मंदी की मार जनता ही नहीं, उन का राजा भी ?ोल रहा है. बेरोजगारी से वे ही नहीं खेल रहे, उन का राजा भी खेल रहा है. महंगाई की मार से आलूप्याज उन को ही नहीं, राजा को भी झेलना पड़ रहा है. तभी आप अगली बार भी लोकतंत्र के राजा बन पाएंगे.

‘लोक का विश्वास नहीं तो कम से कम उन का वोट तो जीतिए, महाराज. लोकतंत्रीय और पारिवारिक राजा में एक ही अंतर होता है, महाराज. और वह यह कि पारिवारिक राजा पुश्त दर पुश्त जनता पर अत्याचार करता है लेकिन लोकंतत्र का राजा 5 साल ही राज कर पाता है.’

‘मतलब, हम अगले चुनाव में राजा नहीं बन पाएंगे? लेकिन अभी तो चुनाव में

3 साल बाकी हैं. चुनाव के आखिरी साल में हर डैंटपेंट कर लेंगे,’ राजा ने बेपरवाह होते राजगद्दी पर बैठे मंत्री को आंखें तरेरीं तो वफादार मंत्री ने कहा, ‘ऐसा मैं कब कह रहा हूं, जनाब. बंदा तो चाहता है आप अमर हों, हर चुनाव के बाद इस गद्दी का सौंदर्य बढ़ाते रहें. पर असल में बात यह है कि जनता का महंगाई से बुरा हाल है. राज्य की सड़कें फटेहाल हैं. पता ही नहीं चल रहा कि गड्ढों के बीच सड़कें हैं या सड़कों के बीच गड्ढे. अब तो जनता ने सड़कों के गड्ढों के बीच मत्स्यपालन शुरू कर दिया है.

‘आप की स्पेस तकनीक से बने ठेकेदारों को समर्पित पुल उद्घाटन के तुरंत बाद भगवान को प्यारे हो रहे हैं. बचे पुलों पर से जनता जाने से कतरा रही है. उसे नदी में बहने का डर नहीं, लेकिन पुल से सहीसलामत नदी पार करने में डर है.’

‘मतलब?’

‘अब राजकोष के लिए कुछ कठोर कदम उठाने होंगे, महाराज.’

‘कुछ कदम बोले तो?’ राजा ने मंत्री को सिर से पांव तक घूरते पूछा.

‘सरकारी धन बचाने के लिए जैसे अपना सरकारी अमला कम कर दीजिए. अपने अमले के दिमाग में नकेल डालिए. फुजूलखर्ची को रोकिए. सरकारी राशन की दुकानों में जनता को आटे का कोटा बढ़ाइए. बाजार में तो आटा 45 रुपए प्रति किलोग्राम हो गया है. जनता में विश्वास जगाइए कि आप केवल राजा नहीं, उस के सच्ची हितैषी भी हैं, अपने भाईभतीजों के नहीं. अपने अफसरों को छोड़ अब चुनाव जीतने को जनता से की गारंटियों की ओर नजर घुमाइए.’

‘पर वैसी झूठी गारंटियां तो चुनाव जीतने के लिए राजा बनने को हर पार्टी देती आई है. फिर हम ने कौन सा जनता को झूठी गारंटियां दे कर अनर्थ किया है?’ राजा ने वफादार मंत्री को घेरने की सोची. उसे मंत्रिमंडल से निकालने की तो वे सोच ही चुके थे. ऐसा मंत्री किस काम का जो राजा को सच से अवगत करवाए. हर राजा के वफादार मंत्री का काम होता है कि वह हर वक्त राजा को अंधेरे में नहीं, घुप्प अंधेरे में रखे और अपनी रोटियां सेंकता रहे. अपने राजा की प्रशंसा के महाकाव्य रचता रहे.

कुछ देर तक राजा ने सोचने के बाद कहा, ‘तो ऐसा करो, हवा पर सेस लगा दो.’

‘जनाब, वह तो पहले ही लगा चुके हैं’, मंत्री ने सिर झुकाए कहा.

फिर कुछ देर तक राजा ने सोचने के बाद कहा, ‘तो ऐसा करो, जल न आने वाले नल पर भी सेस लगा दो.’

‘जनाब, वह तो पहले ही लगा चुके हैं,’ मंत्री ने सिर ?ाकाए कहा.

फिर कुछ देर तक राजा ने सोचने के बाद कहा, ‘तो ऐसा करो, नल में न आने वाले जल पर सेस लगा दो.’

‘जनाब, वह तो पहले ही लगा चुके हैं,’ मंत्री ने सिर झुकाए ही कहा.

फिर कुछ देर तक राजा ने सोचने के बाद कहा, ‘तो ऐसा करो, जनता की सोच पर सेस लगा दो.’

‘जनाब, वह सोचती ही कब है? फिर भी हम वह बहुत पहले ही लगा चुके हैं,’ मंत्री ने सिर झुकाए कहा. फिर कुछ देर तक राजा ने सोचने के बाद कहा, ‘तो ऐसा करो, धूप पर सेस लगा दो.’

‘जनाब, वह तो लगातार प्रदूषण बढ़ने से आ ही नहीं रही, फिर भी हम उस पर भी सेस लगा चुके हैं,’ मंत्री ने सिर झुकाए कहा.

फिर कुछ देर तक राजा ने सोचने के बाद कहा, ‘तो ऐसा करो, जनता के घरों के आसपास के पेड़पौधों पर सेस लगा दो.’

‘जनाब, वह तो जनता के घरों के आसपास तो छोडि़ए, जंगलों में भी पेड़ न होने के बाद भी पहले ही लगा चुके हैं,’ मंत्री ने सिर ?ाकाए कहा.

फिर कुछ देर तक राजा ने सोचने के बाद कहा, ‘तो ऐसा करो, जनता के जूतों पर सेस लगा दो.’

‘जनाब, जनता के नंगेपांव चलने पर भी तो वह हम पहले ही लगा चुके हैं,’ मंत्री ने सिर झुकाए कहा. फिर कुछ देर तक राजा ने सोचने के बाद कहा, ‘तो ऐसा करो, जनता के पीने पर सेस लगा दो.’

‘जनाब, पीने वालों पर तो छोड़ो, वह तो हम गटर का पानी पीने वालों पर भी पहले ही लगा चुके हैं,’ मंत्री ने सिर झुकाए कहा.

फिर कुछ देर तक राजा ने सोचने के बाद कहा, ‘तो ऐसा करो, जनता के सोने पर सेस लगा दो.’

‘जनाब, वह तो हम रातरातभर नींद न आने वाली जनता पर भी पहले ही लगा चुके हैं,’ मंत्री ने सिर ?ाकाए कहा.

फिर कुछ देर तक राजा ने सोचने के बाद कहा, ‘तो ऐसा करो, जनता की हर सांस पर 10 रुपए का सांस सेस लगा दो.’

‘जनाब, वह तो हम आप के कहने से पहले ही लगा चुके हैं. गुस्ताखी माफ हो महाराज, जनता है कि अब एक सांस 10-10 मिनट बाद लेने लगी है,’ मंत्री ने सिर झुकाए कहा.

‘कमाल है, हम राजकोष भरने के लिए तुम्हें शासकीय सु?ाव दे रहे हैं और एक तुम हो कि…’ जनहित में राजा का गुस्सा बढ़ने लगा.

‘सच बोलना माफ हो सरकार, अब जनता पर कहीं से भी सेस नहीं लगाया जा सकता. वह चारों ओर से सेसों से घिर चुकी है.’

फिर बड़ी देर तक चिंतनमनन करने के बाद राजा ने आदेश दिया, ‘तो कल से जनता के जीने पर ही सेस लगा दिया जाए. इसे राजा का आदेश मान तत्काल प्रभावी ढंग से लागू किया जाए. जो भी हमारे राज में कल के सूर्य की पहली किरण के बाद बिन सेस दिए जीने का अपराध करेगा उस से उस का आधार कार्ड छीन लिया जाएगा.’

‘पर जनाब, आजकल एकएक नागरिक के पास चारचार आधार कार्ड हैं,’ मंत्री ने सिर झुकाए कहा तो राजा ने तुरंत उस का पद कलम कर चैन की सांस ली. Hindi Stories

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