Anemia in Girls : व्रत और सही खानपान न होने के कारण लड़कियां एनीमिया का शिकार हो रही हैं. जिस का प्रभाव न केवल उन की पर्सनाल्टी पर पड़ता है बल्कि वह बीमारियों से भी ग्रस्त हो जा रही हैं. वैसे तो शहर और गांव दोनों ही जगहों पर रहने वाली लड़कियां इस का शिकार हैं लेकिन गांव और गरीब परिवारों में रहने वाली लड़कियों पर इस का प्रभाव अधिक दिख रहा है.

लखनऊ के चिनहट इलाके में सीजी गर्ल्स कालेज के नाम से लड़कियां का स्कूल है. नारी सशक्ति नाम का एनजीओ लड़कियों के स्वास्थ्य की जांच करने का काम करता है. नवंबर माह में नारी शक्ति एनजीओ ने अपना एक कैंप सीजी गर्ल्स कालेज में लगाया. कक्षा 9 से कक्षा 12 की लड़कियों का वजन और दूसरी जांचों के जरिए उन के अंदर एनीमिया का पता लगाने का काम किया जा रहा था. जांच में 120 लड़कियों का हेल्थ परीक्षण किया गया. इन में से 80 लड़कियां अंडरवेट थी. यह सभी एनीमिया का शिकार थी. इन के घरवालों को इस का पता नहीं था न ही इन लड़कियों को इस का पता था.

इन में से अधिकतर को काम में मन न लगने की शिकायत थी. कुछ को थकान लगती थी. जिन लड़कियों को माहवारी होती थी वह इस से परेशान थी कि कभी रक्तस्राव होता था, कभी कम होता था और कभी न के बारबार केवल रक्त की बूंदें ही दिखती थी. माहवारी के दौरान पेट और पीठ की तरफ कमर में दर्द होता था. यह स्कूल में खेलकूद में हिस्सा नहीं लेती थी.

नारी शक्ति एनजीओ ने इस तरह की परेशान लड़कियों के टिफिन बौक्स की जांच की तो उन में ज्यादातर के पास टिफिन नहीं था. उन्होंने बताया कि वह घर से 10-20 रूपए ले कर आती हैं और कालेज के बाहर लगने वाले ठेले से खस्तापकौड़ा और ब्रेडरोल ले कर खाती है. जो लड़कियां टिफिन ले कर आती थी उन का कहना था कि वह कभी पराठा, कभी पूड़ी और कभी रोटी ले कर आती हैं. उस के साथ खाने के लिए अचार या आलू की सब्जी लाती थी.

इन सभी को खाने में फल और हरी सब्जी टिफिन में नहीं मिलती थी. न इन को यह खाना पसंद था. इन में से अधिकतर शाकाहारी खाना खाती थी. 20-25 लड़कियां वह थी जो सप्ताह में एक दिन व्रत भी रहती थी. कुछ सोमवार का व्रत रखती थी तो कुछ गुरूवार का व्रत रखती थी. जिस में वह केवल शाम को खाना खाती थी.

डाक्टर मांडवी कौर कहती है ‘इन लड़कियों की दिनचर्या और खानपान देख कर समझ आ रहा था कि इन को न तो अपनी सेहत क चिंता थी न ही वह यह मानती थी कि वह बीमार है. उन को यह भी नहीं पता था कि एनीमिया जैसा कोई रोग होता है.’

एनीमिया की कमी से होने वाली परेशानियां:

लड़कियों में खून की कमी यानि एनीमिया के कारण कई तरह की बीमारियां बढ़ जाती हैं. अगर समय पर इन का उपचार नहीं किया जाता तो यह खतरनाक साबित हो जाती हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पूरी दुनिया में 20 साल तक की आयु की 49 फीसदी लड़कियां इस से प्रभावित हैं. भारत में 15 से 20 साल आयुवर्ग की 57 फीसदी लड़कियां एनीमिया की शिकार हैं. गांव में रहने वाले गरीब एससी बिरादरी के परिवारों में रहने वाली लड़कियों में एनीमिया का खतरा सब से अधिक है. इस का सब से बड़ा कारण अच्छा खाना न मिलना है. इसी के साथ लड़कियों में माहवारी का शुरू होना दूसरा प्रमुख कारण है.

एनीमिया के दूसरे प्रमुख कारणों में विटामिन बी12 और फौलेट की कमी, थैलेसीमिया जैसी हीमोग्लोबिनोपैथी, सिकल सेल रोग या लक्षण शामिल हैं. माहवारी के दौरान कई लड़कियों को अधिक रक्तस्राव होता है. इस के साथ ही साथ माहवारी का अनियमित होना, हार्मोन के स्तर में उतार चढ़ाव भी हो सकता है. आज गांव में लड़कियों को पौष्टिक आहार कम ही मिल पाता है. अभी भी उन के साथ भेदभाव कायम है. काम लड़कियों को अधिक करना होता है. वह घर के काम, पढ़ाई और बाहर के काम भी करती हैं.

Anemia in Girls
एनीमिया से ग्रसित महिला (प्रतीकात्मक छवि)

एनीमिया की सब से बड़ी पहचान यह होती है कि थोड़ा भी मेहनत वाला काम करते ही थकान महसूस होने लगती है. माहवारी के समय यह परेशानी अधिक महसूस होती है. जिस की वजह से लड़कियां बीमार सी बनी रहती है. इस से वह चिड़चिड़ी हो जाती हैं. उन की सुदंरता खत्म हो जाती है. वह चिंतित और बीमार नजर आती हैं. उन का पढ़ाई, खेलकूद या किसी काम करने में मन नहीं लगता जिस से उन के शरीर का सही विकास नहीं होता है. यह एनीमिया अगर लंबे समय तक बनी रहती है तो टीबी जैसे खतरनाक रोग हो सकते हैं. यह लड़कियां जब मां बनती हैं तो प्रसव के समय या गर्भावस्था के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ता है.

माहवारी और एनीमिया:

लड़कियों में एनीमिया और माहवारी का आपस में गहरा संबंध है. जिन लड़कियों को लंबे समय तक यानि 5 से 7 दिन तक पीरियड्स आते हैं या माह में दो बार पीरियड्स आते हैं उन को दिक्कत बहुत होती है. इस से शरीर में आयरन की कमी हो जाती है. जिस से थकान, कमजोरी, सांस फूलना और पीलापन जैसे लक्षण दिखते हैं. लड़कियों में हर माह माहवारी के दौरान शरीर से रक्त के साथ आयरन निकल जाता है. ज्यादा समय तक जिन के लंबे समय तक पीरियड्स आते हैं. उन में एनीमिया का खतरा बहुत ज्यादा होता है. क्योंकि शरीर की आयरन की जरूरतें पूरी नहीं हो पाती हैं.

एनिमिया से बचाव:

डाइटीशियन रानू सिंह बताती हैं ‘एनीमिया से बचाव के लिए आयरन की कमी को पूरा करने के लिए पालक, चुकंदर, अनार, और दालों का प्रयोग करना चाहिए. विटामिन 12 मांस, मछली, अंडे और फौलिक एसिड हरी सब्जियों से मिल जाती हैं. संतुलित और पौष्टिक आहार लें. विटामिन सी के लिए नीबू, संतरा खाएं. इस के साथ ही चायकौफी का सेवन कम करें. लोहे के बर्तनों में खाना पकाने से भोजन में आयरन की मात्रा बढ़ सकती हैं.

तांबे के बर्तन में रखा पानी पीना भी फायदेमंद माना जाता है. भारी मासिक धर्म वाली लड़कियों को नियमित जांच करानी चाहिए. खाने के तुरंत पहले या बाद में चायकौफी पीने से बचें. यह आयरन को कम करने का काम करते हैं. भरपूर नींद लें. तनाव कम करें और एक्सरसाइज करें. पेट के कीड़ों से होने वाला संक्रमण भी एनीमिया का कारण बन सकता है. इसलिए इन का इलाज कराते रहें.

इस के अलावा चाहे वजन कम करने के लिए हो यह व्रत रहने के लिए शरीर को भूखा न रखे. भूखा रहने से शरीर में कई तरह की परेशानियां बढ़ जाती है शुरूआत में जिन का पता नहीं चलता है. धीरेधीरे यह कई तरह की बीमारियों को बढ़ाने का काम करती हैं. ऐसे में स्कूल के समय से ही ध्यान रखें जिस से मां बनने और प्रसव के दौरान कई खतरों से बचा जा सके.

नौकरी और कैरियर के दौरान शरीर से जिस तरह की मेहनत ली जाती है वह भी हो सके. कैरियर में आगे बढ़ने के लिए भागदौड़ की जरूरत होती है. अब लड़कियों को उन क्षेत्रों में भी जौब मिलता है जहां ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. ऐेसे में कमजोर शरीर से कदम आगे नहीं बढ़ाए जा सकते हैं. Anemia in Girls

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