Azad Bharath Movie Review : यह तो सभी जानते हैं कि 15 अगस्त, 1947 को भारत को ब्रिटिश उपनिवेशवाद से मुक्ति मिली जिसे ‘आजाद भारत’ कहा जाता है. ब्रिटिश राज से आजाद भारत, जो अब एक संप्रभु लोकतांत्रिक राष्ट्र है. जो अपने नागरिकों को समान अधिकार और स्वतंत्रता देता है, जैसा कि संविधान में वर्णित है. भारत का स्वतंत्रता दिवस हर वर्ष 15 अगस्त को देश भर में हर्षोल्लास से मनाया जाता है. इस दिन 200 वर्ष से अधिक समय तक ब्रिटिश उपनिवेशवाद के चंगुल से छूट कर एक नए युग की शुरुआत हुई थी.

‘आजाद’ शीर्षक से पहले भी बहुत सी फिल्में बन चुकी हैं. सन 1955 में दिलीपकुमार, मीना कुमारी और प्राण की फिल्म ‘आजाद’ रिलीज हुई थी. 1978 में धर्मेंद्र, हेमामालिनी की फिल्म ‘आजाद’ आई थी. 2025 में आई एम ए (इंडियन नैशनल आर्मी पर आधारित फिल्म) आई, जिस में अजय देवगन, डायना पेंटी थे. यह फिल्म झांसी की रानी रेजिमैंट पर केंद्रित थी. इन के अलावा भी क्षेत्रीय भाषाओं में ‘आजाद’ शीर्षक से फिल्में बनीं, मगर इन सभी का भारत के आजाद होने या स्वतंत्रता संग्राम से कोई वास्ता न था.

मगर 2026 के दस्तक देते ही श्रेयस तलपड़े अभिनीत की 'आजाद भारत' परदे पर नजर आई है. यह हिंदी भाषा की ऐतिहासिक फिल्म है. रूपा अय्यर द्वारा निर्देशित यह फिल्म भारतीय राष्ट्रीय सेना की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिस में इस की महिला इकाई "झांसी की रानी रेजिमैंट" पर ध्यान केंद्रित किया गया है. महिला क्रांतिकारियों के संघर्ष को प्रभावी ढंग से दिखाने वाली यह फिल्म भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महिला क्रांतिकारियों की अनकही कहानी दिखाती है. लगभग 2 घंटे की यह फिल्म नेताजी सुभाष चंद्र बोस के साथ भारत की आजादी में शामिल हुई नीरा आर्य की ऐतिहासिक कहानी को दर्शाती है. इस फिल्म को आप नीरा आर्य की बायोपिक भी कह सकते हैं.

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