Vote Theft: कोलकाता में ममता बनर्जी से मुलाकात करने के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी चुनाव आयोग से मिल कर वोट चोरी कर रही है. उत्तर प्रदेश की जनता जागरूक हो कर भाजपा का जवाब देगी. जब सुप्रीम कोर्ट की प्रोसीडिंग लाइव हो सकती है तो बंगाल में जनता की वोटिंग की सीसीटीवी क्यों नहीं हो सकती. इस से तो लोकतंत्र मजबूत होगा. बीजेपी के लोग सीसीटीवी से बहुत घबराते हैं. अगर इलैक्शन कमीशन निष्पक्ष है तो उत्तर प्रदेश की कुंदरकी विधानसभा सीट में जो वोट डाले गए हैं उस की सीसीटीवी फुटेज वह जनता को दिखा दे. भाजपा वोट छीन कर आम लोगों, खासकर पीडीए समाज, के लोगों के अधिकार छीनना चाहती है. बीजेपी के लोग लोकतंत्र की हत्या कर रहे हैं.

नए भारत का नया लोकतंत्र

भारतीय लोकतंत्र अब अपनी जटिलताओं से बाहर निकल रहा है. आने वाले समय में यह इतना सरल हो जाएगा कि देश में सैकड़ों पार्टियों, नेताओं, विचारधाराओं और कार्यकर्ताओं की अब कोई ज़रूरत ही नहीं बचेगी. एक ही पार्टी होगी, वही राष्ट्र होगी, वही सरकार होगी, वही नैतिकता तय करेगी और वही देशभक्ति का सर्टिफिकेट भी बांटेगी. बाकी सब, बस, वोटर रह जाएंगे.

इस नए लोकतंत्र में पार्टी का कैडर भी अलग होगा. ब्लौक लैवल पर गलीगली घूमते, भाषण देते, सड़कों पर उतरे उद्दंड कार्यकर्त्ता वोट की जद्दोजेहद करते नजर नहीं आएंगे. कैडर का यह पुराना तरीका ओल्डफैशन हो जाएगा. नए भारत के नए कैडर का नया नाम होगा ईसी. चुनाव कराने वाली इस संस्था का खर्च जनता के टैक्स से चलेगा लेकिन जनता से उस का रिश्ता खत्म होता जाएगा. चुनाव आयोग पर उन ऊंचे लोगों और ऊंची जातियों के नैटवर्क का कब्जा होगा जो हमेशा से सत्ता के साथ रहे हैं. लोकतंत्र का चौकीदार ही सत्ता का दरबारी बन जाएगा.

फिर चुनाव भी कितने आसान हो जाएंगे. बड़ीबड़ी ईवीएम मशीनों का झंझट खत्म. न दर्जनों पार्टियों के निशान, न बहस, न विचार और न कोई विकल्प. मशीन में बस 2 ही बटन होंगे. पहला बटन सत्ताधारी पार्टी का उम्मीदवार और दूसरा बटन जेल. 2014 से पहले चुनाव आयोग अंपायर था. अब 12वां खिलाड़ी बन कर भाजपा की तरफ से बैटिंग करता है. चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में सीजेआई को हटा कर जो कानून बनाया वह इसी नए भारत के नए कैडर सिस्टम की नींव थी.

धीरेधीरे संसद बहस का मंच नहीं, बल्कि ताली बजाने का स्टूडियो बन जाएगी. न्यूज़ चैनल पत्रकारिता नहीं, सरकारी भजनमंडली बन जाएंगे. एंकर सवाल नहीं पूछेंगे बल्कि हर रात जनता को बताएंगे कि हमारा देश दुनिया में सब से महान है और जो असहमत है वह या तो देशद्रोही है या विदेशी एजेंट. सब से दिलचस्प बात यह होगी कि इस पूरी प्रक्रिया को लोकतंत्र की जीत बताया जाएगा. लोकतंत्र फिर भी जिंदा ही रहेगा. संविधान की तसवीरें लगेंगी, डा. अंबेडकर और महात्मा गांधी के नाम के नारे भी लगेंगे, चुनाव भी होंगे लेकिन चुनाव का अर्थ बदल जाएगा. तब भी एनसीईआरटी की किताबों में पढ़ाया जाएगा कि भारत दुनिया का सब से बड़ा लोकतंत्र है.

नए लोकतंत्र में कागज पर यूपीएससी जिंदा रहेगी लेकिन हकीकत में तो यह अपरकास्ट और अपरक्लास लौबी बन जाएगी. रिटायर होते ही राज्यपाल बनाया जाएगा और फिर राज्यसभा के जरिए दिल्ली में आलीशान बंगला अलौट हो जाएगा. वफादारी का इनाम तो पक्का मिलेगा.

ईवीएम में बस 2 ही बटन होंगे. एक पर भाजपा का फूल छपा होगा. दबाते ही विकास की गंगा बहेगी. दूसरा बटन विरोधियों के लिए होगा. ममता, स्टालिन, केजरीवाल, राहुल का बटन दबाओ, सीधे ईडी, सीबीआई और जेल. वीवीपैट की परची का क्या होगा? वह तो पहले ही 2 प्रतिशत बची है, अब तो, बस, विश्वास रखो. मशीन बोलेगी बीप, मीडिया बोलेगा 500 पार. महाराष्ट्र, चंडीगढ़, सूरत, इंदौर में तो पहले ही सिंगल बटन ईवीएम का ट्रायल हो चुका है. चुनाव आयोग का बजट 2024-25 में 370 करोड़ रुपए रहा.

चुनाव आयोग को पैसा जनता ने दिया और जनता के पैसों का सदुपयोग करते हुए ईसी ने बीजेपी को भारी बहुमत से जीत दिला दी. ईडी-सीबीआई-आईटी भी जनता के पैसों से चलते हैं और बड़ी ईमानदारी से दिनरात छापे मारते हैं. सत्ता पक्ष के ईमानदार नेताओं के बंगले से बच कर निकलते हुए 95 फीसदी केस विपक्ष पर करते हैं. इलैक्टोरल बौंड के नाम पर 6,500 करोड़ का 55 परसैंट चंदा अकेले भाजपा को मिलता है.  देने वाला अपरक्लास रिच होता है, इसलिए इन पर ईडी-सीबीआई की कृपा बनी रहती है. Vote Theft

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