Liver Disease Awareness : लिवर सिरोसिस एक जानलेवा बीमारी है जिस का कोई इलाज होम्योपैथी या आयुर्वेद में नहीं है लेकिन इस बीमारी की समय से पहचान और एलोपैथिक के अनुशासित इलाज से मौत के समय को कुछ साल दूर धकेला जा सकता है. कैसे, जानिए.

सलोनी का पति अनुज लंबे समय से लिवर की बीमारी से जूझ रहा था. रुद्रप्रयाग में रहने वाले और पेशे से पत्रकार अनुज की उम्र अभी सिर्फ 35 साल थी. उस की 5 साल पहले ही शादी हुई थी और 3 साल पहले उन के घर में नन्हे अंकुर की किलकारी गूंजी थी. कोई 2 साल पहले अनुज को पीलिया के लक्षण दिखे तो उस ने एक झड़फूंक करने वाले से पीलिया झड़वाया. उस ने कई दिनों तक पीलिया झड़ा और उस के बाद किसी जड़ी की माला अनुज के गले में पहना दी, कहा, ‘जैसेजैसे यह जड़ी सूखेगी, पीलिया पूरी तरह खत्म हो जाएगा.’ जड़ी तो हफ्तेभर में सूख गई और उस के साथ अनुज का शरीर भी सूखने लगा. नौकरी की भागमभाग में अनुज ने खुद पर ध्यान नहीं दिया. दिनभर फील्डवर्क और रात में दोस्तों के साथ शराब पार्टी कर के जब वह 11-12 बजे घर पहुंचता था तो उसे अपना होश नहीं रहता था.

अनुज की कमजोरी बढ़ती जा रही थी. भूख भी खत्म हो गई थी. मगर शराब की तलब नहीं छूटी. जब उसे चलनेफिरने में भी लड़खड़ाहट महसूस होने लगी तो एक दिन उस ने एक होम्योपैथिक डाक्टर को दिखाया. 6 महीने उस का इलाज चला मगर फायदा कुछ नहीं हुआ. उलटे, उस का पेट फूलने लगा.

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

डिजिटल

(1 साल)
USD48USD10
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
 

डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन

(1 साल)
USD150USD120
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
  • 24 प्रिंट मैगजीन
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...