CBFC controversy: भारतीय सैंसर बोर्ड यानी केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड एक तरफ ‘धुरंधर द रिवेंज’ को वयस्क प्रमाणपत्र के साथ प्रदर्शन की इजाजत देता है जिस में एक किरदार दूसरे किरदार का सिर काट कर उस के सिर को फुटबौल बना कर खेलता है क्योंकि इस फिल्म के फिल्मकार आदित्य धर ने इस फिल्म में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2016 में लागू की गई ‘नोटबंदी’ को जायज और अतिआवश्यक बताने में कोई कसर बाकी नहीं रखी लेकिन दूसरी तरफ यही सैंसर बोर्ड 2025 में प्रमुख सिख मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर बनी फिल्म ‘पंजाब 95’ को बैन कर देता है.
हनी त्रेहान निर्देशित फिल्म ‘पंजाब 95’ में दिलजीत दोसांझ, अर्जुन रामपाल और सुविंदर विक्की की अहम भूमिकाएं हैं. इस के बाद अक्टूबर 2025 में सैंसर बोर्ड ने संध्या सूरी लिखित व निर्देशित तथा यूनाइटेड किंगडम, भारत, जरमनी और फ्रांस के एक अंतर्राष्ट्रीय सहनिर्माण वाली फिल्म ‘संतोष’ को बैन कर देता है. फिल्म ‘संतोष’ 97वें औस्कर अवार्ड में नामित हुई थी. उत्तरी भारत के ग्रामीण परिवेश पर आधारित इस फिल्म में शाहना गोस्वामी एक विधवा की भूमिका में है जिसे अपने दिवंगत पति की पुलिस कौंस्टेबल की नौकरी विरासत में मिलती है और वह एक दलित किशोरी की हत्या व बलात्कार की जांच में शामिल हो जाती है. इस फिल्म का विश्व प्रीमियर मई 2025 में कान्स फिल्म फैस्टिवल में हुआ था.
अब 98वें औस्कर अवार्ड के लिए नामांकित ट्यूनीशिया व फ्रांस की कौथर बेन हानिया लिखित व निर्देशित फिल्म ‘द वौयस औफ द हिंद रजब’ के प्रदर्शन पर भारतीय सैंसर बोर्ड ने पाबंदी लगा दी है. जबकि, यह फिल्म अमेरिका, वेनिस, फ्रांस, ब्रिटेन सहित कई देशों में प्रदर्शित हो चुकी है. फिल्म का विश्व प्रीमियर 3 सितंबर, 2025 को 82वें वेनिस अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के मुख्य प्रतियोगिता में हुआ, जहां इस ने ग्रैंड जूरी पुरस्कार और 6 अन्य समानांतर पुरस्कार जीते. इसे 10 सितंबर को ट्यूनीशिया में और 26 नवंबर को फ्रांस में सिनेमाघरों में रिलीज किया गया. 98वें अकादमी पुरस्कारों में इसे ट्यूनीशियाई प्रविष्टि के रूप में सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय फीचर फिल्म के लिए नामांकित किया गया था. 83वें गोल्डन ग्लोब पुरस्कारों में इसे सर्वश्रेष्ठ गैरइंग्लिश भाषा फिल्म के लिए भी नामांकित किया गया था.
29 जनवरी, 2024 की बात है. रेड क्रिसेंट के स्वयंसेवकों को एक आपातकालीन फोन आता है और गाजा में गोलीबारी के बीच एक कार में फंसी 6 साल की बच्ची मदद की गुहार लगाती है. उसे फोन पर बनाए रखने की कोशिश करते हुए वे स्वयंसेवक एम्बुलैंस को उस के पास पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं. उस का नाम हिंद रजब था. यह अलग बात है कि बाद में उसी कार में हिंद रजब का मृत शरीर गोलियों से छलनी किया हुआ पाया गया था. यह महज संयोग ही है कि हिंद रजब की हत्या की इस कहानी पर 2024 में डच लघु फिल्म ‘क्लोज योर आइज हिंद’, जौर्डन की लघु फिल्म ‘हिंद अंडर सीज’ तथा कौथर बेन हानिया निर्देशित ट्यूनीशियन फिल्म ‘द वौयस औफ हिंद रजब’ के फिल्मांकन हुए और ये तीनों फिल्में 2025 में अलगअलग माह में रिलीज हुईं.
जी हां, इंटरनैशनल पुरस्कारों से पुरस्कृत ट्यूनीशियान फिल्मकार कौथर बेन हानिया लिखित व निर्देशित हृदय विदारक डौक्यूड्रामा फिल्म ‘द वौयस औफ हिंद रजब’ गाजा पट्टी पर इजराइल के आक्रमण के दौरान गाजा में इजराइली सेना की गोलाबारी के बीच हिंद रजब अपने परिवार के साथ एक कार में फंस गई थी. उस के परिवार के अन्य सदस्य मारे जा चुके थे और वह अकेली जीवित बची थी. हिंद रजब ने अपनी मदद के लिए रेड क्रिसेंट के आपातकालीन स्वयंसेवकों को फोन किया था. उसे बचाने के लिए भेजे गए 2 पैरामेडिक्स भी रास्ते में मारे गए और 12 दिनों बाद हिंद का शव गोलियों से छलनी उसी कार में मिला था.
यह फिल्म इजराइली रक्षाबलों द्वारा 6 वर्षीया फिलिस्तीनी बच्ची हिंद रजब की हत्या के समय रेड क्रिसेंट की प्रतिक्रिया का चित्रण करती है. फिल्मकार ने 70 मिनट की अवधि वाली मौलिक औडियो रिकौर्डिंग का भी इस फिल्म में उपयोग किया है. इस में साजा किलानी, मोताज मलहीस, आमेर हलेहल और क्लारा खौरी ने अभिनय किया है. लेकिन भारत में इस फिल्म के रिलीज पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. फिल्म के भारतीय वितरक मनोज नंदवाना ने मीडिया को जो कुछ बताया, उस के अनुसार, सैंसर बोर्ड ने मौखिक रूप से फिल्म को प्रमाणपत्र देने से मना कर दिया है. कथित तौर पर बोर्ड का मानना है कि यह फिल्म ‘अत्यधिक संवेदनशील’ है और इस के प्रदर्शन से भारत और इजराइल के राजनयिक संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. सैंसर बोर्ड ने यह निर्णय उस वक्त लिया था जब फरवरी माह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजराइल के दौरे पर थे. उस वक्त इस फिल्म को 6 मार्च को भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज किया जाना था. इस फिल्म के वितरक मनोज नंदवानी ने सैंसर बोर्ड के इस कृत्य के खिलाफ फिलहाल कानूनी लड़ाई लड़ने से परहेज किया है क्योंकि उन के पास कोई लिखित आदेश नहीं है.
सैंसर बोर्ड की बात सुन कर लोगों को हंसी आ रही है. अहम सवाल यह है कि क्या एक 6 साल की बच्ची की त्रासदी भी अब ‘डिप्लोमैसी’ के तराजू पर तोली जाएगी? क्या कला को देशों के रिश्तों के चश्मे से देखना सही है? फिल्म की निर्देशक का कहना है कि, ‘यह फिल्म किसी देश के खिलाफ नहीं, बल्कि युद्ध के खिलाफ है.’ निर्देशक कौथर बेन हानिया का मानना है कि यह महज एक फिल्म नहीं, बल्कि उन्होंने इसे ‘फौरेंसिक साक्ष्य’ की तरह पेश किया है. यों भी ट्यूनीशियाई फिल्मकार कौथर बेन हानिया अपनी फिल्मों में हकीकत और कल्पना के धुंधलेपन को दिखाने के लिए जानी जाती हैं.
भारतीय सैंसर बोर्ड के इस फैसले की चारों तरफ आलोचना हो रही है. भारत में फिल्म ‘संतोष’ की ही भांति इस फिल्म पर लगे ‘अघोषित प्रतिबंध’ ने ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ पर नई बहस छेड़ दी है. वरिष्ठ कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इसे ‘अपमानजनक’ करार दिया और कहा कि अंतर्राष्ट्रीय संबंधों का उपयोग अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलने के लिए नहीं किया जाना चाहिए. इसी के साथसाथ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ के हनन के रूप में आलोचना की है. फिल्म ‘द वौयस औफ हिंद रजब’ न केवल एक सिनेमाई रचना है बल्कि एक वैश्विक मानवाधिकार मुद्दा बन चुकी है. अब लोग सैंसर बोर्ड पर एक खास राजनीतिक नैरेटिव को बढ़ावा देने का आरोप लगा रहे हैं.
सैंसर बोर्ड के लिया धारा 5बी
सैंसर बोर्ड के पास एक ब्रह्मास्त्र है, गाइडलाइन की धारा 5बी, जो कहती है कि अगर कोई फिल्म ‘भारत की संप्रभुता, अखंडता, सुरक्षा या विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों के खिलाफ जाती है, तो उसे सर्टिफिकेट देने से मना किया जा सकता है.’ लेकिन कई जानकारों का मानना है कि यह नियम तब लागू होता है जब फिल्म किसी देश के खिलाफ जहर उगल रही हो या झूठ फैला रही हो. ‘द वौयस औफ हिंद रजब’ तो एक 6 साल की बच्ची की सच्ची चीख है, जो रेड क्रिसेंट के रिकौर्ड्स में दर्ज है. क्या एक मासूम की मौत का सच दिखाना किसी देश का अपमान है? या फिर हमारी ‘डिप्लोमैसी’ इतनी कमजोर है कि एक फिल्म से टूट जाएगी? कितनी अजीब बात है कि धारा 5बी का उपयोग ‘मैत्रीपूर्ण संबंधों’ को बचाने के बजाय ‘असुविधाजनक सच’ को छिपाने के लिए किया जा रहा है. यदि एक औस्कर नौमिनेटेड फिल्म, जोकि अमेरिका सहित विश्व के तमाम देशों में रिलीज हो चुकी हो, वह भारत के सिनेमाघरों तक नहीं पहुंच पा रही. ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि भारतीय सिनेमा की आजादी को लकवा मार गया है.
सुप्रीम कोर्ट का कथन
सुप्रीम कोर्ट कई बार कह चुका है कि, “किसी फिल्म से तनाव हो सकता है, इस शंका के चलते अभिव्यक्ति की आजादी को नहीं दबाया जा सकता.’’
हौलीवुड मे तमाम फिल्मकार व कलाकार इस फिल्म के साथ खड़े नजर आ रहे हैं. जी हां, ब्रैड पिट और जोकिन फीनिक्स जैसे हौलीवुड के दिग्गजों ने इस फिल्म को सिर्फ इसलिए सपोर्ट किया क्योंकि वह इस के ‘सिनेमाई साहस’ से प्रभावित थे. उन्होंने इसे ‘राजनीति से परे एक मानवीय त्रासदी’ की संज्ञा दी है. जोकिन फीनिक्स, जो खुद मानवाधिकारों के लिए मुखर रहते हैं, ने कहा कि, ‘यह फिल्म ‘इंसानियत के नाम पर एक जरूरी दस्तावेज है.’
इस मसले में अहम बात यह है कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड लिखित में कुछ देने को तैयार नहीं है जिस के चलते फिल्म वितरक के पास अदालत का दरवाजा खटखटाने का विकल्प ही नहीं है. पर यह तय है कि भारतीय सिनेमाप्रेमी एक 6 साल की बच्ची की त्रासदी के सच को नहीं जान सकता. डबिंग नहीं बल्कि असली औडियो हिंद रजब और रेड क्रिसेंट की 70 मिनट की बातचीत की औडियो रिकौर्डिंग के कुछ संवादों से आप भी रूबरू होइए. जान लें कि फिल्म की निर्देशक कौथर बेन हानिया ने किसी अभिनेत्री से ‘हिंद रजब’ के संवादों की डबिंग नहीं कराई, बल्कि हिंद रजब की असली फोन रिकौर्डिंग्स का औडियो ही इस्तेमाल किया है. कुछ संवाद ये हैं-
हिंद रजब कहती है- चाचा, क्या आप मुझे लेने आ रहे हैं? मुझे बहुत डर लग रहा है.’’
औपरेटर जवाब देता है- हां बेटा, हम आ रहे हैं. बस, थोड़ा और रुक जाओ. क्या आप के पास कोई बड़ा है?
हिंद रजब (रोते हुए कहती है)- नहीं, सब सो गए हैं. उन के शरीर से खून निकल रहा है. चाचा, टैंक मेरे बहुत पास है, वह मुझे देख रहा है.
औपरेटर- डरो मत बेटा. बस, नीचे झुक जाओ.
हिंद रजब- मैं मम्मी को परेशान नहीं करना चाहती, इसलिए अपना खून हाथ से पोंछ रही हूं. क्या आप जल्दी आएंगे?
ये शब्द नहीं, एक मरती हुई मासूमियत की गवाही हैं
फिल्म की कहानी का सार
कौथर निर्देशित डौक्यूड्रामा फिल्म ‘द वौयस औफ हिंद रजब’ की दुखद कहानी 29 जनवरी, 2024 की घटना बयां करती है जब हिंद रजब गाजा पट्टी में इजराइली रक्षाबलों के टैंक हमले में अपने परिवार के सदस्यों के साथ मारी गई थी. कथित दोषियों की पहचान कर्नल/लैफ्टिनैंट कर्नल बेनी अहारोन (401वीं बख्तरबंद ब्रिगेड के कमांडर), लैफ्टिनैंट कर्नल डैनियल एला (52वीं बख्तरबंद बटालियन के कमांडर), मेजर शान ग्लास (वैम्पायर एम्पायर कंपनी के कमांडर) और टैंक चालक दल के सदस्य इटे कुकिएरकाफ के रूप में हुई. कार पर हुए हमले में उन के चाचा इयाद रजब, चाची हना अलआघा और 3 चचेरे भाई (रमी, डायना, रकन) की मौके पर ही मौत हो गई.
हिंद रजब बुरी तरह घायल हो गईं और फिलिस्तीनी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के बचाव दल से फोन पर संपर्क में रहीं. उन की चचेरी बहन लयान हमादेह भी कथित तौर पर आईडीएफ के टैंक हमले में मारी गईं, जिस में करीब 335 गोलियां लगीं. रेड क्रिसेंट के 2 स्वयंसेवक यूसुफ और अहमद उसे बचाने आए लेकिन इजराइली सैनिकों ने उन्हें भी मार डाला. हिंद रजब 3 घंटे तक फोन पर बात करती रही. 12 घंटे बाद उसी कार में हिंद रजब का गोलियों से छलनी मृत शरीर मिला. बाद में उसके चाचा ने आर्मेनिया और जरमनी में न्याय की गुहार लगाई थी, जिस के चलते इस दुखद घटना से पूरा विश्व वाकिफ हो सका.
निर्देशक ने लौटाई अवार्ड की ट्रौफी
निर्देशक कौथर बेन हानिया को हलके में नहीं लिया जाना चाहिए. कौथर बेन हानिया को हक की लड़ाई लड़ना भी आता है. उन की बगावत तब दिखी जब उन्होंने बर्लिन फिल्म फैस्टिवल में ‘सिनेमा फौर पीस’ का अवार्ड लेने से मना कर दिया. उन्होंने कहा, ‘‘शांति कोई परफ्यूम नहीं है जिसे हिंसा पर छिड़क दिया जाए ताकि सत्ता सुरक्षित महसूस करे. न्याय के बिना शांति संभव नहीं है.’’ उन्होंने अवार्ड वहीं छोड़ दिया क्योंकि मंच पर एक इजराइली जनरल को भी सम्मानित किया जा रहा था.
सैंसर बोर्ड द्वारा फिल्म बैन किए जाने पर बेन हानिया उवाच
जब कौथर बेन हानिया को पता चला कि भारत में उन की फिल्म को ‘भारत-इजराइल संबंधों’ के बहाने रोका जा रहा है, तो उन्होंने तीखा तंज कसा. उन्होंने भारत के प्रति अपने प्रेम को याद करते हुए जो कुछ कहा वह हर सिनेमाप्रेमी को सोचने पर मजबूर कर देगा. कौथर बेन हानिया ने कहा है- ‘‘मैं भारत को प्यार करते हुए बड़ी हुई हूं. बौलीवुड मेरे बचपन का हिस्सा था. एक समय तो मैं खुद को भारतीय मूल का होने की कल्पना करती थी ताकि खास महसूस कर सकूं. लेकिन आज मेरा सवाल है, ‘क्या ‘दुनिया के सब से बड़े लोकतंत्र’ और ‘मध्यपूर्व के इकलौते लोकतंत्र’ के बीच का हनीमून इतना नाजुक है कि एक फिल्म उसे तोड़ सकती है?’’
कौन हैं कौथर बेन हानिया
सिदी बौज़िद में जन्मी कौथर बेन हानिया की शिक्षा ट्यूनीशिया के इकोले डेस आर्ट्स एट डू सिनेमा (ईडीएसी) और पेरिस में ला फेमिस और सोरबोन में हुई. उन्होंने 2002 से 2004 तक ट्यूनिस स्कूल औफ आर्ट्स एंड सिनेमा में अध्ययन किया. इस प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने कई लघु फिल्मों का निर्देशन किया, जिन में से एक, ला ब्रेचे, को काफी सराहना मिली. 2003 में उन्होंने यूरोमेड द्वारा वित्तपोषित एक फीचर फिल्म लेखन कार्यशाला में भी भाग लिया. 2004 में उन्होंने ला फेमिस में अपना प्रशिक्षण जारी रखा, पहले ग्रीष्मकालीन विश्वविद्यालय में और फिर 2004-2005 में.
2006 में उन्होंने मोहसेन बेन हानिया की लघु कहानी ले ज्यून होम एंड लश्एनफैंट एट ला क्वेश्चन से प्रेरित एक और लघु फिल्म, मोई, मा सोउर एट ला चोज का निर्देशन किया. इस के बाद उन्होंने 2007 तक अल जजीरा डौक्यूमैंट्री चैनल के लिए काम किया. फिर उन्होंने कई फीचर फिल्मों का निर्देशन किया, जिन्हें विभिन्न फिल्म समारोहों में पुरस्कार मिले. साथ ही, 2007-2008 में सोरबोन नोवेल विश्वविद्यालय में अपनी पढ़ाई फिर से शुरू की. उन की पहली फीचर फिल्म ‘ले चल्लात दे ट्यूनिस’ थी, जो 2014 में रिलीज हुई थी. यह एक व्यंग्यात्मक लहजे वाली सामाजिक व्यंग्य फिल्म थी, जिस में बाद की फिल्मों की तरह ही महिलाओं और पुरुषों के बीच संबंधों को दर्शाया गया था.
उन की 2017 की फिल्म ‘ब्यूटी एंड द डाग्स’ को 2017 कान फिल्म फैस्टिवल में ‘अनसर्टेन रिगार्ड’ श्रेणी के लिए चुना गया था. इसे 91वें अकादमी पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म के लिए ट्यूनीशियाई प्रविष्टि के रूप में भी चुना गया था, लेकिन इसे नामांकित नहीं किया गया. 2018 में फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फ्रांसीसीभाषी फिल्म के लिए ल्यूमियर पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था. 2020 में उन की फिल्म ‘द मैन हू सोल्ड हिज स्किन’ का विश्व प्रीमियर 77वें वेनिस अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह के ओरिजोंटी अनुभाग में हुआ था. इसे सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म के लिए ट्यूनीशियाई प्रविष्टि के रूप में भी चुना गया था और 93वें अकादमी पुरस्कारों में नामांकित किया गया था, जिस से यह औस्कर के लिए नामांकित होने वाली पहली ट्यूनीशियाई फिल्म बन गई.
2023 में उन की डौक्यूमैंट्री ‘फोर डौटर्स’ को कान फिल्म फैस्टिवल की मुख्य प्रतियोगिता के लिए चुना गया, जहां इस ने ‘लश्ओइल डीश्ओर’ और ‘फ्रांकोइस शैले पुरस्कार जीता. 49वें सीजर पुरस्कार समारोह में इसे सर्वश्रेष्ठ डौक्यूमैंट्री फिल्म का सीजर पुरस्कार मिला. फिल्म ने महिला सशक्तीकरण के लिए सिनेमा फौर पीस पुरस्कार जीता. इसे 96वें अकादमी पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ डौक्यूमैंट्री फीचर के लिए भी नामांकित किया गया था. 2025 में उन के डौक्यूड्रामा ‘द वौयस औफ हिंद रजब’ को 82वें वेनिस अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोह में 23 मिनट तक स्टैंडिंग ओवेशन मिला, साथ ही, इस ने ग्रैंड जूरी पुरस्कार जीता. इस फिल्म को 98वें अकादमी पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय फीचर के लिए भी नामांकित किया गया था. CBFC controversy





