Social Interest :
एक से बढ़ कर एक लेख
दिसंबर (प्रथम) अंक ध्यान से पढ़ा. इस अंक में प्रकाशित कहानी ‘बदलते एहसास’ विशेषरूप से दिल को छू गई, इसलिए इस की लेखिका साधुवाद की पात्र हैं. बाकी कहानियां भी अच्छी थीं. इस बार के सभी लेख भी प्रभावशाली लगे. हर लेख एक से बढ़ कर एक था. स्थायी स्तंभ पाठकों की समस्याएं, इन्हें आजमाइए, चंचल छाया भी पठनीय थे. पत्रिका में कोई आर्थिक लेख नहीं होता, जिस की कमी खलती है. – हर ज्ञान सिंह सुथार हमसफर
*
एक गुजारिश
नवंबर (द्वितीय) अंक में प्रकाशित सभी लेख व कहानियां बेहद पसंद आईं और पूरा अंक पसंद आया. स्थायी स्तंभ बच्चों के मुख से पढ़ कर हमें अपने बचपन की याद आ जाती है.
एक छोटी सी गुजारिश है कि कृपया पत्रिका में चुटकुले, पहेलियां और हास्य प्रसंगों का विशेष स्तंभ भी नियमित रूप से प्रकाशित करें ताकि आज की भागदौड़भरी जिंदगी में ऐसे हलकेफुलके कौलमों से मुसकराने की खुराक
मिलती रहे. – विमल वर्मा
बच्चों के मुख से
मैं एक स्कूल में प्राइमरी की अध्यापिका हूं. मैं ने तीसरी कक्षा के बच्चों को सामान्य ज्ञान पढ़ाया और फिर उन का टैस्ट लिया. टैस्ट में प्रश्न थे-इंडिया में रहने वालों को क्या कहते हैं? पोलैंड, जरमनी और हौलैंड में रहने वालों के बारे में भी पूछा था.
मेरी कक्षा के बहुत से बच्चों के उत्तर ने मुझे हंसने पर मजबूर कर दिया. उत्तर थे : इंडियन, पोल्स, जर्म्स और होल्स. – रजनी गोयल
*
मेरा 10 वर्षीय भांजा एक दिन अपनी मां के पास जा कर जोरजोर से रोने लगा, नाटक करने लगा. मां ने पूछा, ‘‘क्या हुआ बेटा.’’ वह बोला, ‘‘मां, मेरे मित्र के पास वीडियो गेम है, मेरे पास नहीं है.’’ मां भी उस की बात सुन कर जोरजोर से रोने का नाटक करने लगी. बेटा बोला, ‘‘मां, आप रो क्यों रही हैं.’’
मां बोली, ‘‘बेटा, मेरी सहेली का बेटा 95 फीसदी नंबरों से पास हुआ है और मेरा बेटा मुश्किल से 40 फीसदी नंबरों से ही पास हुआ है.
बेटा बोला, ‘‘मां, हम दोनों की समस्या नैचुरली है, इसलिए चलो हम दोनों गले मिल कर जोरजोर से रोते हैं.
उस की यह बात सुन कर हम सब हंसतेहंसते लोटपोट हो गए. – सपना कहार
*
मैं और मेरे पति मार्केटिंग कर घर आए. मेरा 6 वर्षीय बेटा अपनी फूफी के साथ बैठा टीवी देख रहा था. हम दोनों को देखते ही उस ने कहा, ‘‘तुम लोग कानूनन जुर्म कर रहे हो.’’
हम दोनों चौंक गए चूंकि मेरे पति केवी में टीचर हैं और मैं स्वयं बीएड कर टीचर बनने वाली हूं. हम लोग कानूनन जुर्म कर रहे हैं, यह सोचसोच कर परेशान हो गए कि क्या गलती हम से हो रही है. काफी सोचने के बाद जब कुछ समझ में न आया तब उस से ही पूछा कि क्या
बात है.
उस ने सटीक बात कही, ‘‘बाल मजदूरी कानूनन जुर्म है या नहीं?’’
हम ने कहा, ‘‘वो तो है.’’ वो बोला, ‘‘मैं ने फूफी से पूछा कि बाल मजदूरी क्या है? तो वो बताईं कि बच्चों से काम करनवा बाल मजदूरी है और तुम लोग मुझ से दिनभर में पचास काम करवाते हो, जैसे छत से कपड़े उठा लाओ, अपनी बुक उठा लाओ, दादा की दुकान से कुछ सामान ले लाओ. इसलिए, तुम लोग कानूनन जुर्म कर रहे हो.’’
यह सुन कर हम दोनों पतिपत्नी हंसे बिना न रहे सके. – चंदा बानो
*
मैं सपरिवार अपनी बेटी के घर गई थी. उस का 3 वर्षीय बेटा चीकू बहुत नटखट व भोला है. खाना खाने के बाद हम सभी गप्पें कर रहे थे और चीकू की शरारतों का आनंद ले रहे थे.
मेरे पति को एसिडिटी रहती है. उन्हें भारीभारी 2 डकारें आईं. चीकू ने तुरंत खेलना छोड़ कर इन के कंधे पर हाथ रख कर पूछा, ‘‘नानू, पानी पियोगे, मैं आप को पुदीनहरा दूं?’’
बच्चे की इस मासूम चिंता को देख कर उस समय सभी का मन गदगद हो गया और हम सभी मुसकरा दिए. – संध्या
*
मेरी बहू के पास कुछ बच्चे ट्यूशन पढ़ने को आते हैं. एक बच्चा चौथी कक्षा का भी पढ़ने आता है. जिस स्कूल में मेरी बहू पढ़ाने जाती है उस में ही वह पढ़ता है. एक दिन वह पढ़ने आया तो मेरी बहू ने उस से पूछा, ‘‘कल तुम्हारे मम्मीपापा स्कूल आए थे, तुम्हारी क्लासटीचर से बात कर रहे थे.’’
वह बोला, ‘‘मैं ने एक लड़के को मारा था, इसलिए मेरी मैडम ने उन्हें मेरी शिकायत करने के लिए बुलाया था.’’
उस ने इतने भोलेपन से कहा कि ‘मैं ने उस को खूब मारा था, सुन कर उस के सच व सीधेपन को महसूस कर सब हंसने लगे. – काशी चौहान
*
मेरे 5 वर्षीय पुत्र को पत्नी ने समझाते हुए कहा, ‘‘बेटा, अब तुम बड़े हो गए हो, घर का छोटामोटा काम कर दिया करो. थोड़ी मेरी मदद किया करो.’’
नटखट छोटू ने भोली सूरत बना कर जवाब दिया, ‘‘मैं मदद कलता तो हूं.’’
मेरी पत्नी ने उस से पूछा, ‘‘कैसे मदद करते हो?’’
छोटू अपनी तोतली भाषा में बोला, ‘‘आप की साड़ी पकड़ कर पीछेपीछे घूमता हूं.’’
उस के इस मासूम जवाब पर मेरा ठहाका लगा कर उसे प्यार करना स्वाभाविक था तो पत्नी ने भी उसे सीने से लगा कर खूब प्यार किया. वह बहुत खुश नजर आ रहा था. – सतीश शर्मा
आप भी भेजें
सरिता में प्रकाशित रचनाओं तथा अन्य सामयिक विषयों पर अपने विचार भेजिए. कृपया पत्रों पर अपना पता अवश्य लिखें. पत्र इस पते पर भेजिए : आप के पत्र, सरिता, ई-8, झंडेवाला एस्टेट,
नई दिल्ली-55.
नीचे लिखे नंबर पर एसएमएस या
व्हाट्सऐप के जरिए मैसेज/
औडियो भी कर सकते हैं.
08588843415
Social Interest :
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...