Readers' Problems :
मेरे घर की कामवाली बाई का व्यवहार ठीक नहीं है.
मैं 35 वर्ष की महिला हूं. मेरी शादी हो चुकी है और मैं एक निजी कंपनी में काम करती हूं. पति भी नौकरी करते हैं. घर और औफिस दोनों संभालने के लिए कामवाली बाई पर निर्भर रहना पड़ता है, लेकिन वह न समय की पाबंद है न काम की. कई बार मन करता है नौकरी छोड़ दूं, लेकिन करनी जरूरी है. हर दिन गुस्से और अपराधबोध के बीच निकल जाता है.
आज की नौकरीपेशा महिला के लिए घर और औफिस दोनों संभालना आसान नहीं है. कामवाली बाई पर निर्भर रहना मजबूरी बन जाता है, लेकिन जब वह समय की पाबंद न हो या काम ठीक से न करे तो गुस्सा और अपराधबोध स्वाभाविक है. ऐसे में सब से जरूरी है यह समझना कि हर दिन सबकुछ परफैक्ट होना संभव नहीं. घर के कामों में प्राथमिकता तय करें, जो जरूरी है वही रोज हो, बाकी काम जरूरत के अनुसार रखें. कामवाली से शांति से अपनी अपेक्षाएं स्पष्ट करें और पति को घर की जिम्मेदारियों में भागीदार बनाएं. नौकरी छोड़ने के बजाय खुद पर से अनावश्यक दबाव कम करें और यह स्वीकार करें कि थकान कमजोरी नहीं, बल्कि मेहनत का संकेत है. थोड़ी समझदारी, संवाद और आत्म देखभाल से इस स्थिति को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है.
*
कुछ समय से पड़ोसियों से संबंध खराब हो गए हैं.
मैं 44 वर्ष का पुरुष हूं. मेरी शादी हो चुकी है और 2 बच्चे हैं. मैं प्राइवेट नौकरी करता हूं और परिवार के साथ अपने ही मकान में रहता हूं. पिछले कुछ वर्षों से हमारे पड़ोसी हर छोटी बात में दखल देने लगे हैं. कभी बच्चों के खेलने पर, कभी गाड़ी पार्क करने पर तो कभी मेहमानों को ले कर.
आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें
डिजिटल
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
- 24 प्रिंट मैगजीन





