De De Pyaar De 2 Movie Review : वर्ष 2019 में ‘देदे प्यार दे’ के नाम से एक फिल्म आ चुकी है और अब इस फिल्म की सीक्वल ‘देदे प्यार दे 2’ आई है. इस बार कुछ कलाकार तो पहले भाग वाले हैं, कुछ को नया जोड़ा गया है. यह एक रोमांटिक कॉमेडी मूवी है, जो दर्शकों को मनोरंजन परोसती है. इस में फैमिली कॉमेडी है, उम्र के फासले हैं. यह फिल्म रिश्तों की भी बात करती है.
‘प्यार दे दे, हमें प्यार दे…’ वर्ष 1984 में आई फिल्म ‘शराबी’ का यह गाना खूब चला था. इसे अमिताभ बच्चन और जयाप्रदा पर फिल्माया गया था. मनचले यह गाना गा कर लड़कियों को छेड़ा करते थे. इस गाने को किशोर कुमार और आशा भोंसले ने गाया था.
बॉलीवुड में इस तरह की रोमांटिक फिल्में अब कम ही बन रही हैं. काफी समय बाद हिंदी सिनेमा में एक रोमांटिक कॉमेडी फिल्म देखने को मिली है जिस में अच्छा ह्यूमर है जो अश्लील नहीं है. एक जवान और कमसिन युवती अपने से दोगुने आदमी को अपना जीवनसाथी बनाने का फैसला कर ले तो उथलपुथल मचनी तय है. इसी गड़बड़झले को कॉमेडी, इमोशन और मनोरंजक तरीके से पेश किया गया है. यह फिल्म मध्यांतर से पहले तो दर्शकों को खूब हंसाती है मगर मध्यांतर के बाद लड़खड़ा जाती है.
फिल्म की कहानी आयशा (रकुल प्रीत सिंह) की है, जो 27 वर्ष की हो गई है. उसे 52 साल के तलाकशुदा एनआरआई इन्वेस्टर आशीष मेहरा (अजय देवगन) से प्यार हो जाता है. वह उस से शादी करना चाहती है लेकिन मुश्किल यह है कि माता पिता की रजामंदी कैसे हासिल की जाए. पहले पार्ट में आशीष मेहरा अपनी गर्लफ्रेंड को अपने परिवार वालों से मिलवाता है. उन्हें मनाने में काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है और काफी फनी सीन क्रिएट होते हैं.
अब इस इस के सेकंड पार्ट में उस की गर्लफ्रेंड आयशा आशीष को अपने परिवार से मिलवाने का फैसला करती है. मुश्किल यह है कि परिवार वाले मौडर्न और पढ़े लिखे हैं मगर उन के लिए उम्र से दोगुने से शादी की बात पचा पाना बेहद मुश्किल है. और चूंकि वे आधुनिक होने का क्लेम करते हैं तो इस बात को जगजाहिर भी नहीं करना चाहते.
आयशा अपनी भाभी किट्टू (इशिता दत्ता) की डिलीवरी का समय चुनती है ताकि इस खुशी के मौके पर उस की मम्मी (गौतमी कपूर) और पापा (आर माधवन) उस के रिश्ते के लिए हां कह दें. पहले तो परिवार वालों का रिएक्शन कुछ और था लेकिन आखिरकार वे उन दोनों की शादी के लिए राजी हो जाते हैं.
मतलब, यह लव स्टोरी आयशा के घर आ पहुंची है. शादी के लिए आशीष (अजय देवगन) को आयशा के परिवार की हां चाहिए. आर माधवन और गौतमी आयशा के पेरेंट्स हैं. अपनी बेटी के अफेयर से उन्हें कोई समस्या नहीं है, मगर क्या भारतीय समाज को यह मंजूर होगा?
फिल्म की यह कहानी प्रिडिक्टेबल है. एक ही विषय को घुमा फिरा कर 2 बार बनाना दर्शकों को बेवकूफ बनाने जैसा है. मगर विषय दिलचस्प जरूर है. तरुण जैन और लव रंजन ने ‘दे दे प्यार दे’ की कहानी को इस तरह लिखा है कि प्रोग्रेसिव पेरेंट्स के ईगो और मॉडर्न लव स्टोरी में टकराव दिखाया जा सके.
फिल्म शुरू होते ही जावेद जाफरी (जो पहली फिल्म में अजय देवगन के दोस्त बने हैं) मजेदार तरीके से पिछली फिल्म का रीकैप देता है. अजय देवगन की ही ‘सिंघम’ को कौमेडी के लिए यूज किया गया है. अजय देवगन की पत्नी काजोल कॉमेडी का हिस्सा है. जावेद जाफरी का बेटा मीजान जाफरी ऐसे लड़के की भूमिका में है जिसे आयशा को पटाने के लिए उस के पापा ने काम पर लगा रखा है. फिल्म यह बताने की कोशिश करती है कि प्यार आखिर है क्या. फिल्म उन्हें जरूर अच्छी लग सकती है जो जवान लड़कियों के साथ प्यार करने की हसरतें रखते हैं.
पूरी फिल्म में चटपटे संवाद हैं. फिल्म का नायक तो अजय देवगन है मगर माहौल आर माधवन ने बनाया है. आयशा की मां बनी गौतमी का काम भी बढ़िया है. अजय देवगन लवर की भूमिका में मैच्योर है.
फिल्म कहीं कहीं धीमी हो जाती है. क्लाइमैक्स भी धीमा है. किरदार कन्फ्यूज लगते हैं. रकुल प्रीत सिंह खूबसूरत लगी है. गाने फिल्म को स्लो करते हैं मगर सुनने में वे अच्छे हैं. कुछ सीन बेहद लंबे और गैरजरूरी हैं. सिनेमेटोग्राफी अच्छी है. De De Pyaar De 2 Movie Review :





