Readers’ Problems :

बुरे वक्त में कोई साथ नहीं देता इस बात से दुखी हूं.

लगता है कि रिश्ते सिर्फ मतलब तक ही सीमित होते हैं. मैं 29 वर्ष का युवक हूं. मैं एक निजी कंपनी में नौकरी करता हूं और एक बड़े शहर में किराए के मकान में रहता हूं. पढ़ाई के समय से ही मेरा स्वभाव ऐसा रहा है कि मैं दोस्तों के लिए हमेशा खड़ा रहता हूं. किसी को पैसे की जरूरत हो, किसी का काम अटका हो या किसी को बस सुनने वाला चाहिए, मैं हर बार मौजूद रहता हूं. कई बार अपनी जरूरतें पीछे रख कर भी मैं ने दोस्तों की मदद की है.

समस्या तब महसूस होने लगी जब मेरी जिंदगी में मुश्किल समय आया. नौकरी में दबाव बढ़ गया, घर की कुछ जिम्मेदारियां भी सामने आ गईं. इस बार जब मुझे किसी दोस्त से बात करने या मदद की उम्मीद थी तो वही दोस्त या तो फोन नहीं उठाते थे या टालमटोल करने लगे.

धीरेधीरे यह बात साफ होने लगी कि जिन के लिए मैं हमेशा उपलब्ध रहा, वे मेरे लिए नहीं हैं. अब हालत यह है कि मैं लोगों पर भरोसा करने से डरने लगा हूं. मन में कड़वाहट आ गई है. कभीकभी खुद पर भी गुस्सा आता है कि मैं ने इतना दिया ही क्यों.

आप की तकलीफ सिर्फ दोस्तों से नहीं, अपेक्षाओं के टूटने से है. आप का स्वभाव देना है और यह एक अच्छी बात है लेकिन जब देने की आदत बिना सीमा के हो जाती है तो लोग उसे आप का स्वभाव नहीं, आप की मजबूरी समझने लगते हैं. यह समझना जरूरी है कि हर रिश्ता बराबरी का नहीं होता. कुछ लोग सिर्फ साथ चलने के लिए होते हैं, साथ निभाने के लिए नहीं. इस का मतलब यह नहीं कि आप गलत हैं, बल्कि इस का मतलब यह है कि आप ने लोगों को परखने में देर कर दी.

अब जरूरी है कि आप धीरेधीरे सीमाएं बनाना सीखें. हर किसी के लिए हर समय उपलब्ध रहना बंद करें. मदद करें, लेकिन अपनी कीमत पर नहीं. सच्चे रिश्ते कम होते हैं, लेकिन समय आने पर वही लोग टिकते हैं.

भरोसा पूरी तरह छोड़ना समाधान नहीं है, बल्कि सही लोगों पर भरोसा करना सीखना ही आगे का रास्ता है. याद रखिए जो खुद को बचाना सीख लेता है, वही दूसरों के लिए भी सही मायनों में खड़ा रह पाता है.

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मेरा बौयफ्रैंड बारबार मिलने के लिए दबाव डालता है.

मैं 16 साल की हूं. मेरा बौयफ्रैंड मुझे बहुत प्यार करता है. कभीकभी वह बारबार मिलने और ज्यादा समय साथ बिताने के लिए मुझ पर दबाव डालता है. मैं भी उसे पसंद करती हूं लेकिन कभीकभी डर लगता है कि मैं सही निर्णय नहीं ले रही. मुझे समझ नहीं आता कि मैं इस दबाव को कैसे संभालूं और खुद को सुरक्षित महसूस करूं.

प्यार में भी दबाव होना कभीकभी तनाव और डर पैदा कर सकता है. सब से पहले, यह जान लें कि आप का डर और चिंता पूरी तरह स्वाभाविक है. आप धीरेधीरे और विनम्र तरीके से अपने बौयफ्रैंड से कह सकती हैं कि आप अपने समय और सीमाओं के अनुसार ही मिलना चाहती हैं. अगर वह आप का सम्मान करता है तो वह इसे समझेगा. याद रखें, किसी भी रिश्ते में आप का मन, आप की शांति और सुरक्षा सब से अहम हैं.

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भाभीदेवर के हंसीमजाक की सीमा क्या होनी चाहिए?

मैं 25 साल की हूं और मेरे देवर और मैं घर में अकसर अकेले समय में बातचीत करते हैं. कभीकभी मुझे लगता है कि हमारे बीच बातचीत या हंसीमजाक को कुछ लोग गलत समझ सकते हैं. मैं भाभीदेवर के रिश्ते के बीच सम्मान बनाए रखना चाहती हूं, लेकिन कभीकभी समझ नहीं आता कि मैं अपनी हदें कैसे तय करूं और कोई नाराज भी न हो.

परिवार में सीमाएं रखना और सम्मान बनाए रखना दोनों बहुत महत्त्वपूर्ण हैं. सब से पहले, यह जान लें कि हद तय करना स्वाभाविक और सही है. आप बातचीत और हंसीमजाक में विनम्रता बनाए रखें और अपनी निजी बातों को सोचसमझ कर साझा करें. यदि कोई बात असहज लगती है तो उसे शांति से नकार देना सीखें. परिवार के बाकी सदस्यों के सामने ऐसा व्यवहार साफ और सम्मानजनक रखें. याद रखें, किसी को खुश रखने के लिए अपनी मर्यादा या मानसिक शांति का त्याग न करें.

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कभीकभी लगता है अपने लिए मैं ने कुछ किया नहीं.

मैं 40 साल की हूं. घर, नौकरी, बच्चों और बुजुर्गों की जिम्मेदारियों में मेरी पूरी जिंदगी निकल रही है. मन थका रहता है, लेकिन किसी से कह नहीं पाती. सब को लगता है कि मैं मजबूत हूं, पर अंदर से बहुत खाली महसूस करती हूं. समझ नहीं आता कि मैं इस भावना से कैसे बाहर निकलूं.

जब इंसान लगातार दूसरों के लिए जीता है और खुद को पीछे छोड़ देता है तो ऐसा खालीपन आना स्वाभाविक है. सब से पहले, यह मान लेना जरूरी है कि आप की थकान और उदासी गलत नहीं है. आप इंसान हैं, मशीन नहीं. आप रोज अपने लिए थोड़ा सा समय निकालने की कोशिश करें, चाहे वह 15 मिनट की चुप्पी हो, पसंदीदा गाने, किताब या टहलना. किसी भरोसेमंद व्यक्ति से दिल की बात कहना भी बहुत हलका कर देता है. याद रखिए, खुद का खयाल रखना स्वार्थ नहीं, जरूरत है.

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