Insurance Scam: रिश्वतखोरी में नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के मैनेजर और इंस्पेक्टर पकड़े गए हैं. वैसे तो यह मानवीय लालच, सिस्टम की कमजोरी और जवाबदेही की कमी का मामला है लेकिन बात सिर्फ इतनी सी नहीं है. रिश्वतखोरी भारतीयों की रग रग में है. इसमें धर्म का अहम रोल है क्युकी भगवान भी दान के नाम रिश्वत लेता है. भारत में रिश्वतखोरी सिर्फ नाजायज तरीके से पैसों के लेन देन का मामला नहीं होता बल्कि यह भारतीयों की तथाकथित महान संस्कृति की विरासत भी है. जहाँ हर मंदिर में बैठा भगवान दान और चढ़ावे से खुश होता हो वहाँ मामूली अफसर को खुश करने के लिए उन्हें चढ़ावे के रूप में थोड़ी रिश्वत देनी पड़ जाये तो इससे आम आदमी को क्या फर्क पड़ता है?
CBI ने 7 अप्रैल 2026 को नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के दो अधिकारियों को रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार किया है. नेशनल इंश्योरेंस कंपनी, दिल्ली के मैनेजर हनुमान मीणा और इन्वेस्टिगेटर संतोष कुमार जैन दोनों ने एक निजी अस्पताल की कैशलेस सुविधा को बहाल करने के बदले कुल 2 लाख 60 हजार की रिश्वत मांगी थी. निजी अस्पताल से पहले 1 लाख रुपये ले लिए गए थे. CBI ने ट्रैप लगाया और दोनों को 1.6 लाख रुपये लेते रंगे हाथ पकड़ लिया और दोनों को गिरफ्तार कर लिया. CBI ने दोनों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है.
रिश्वतखोरी भारतीयों की रग-रग में है क्युकी भगवान भी दान के नाम रिश्वत लेता है. असल में तो कोई भगवान है ही नहीं. दान, चढ़ावा सब इंसान ही इंसान से वसूलता है. मंदिर, मस्जिद, मठ, गुरुद्वारे और चर्च ये सब इंसानी संस्थाएँ हैं. वहाँ जो पैसा जाता है वो पंडित, पुजारी, मुल्ला, महंत या मैनेजमेंट की जेब में जाता है. ईश्वर, अल्लाह के नाम पर तो बस लोगों को धोखा दिया जाता है. यह ठीक वही मनोविज्ञान है जो क्लर्क, इंस्पेक्टर या मैनेजर रिश्वत लेते वक्त इस्तेमाल करता है. एक में भगवान के नाम पर वसूली की जाती है दूसरे में फाइल फॉरवर्ड करने के नाम पर.
भारत में भ्रष्टाचार इसलिए फलता-फूलता है क्योंकि
नियम-कानून का पालन करवाने वाली मशीनरी खुद भ्रष्ट है. चाहे भक्ति का हो या सरकारी दफ्तर का आम आदमी का कोई भी काम बिना रिश्वत के पूरा नहीं होता इसलिए वह रिश्वत देने को जिंदगी का जरुरी हिस्सा मान लेता है.
धर्म ने रिश्वत को “पवित्र” बना रखा है. भारतीय समाज में सदियों से चढ़ावा, दक्षिणा और भेंट को पवित्र माना गया है. जब कोई पंडित कहता है माथा टेककर 1100 रुपये चढ़ा दो, काम बन जाएगा तो आम आदमी 1100 देने में संकोच भी नहीं करता भले ही बच्चे की स्कूल फीस के लिए जेब में रूपये न हों लेकिन भगवान की दान पेटी जरूर भरी जाएंगी. यही मानसिकता क्लर्क के सामने साहब, थोड़ा देख लीजिए कहने के बाद रिश्वत देने में काम करती है. Insurance Scam





