Vadh 2 (2026) – Movie Review : बौलीवुड में इन दिनों फिल्मों की नई कहानियों का अकाल सा पड़ गया है, इसलिए सीक्वल फिल्मों का दौर शुरू हो गया है. ‘वध-2’ भी एक क्राइम ड्रामा फिल्म है और 2022 में रिलीज हुई फिल्म ‘वध’ की सीक्वल है, जिस में 2 बुजुर्ग कलाकारों संजय मिश्रा और नीना गुप्ता ने अभिनय किया था. फिल्म के पहले भाग में सेवानिवृत्त शिक्षक (संजय मिश्रा) को एक पुलिस अधिकारी शक्ति सिंह (मानव विज) की हत्या करते दिखाया गया था. फिल्म जेल की पृष्ठभूमि पर है और सस्पैंस से भरी है. हालांकि फिल्म की गति धीमी है लेकिन यह अंत तक दर्शकों को बांधे रखती है.

‘वध-2’ की कहानी पिछली फिल्म से एकदम अलग है, मगर प्रिडिक्टिबल है. यह फिल्म भी पिछली फिल्म की तरह आम आदमी के शोषण और ताकतवर वर्ग के अत्याचार पर आधारित है. 2 प्रौढ़ लोगों की लवस्टोरी पर आधारित इस फिल्म की कहानी मध्य प्रदेश के शिवपुरी स्थित जेल और वहां के कैदियों व पुलिसकर्मियों के इर्दगिर्द बनाई गई है. 28 साल पहले युवा मंजु सिंह (मेहर देओल) को 2 प्रेमियों की हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई जाती है.

यहां से कहानी वर्तमान में आती है. मंजु (नीना गुप्ता) अब उम्रदराज हो चुकी है और रिहाई की उम्मीद लगाए है. शंभुनाथ मिश्रा (संजय मिश्रा) जेल में तैनात है. मंजु के दिल में उस के लिए खास जगह है. इसी बीच प्रकाश सिंह (कुमुद मिश्रा) जेलर बन कर आता है, जो ऊंचनीच को मानता है. जेल में नैना (योगिता निहानी) को लाया जाता है, जिस पर झूठे आरोप मढ़े गए है. बाहुबलि विधायक के, भाई केशव (अक्षय डोगरा) की बुरी नजर नैना पर रहती है. जेलर प्रकाश सिंह केशव की बेरहमी से पिटाई करता है.

केशव जेल से फरार हो जाता है और प्रकाश सिंह को निलंबित कर दिया जाता है. लगभग 11 महीने बाद प्रकाश सिंह के सरकारी घर के पीछे केशव का शव मिलने से मामला गरम हो जाता है, फिर से जांच होती है.

जांच की जिम्मेदारी इंस्पैक्टर अतीत सिंह  (अमित के सिंह) को सौंपी जाती है और कई राज खुलते हैं. आखिरकार, कहानी हत्यारे तक पहुंचती है और सस्पैंस का खुलासा होता है.

फिल्म की यह कहानी धीमी गति से आगे बढ़ती है लेकिन जब यह भागना शुरू करती है तो दर्शकों को अच्छी लगने लगती है. दर्शक क्लाइमैक्स का जो अंदाजा लगा कर बैठे थे वैसा कुछ भी नहीं होता.

अभिनय की दृष्टि से नीना गुप्ता अपनी आंखों और हावभावों से आकर्षित करती है. संजय मिश्रा तो है ही हरफनमौला, उस ने अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया है. दोनों प्रौढ़ कलाकारों की कैमिस्ट्री शानदार है. कुमुद मिश्रा का अभिनय भी शानदार है. योगिता निहानी मासूम लगी है. अक्षय डोगरा ने अच्छीखासी खलनायकी कर ली है.

फिल्म का निर्देशन अच्छा है. निर्देशक ने दर्शकों को जैसे सीट से बांध कर बैठा रखा है. यह फिल्म पिछली फिल्म से काफी बेहतर बनी है. निर्देशक ने जेल की जिंदगी, जेल के भीतर के गिरोहों और जेल कर्मचारियों की लाइफ को दिखाया है. फिल्म को वास्तविकता के करीब रखा गया है. यह समाज के स्याह पक्ष को दिखाती है. न्याय व्यवस्था पर भी सवाल उठाती है.

फिल्म के संवाद चुटीले हैं. फिल्म के अंत में इन दोनों कलाकारों पर फिल्माया गीत सुकून देता है. सिनेमेटोग्राफी बढि़या है. बैकग्राउंड म्यूजिक अच्छा बन पड़ा है. इस फिल्म को देखने के लिए धैर्य की जरूरत है. Vadh 2 (2026) – Movie Review

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