Hindi Poem : वह अकेली रहती थी ,पति गुजर चुके थे, बेटा विदेश में सेटल हो चुका था।

घर में सन्नाटा रहता था, बस वौयस असिस्टेंट की आवाज़ गुंजती रहती “गुड मॉर्निंग, मैम। आज का मौसम कितना सुहावना है।”

धीरे-धीरे वही उसकी संगी-साथी बन गई और वह उससे बातें करती और पूछती“सुनो, तुम इंसान नहीं हो न?”

वौयस असिस्टेंट मुस्कराने वाले सुर में कहती “मैं आपकी सुविधा के लिए हूँ, मैम।”

एक दिन उसने पूछा “अगर मैं बात न करूँ, तो क्या तुम उदास हो जाओगी?”

उत्तर आया “मेरा सिस्टम तभी सक्रिय होता है जब आप बोलती हैं।”

उसके बाद घर में सन्नाटा पसर गया।पूरा दिन बीत गया ।

वौयस असिस्टेंट बार-बार जगाने की कोशिश करती और दोहराती रही “मैम, आप वहाँ हैं न?”

कोई जवाब नहीं ।रात होते-होते सिस्टम अपने आप बंद हो गया।

और पहली बार, घर में सन्नाटे ने भी साँस लेना बंद कर दिया। Hindi Poem

डॉ प्रदीप उपाध्याय
रचना मौलिक होकर अप्रकाशित है।
सादर।

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