EU-India- Trade Deal : ईयू यानी यूरोपीय यूनियन से भरता का ट्रेड समझौता सुपर पौवरों की आपसी रेस में एक अच्छा कदम है चाहे यह यूरोप के 27 छोटेछोटे मगर बेहद अमीर देशों और बहुत बड़े मगर बेहद गरीब भारत के लिए लाभ का होगा या नहीं, इस बारे में अभी नहीं कहा जा सकता क्योंकि इस कस्टम ड्यूटी फैसले को लागू करने में महीनोंसालों लगेंगे.
भारत को अपना कच्चा व घटिया बना माल बेचने के लिए बाजार चाहिए ताकि वह यूरोप, अमेरिका और चीन से आने वाले महंगे व ऊंची तकनीकी वाले सामान को खरीद सके. यूरोप अब तक भारत के सामान पर बहुत ही ज्यादा ड्यूटी लगाता था क्योंकि वह चाहता था कि देश के लोग देश में बना घटिया क्वालिटी का सामान खरीदें या फिर बेहद महंगा यूरोपीय सामान खरीदें जिस पर सरकार मोटा मुनाफा कमाए.
अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के बाद यूरोप और भारत दोनों कोई साथी ढूंढ रहे हैं जो अमेरिका के फैलाए कीचड़ में से निकलने के लिए हाथ थाम सके. यह हाथ अमेरिका जैसा मजबूत और बड़ा होगा, इस में संदेह है लेकिन फिर भी जब कीचड़ में फंस रहे हो, तो पतली रस्सी भी कुछ आस बनाती है.
भारत और यूरोप का आपसी व्यापार खासा है और भारत का निर्यात ज्यादा है. बहुत ज्यादा ड्यूटी की वजह से आयात कम है. ताजा फैसले के तहत भारत ने अपनी कस्टम ड्यूटियां कम कर के यूरोप के उच्च तकनीक वाले सामान को आने दिया है. यूरोप ने बहुत से सामान पर ड्यूटी काटी है लेकिन इस से भारत का निर्यात बढ़ेगा, इस का तो बस अंदाजा लगाया जा सकता है. फिलहाल तो यह डोनाल्ड ट्रंप के मुक्के के जवाब में कंकर फेंकने का काम नजर आता है.
यूरोप में बहुत सी तकनीकी चीजें बन रही हैं और अमेरिका उस का बड़ा बाजार है. भारत उन चीजों को खरीद सकेगा, यह उम्मीद नहीं है. गाडिय़ां जो आएंगी, वे एकएक करोड़ रुपए की होंगी और यदि उन पर 10-20 लाख रुपए ड्यूटी कम भी हो जाए तो ऐसा नहीं होगा कि लोग लाइन लगा कर खरीदेंगे.
यह न भूलें कि यूरोप के देशों की प्रतिव्यक्ति वार्षिक आय 3,000 डौलर से 1,00,00 डौलर तक की है जबकि भारत अभी 2,500 डौलर पर सिसक रहा है. यदि भारत की जीडीपी में 6-7 फीसदी की भी बढ़ोतरी होती है तो भी प्रतिव्यक्ति आय में 100 डौलर तक का ही इजाफा होगा. यूरोप के सामान का यहां सिर्फ अमीर उमराव खरीदार हैं जो पिछले दशक में बड़ी तेजी से बढ़े हैं.
यूरोपीय यूनियन के साथ हुए समझौते से फायदा होगा तो यहां के अनपढ़ और पढ़लिखे बेरोजगार युवाओं को होगा जो वहां बस सकते हैं. लेकिन यह न भूलें कि वहां हर देश में गरीब देशों से आने वाले फूहड़, बदबूदार लोगों, जो अपने धर्म की कूड़े की टोकरी सिर पर रख कर आ रहे हैं, का सड़कों पर विरोध हो रहा है. वे लोग भारतीय सामान तो ले लेंगे, भारतीयों का खुलेदिल से स्वागत करेंगे, इस की उम्मीद नहीं है. उर्सुला वोन डेर लेयन के साथ मुसकराती फोटो के पीछे बहुतकुछ छिपा है, यह न भूलें. EU-India- Trade Deal





