Readers’ Problems :

आमदनी सीमित है लेकिन खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं.

मैं 38 साल का हूं. बच्चों की पढ़ाई, घर, दवा सबकुछ संभालतेसंभालते मन में डर रहता है कि भविष्य कैसे चलेगा. रात को नींद भी ठीक से नहीं आती. समझ नहीं आ रहा क्या करूं?

मैं आप की चिंता को पूरी तरह समझ रही हूं. आर्थिक दबाव इंसान को अंदर से बहुत परेशान कर देता है. सब से पहले यह जान लें कि आप अकेले नहीं हैं, बहुत से लोग इस स्थिति से गुजरते हैं. आप खर्चों को प्राथमिकता के अनुसार बांटने की कोशिश करें और जहां संभव हो, बचत के छोटेछोटे तरीके अपनाएं. परिवार से खुल कर बात करना भी मन को हलका करता है. याद रखिए, चिंता से समाधान नहीं निकलता, लेकिन शांत हो कर सोचने से रास्ता जरूर मिलता है.

*

छोटे भाई की तरक्की पर ईर्ष्या होती है. क्या मैं गलत हूं?

घर में भाई की तारीफ होती रहती है. मैं एक 29 साल की युवती हूं. मेरा छोटा भाई पढ़ाई और कैरियर में बहुत आगे निकल गया है. मैं उस से प्यार करती हूं लेकिन मन के किसी कोने में ईर्ष्या भी है, जिसे स्वीकार करने में शर्म आती है. इस वजह से मैं उस से दूरी बनाने लगी हूं. क्या मेरा व्यवहार सही है?

आप गलत नहीं हैं. आप, बस, इंसान हैं. जिस समाज में हम पलेबढ़े हैं, उस में तुलना चुपचाप रिश्तों के बीच बैठ जाती है और हमें पता भी नहीं चलता कि कब प्यार के साथ ईर्ष्या भी जन्म ले लेती है. अपने छोटे भाई से प्रेम करना और उस के आगे निकल जाने पर मन में कसक महसूस करना- ये दोनों भाव एकसाथ रह सकते हैं, इस में कोई नैतिक कमी नहीं है. शर्म तब नहीं होती जब भावना आती है, शर्म तब होती है जब हम उसे पहचानने से इनकार कर देते हैं.

घर में बारबार उस की तारीफ सुन कर आप का मन अपने अधूरे सपनों, रुकी हुई उपलब्धियों और अनकहे सवालों से भर जाता है और वही सब ईर्ष्या का रूप ले लेते हैं. दूरी बनाना दरअसल आप के दिल का एक बचाव तरीका है, ताकि रोजरोज की तुलना आप को और चोट न पहुंचाए. यह स्वार्थ नहीं, आत्मरक्षा है लेकिन लंबे समय तक यह दूरी आप के अपने रिश्ते को कमजोर कर सकती है, जबकि दोष न आप का है, न आप के भाई का.

बेहतर यह होगा कि आप ईर्ष्या को अपराध की तरह नहीं, एक संकेत की तरह देखें. आप का व्यवहार बता रहा है कि आप के भीतर भी सराहे जाने की, आगे बढ़ने की, अपनी पहचान पाने की तीव्र इच्छा है. अपने भाई की सफलता को अपने असफल होने का प्रमाण न बनने दें. आप दोनों की यात्रा, समय और परिस्थितियां अलग हैं. अगर आप धीरेधीरे अपने मन की गांठें सुलझने लगेंगी तो वही प्यार फिर से आगे आ सकेगा और ईर्ष्या अपनी ताकत खो देगी.

*

मातापिता और मैं अपनी जिंदगी के बीच संतुलन कैसे बनाएं?

मैं (उम्र 45 वर्ष) की हूं और जौब करती हूं. मेरे मातापिता दूसरे शहर में रहते हैं और अब उन की उम्र भी हो चली है. वे चाहते हैं कि मैं ज्यादा समय उन के साथ बिताऊं. लेकिन मेरी नौकरी और बच्चों की पढ़ाई के कारण बारबार उन के पास जाना मुश्किल हो जाता है. मन में अपराधबोध रहता है कि मैं उन की ठीक से देखभाल नहीं कर पा रही हूं. खुद को बीच में फंसा महसूस करती हूं.

यह दुविधा आज बहुत से कामकाजी बच्चों की हकीकत है. एक तरफ बूढ़े होते मातापिता की जरूरतें, दूसरी तरफ नौकरी और अपने बच्चों की जिम्मेदारियां. ऐसे में अपराधबोध महसूस होना स्वाभाविक है लेकिन खुद को दोषी ठहराते रहना समस्या का हल नहीं देता. आप एक ही समय में हर जगह शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हो सकतीं. यह आप की कमी नहीं, जीवन की वास्तविकता है.

सब से पहले, अपने मातापिता से खुल कर और प्यार से बात करें. उन्हें यह महसूस कराइए कि भले आप हर हफ्ते उन के पास न पहुंच पाएं, लेकिन वे आप के दिल और प्राथमिकताओं में सब से ऊपर हैं. नियमित कौल, वीडियोकौल, सुबहशाम छोटा सा हालचाल पूछना, छोटेछोटे संपर्क आदि उन्हें भावनात्मक सुरक्षा देते हैं. कई बार बुजुर्गों को शारीरिक मदद से ज्यादा भावनात्मक साथ की जरूरत होती है.

दूसरा, अगर संभव हो तो उन के शहर में किसी भरोसेमंद रिश्तेदार, पड़ोसी या फुलटाइम मेड से नियमित देखभाल की व्यवस्था करें. डाक्टर का अपौइंटमैंट, दवाओं की समय पर उपलब्धता और जरूरी कागजात की एक सूची तैयार रखें ताकि आप दूर रहते हुए भी उन की देखभाल अपनी निगरानी में कर सकें. आजकल टैलीकंसल्टेशन और होमकेयर जैसी सुविधाएं भी मददगार हो सकती हैं.

तीसरा, तय अंतराल पर कुछ दिन पूरी तरह उन के साथ बिताने की कोशिश करें. इन मुलाकातों के दौरान उन की बातों को ध्यान से सुनना, पुराने किस्से याद करना और साथ छोटेछोटे काम करना रिश्ते को गहराई देते हैं.

आप अपने मातापिता की बेटी भी हैं और अपने बच्चों की मां भी. दोनों भूमिकाओं में न्याय करने की कोशिश कर रही हैं. खुद पर बहुत सख्त न हों. प्यार, संवाद और व्यावहारिक व्यवस्था इन तीनों से आप दूर रहते हुए भी मातापिता के करीब रह सकती हैं. जिंदगी को जितना सुलभ बनाने की कोशिश करेंगी, वह आप की सेहत के लिए अच्छा है. – कंचन

आप भी अपनी समस्या भेजें

पता : कंचन, सरिता

ई-8, झंडेवाला एस्टेट, नई दिल्ली-55.

समस्या हमें एसएमएस या व्हाट्सऐप के जरिए मैसेज/औडियो भी कर सकते हैं.

08588843415

Readers’ Problems

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...