खुश थी कि उसे भी कोई चाहने वाला मिल गया है. किन्नरों की जिंदगी में ऐसा कम ही होता है. किन्नरों के ऊपर पैसे फेंकने वाले तो बहुत होते हैं, मगर उन के ऊपर कोई अपना दिल फेंक दे, ऐसा कभी देखा नहीं. राजू एक आटोरिकशा ड्राइवर था. रानो रात के 10 बजे सहेलियों के साथ सड़क पर खड़ी थी. राजू की सांसें तेज चल रही थीं. उस से रानो का खुला हुआ कंधा देखा नहीं जा रहा था. वह गजब की खूबसूरत दिख रही थी. रानो अपनी सहेलियों से हंसहंस कर बातें कर रही थी. कुछ बातें राजू के कानों में भी पड़ रही थीं, मगर पता नहीं क्यों राजू उन बातों को सुनना नहीं चाह रहा था. उस की आंखों में इस वक्त रानो का गोरा कंधा घुसा हुआ था. स्ट्रीट लाइट की रोशनी में रानो की ड्रैस रहरह कर चमक जाती थी.

उस की ड्रैस पर ढेर सारे सितारे लगे हुए थे. रानो ने अपने बालों को खुला छोड़ रखा था. वह रहरह कर अपने बालों को कंधे के पीछे करती और कभीकभी अपनी छाती की ओर कर उंगलियों से अपनी लटों के साथ खेलती. राजू को पता नहीं था कि उस के आटोरिकशे में कौन जाने वाला है, मगर वह पूरे मन से यही चाह रहा था कि रानो उस की सवारी बन जाए. वैसा ही हुआ. रानो हंसती हुई राजू के आटोरिकशे में बैठ गई. राजू ने पहली ही नजर में उसे अपना दिल दे दिया था, एक लड़की समझ कर. लेकिन जब उसे पता चला कि रानो एक किन्नर है, तब भी वह उस की खूबसूरती के आगे सबकुछ भूल गया.

‘‘बहुत खूबसूरत लग रही हो,’’ राजू ने आटोरिकशे के साइड मिरर में देख कर रानो से कहा. यह सुन कर रानो हंस दी और बोली, ‘‘ऐसे मत देख पगले, प्यार हो जाएगा.’’ रानो ने राजू की हंसी उड़ाई, मगर उसे नहीं पता था कि राजू सच कह रहा है. वह तो पहले ही फंस चुका था उस के हुस्न के जाल में. रानो ने देखा कि राजू ने उस की बात का जवाब नहीं दिया, मगर बीचबीच में वह उसे देख जरूर रहा था. रानो ने महसूस किया कि राजू एक सीधासादा लड़का है. उस की नजर में फूहड़पन नहीं था. वह उसे ऐसे देख रहा था, जैसे कोई एक खूबसूरत लड़की को देखता है. रानो ने अपने मन में कुछ सोचा कि तभी होटल आ गया. आटोरिकशे से उतर कर रानो ने ड्राइवर को पैसे दिए. राजू ने देखा भी नहीं कि उस ने कितने पैसे दिए. उस ने एक हाथ में पैसे पकड़े और रानो को देखता रहा.

उसे रानो को कुछ पैसे वापस करने थे. रानो इंतजार कर रही थी, मगर उस ने देखा कि राजू उदास लग रहा है. रानो समझ गई. ‘‘कल 10 बजे वहीं आना, जहां से आज मुझे बैठाया है,’’ इतना कह कर रानो मुसकराते हुए होटल के अंदर चली गई. यह सुन कर राजू खुश हुआ कि रानो ने उसे कल भी बुलाया है. अगले दिन ठीक 10 बजे राजू उसी नुक्कड़ पर पहुंच गया, जहां से रानो उस के आटोरिकशे में बैठी थी. ‘‘चलो,’’ यह सुन कर राजू चौंक गया. उस ने पीछे मुड़ कर देखा, तो रानो उस के आटोरिकशे में बैठ चुकी थी. ‘‘किधर से आईं तुम? मैं तो सामने देख रहा था,’’ राजू थोड़ा खुल सा गया था आज. फिर उस ने आटोरिकशा स्टार्ट किया और साइड मिरर से उसे देखने लगा.

आज रानो ने बैंगनी रंग की ड्रैस पहनी हुई थी. वैसी ही मादक ड्रैस, जिसे देखते ही नशा चढ़ जाए. रानो मेकअप करती थी. वह छोटे से आईने में अपने मेकअप को देख रही थी. जल्दीजल्दी में आज वह ठीक से तैयार नहीं हो पाई थी, तभी उस की नजर राजू से टकरा गई. ‘‘सामने देख कर चलाओ…’’ रानो ने मुसकरा कर कहा. राजू समझ गया कि वह क्या कहना चाह रही थी. ‘‘तुम जैसी खूबसूरत लड़की साथ बैठी हो, तो नजर भटकेगी ही न,’’ राजू ने भी कह दिया. ‘‘क्यों मजाक उड़ा रहे हो. मैं लड़की नहीं हूं,’’ रानो के मन में जैसे कुछ चुभ सा गया था. ‘‘कम भी नहीं हो. कोई भी देखे, तो एकदम पगला जाएगा,’’ राजू ने अपनी बात कही. ‘‘मेरी तरफ से ध्यान हटाओ. मैं तुम्हारे किसी काम की नहीं,’’ रानो ने राजू को आगे बढ़ने से रोका. ‘‘तुम इतनी खूबसूरत हो कि मैं तुम्हारे लिए जिंदगीभर आटोरिकशा चला सकता हूं,’’ राजू बोला, तो रानो हंस दी. राजू ने उस के मन को छू लिया था.

अब रानो राजू के आटोरिकशे को ही अपने आनेजाने के लिए इस्तेमाल करती थी. राजू को अब कुछ की जगह बहुत सारे पैसे मिलने लगे. बड़ीबड़ी पार्टियों में उस का आनाजाना होने लगा. रानो के मना करने के बावजूद राजू नहीं माना और इस बात पर अड़ा रहा कि वह उस से प्यार करता है. उस दिन पता नहीं क्या हुआ. रानो होटल में गई, मगर कुछ ही देर में गुस्से से भरी हुई बाहर निकली. राजू का आटोरिकशा उसे वहीं खड़ा मिला. ‘‘तुम गए नहीं अब तक?’’ रानो ने आटोरिकशे में बैठते हुए गुस्से से कहा. ‘‘पता नहीं क्यों आज मन नहीं हुआ जाने का,’’ राजू बोला. ‘‘घर ले चलो,’’ आज रानो पहली बार इतनी जल्दी घर जा रही थी. आटोरिकशे से उतरने के बाद रानो अपनी बिल्डिंग में जाने लगी, तभी उस ने देखा कि राजू भी उस के पीछेपीछे आ रहा है. ‘‘तुम को घर नहीं जाना है क्या?’’ रानो ने पूछा. ‘‘नहीं, आज तुम्हारे पास रुकने का मन है.’’ ‘‘अच्छा…’’ कह कर रानो आगे बढ़ गई.

वह बड़े से घर में अकेले रहती थी. घर में घुसते ही रानो ने अपनी ड्रैस ऐसे उतारी, जैसे वह इस ड्रैस से खूब नाराज हो. उसे यह भी खयाल नहीं आया कि आज उस के साथ कोई और भी आया है. राजू बड़ीबड़ी आंखों से रानो को कपड़े उतारते देख रहा था. उस ने पीले रंग की ड्रैस पहनी थी, जो उस ने अभीअभी उतारी थी. अब उस के भरे हुए सीने पर काले रंग की ब्रा दिख रही थी, जिस से उस का हुस्न जितना ढका हुआ था, उस से ज्यादा दिख रहा था. यह देख राजू के मुंह में पानी आ गया. उस से रहा नहीं गया और उस ने रानो के पूरे जिस्म पर अपनी नजर दौड़ा दी. पूरी औरत तो लगती थी रानो. रानो सोफे पर ऐसे बैठ गई, मानो उसे राजू से कोई शर्म नहीं आ रही थी. ‘‘कुछ खाओगे?’’ पूछ कर रानो ने राजू का ध्यान भंग किया. राजू ने भी कह दिया, ‘‘हां.’’ राजू इस वक्त रानो की खुली जांघों को घूर रहा था, जो एकदूसरे पर चढ़ी हुई थीं. रानो को उस ने पहली बार इतना खुल कर देखा था. रानो की तरफ से कोई मनाही न देख उस का हौसला बढ़ गया और वह रानो के पास बैठ गया. रानो ने अपनी आंखें बंद कर लीं.

राजू ने उस के होंठों को अपनी उंगली से छुआ. फिर उस ने रानो के पूरे जिस्म को अपनी उंगली से छुआ. राजू को अपने पास पा कर रानो बहुत खुश थी. अब यह सिलसिला बहुत तेजी से आगे बढ़ने लगा. दोनों एकदूसरे की बांहों में घंटों पड़े रहते. अपने धंधे के बाद भी रानो अब खुश रहने लगी थी. उस का बड़ेबड़े अमीरों से वास्ता पड़ता था. बड़ेबड़े लोग भी अजीब शौक रखते हैं और ऐसे ही एक अजीब शौक को पूरा करने के लिए रानो जैसी किन्नरों की जरूरत पड़ती है. रानो बस कहने को किन्नर थी, वरना उस के हुस्न के आगे अच्छीअच्छी लड़कियां पानी भरें. यही वजह थी कि उसे उस के काम के औरों से ज्यादा पैसे मिलते थे. इतनी कम उम्र में उस ने इतना पैसा कमा लिया था कि उसे पैसे से अब कोई मोह नहीं रह गया था. मगर जब रानो पूरी तरह राजू के प्यार में गिरफ्त हो गई, तब राजू के मन में लालच आ गया. अब वह किसी न किसी काम के बहाने उस से पैसे मांगने लगा था. रानो ने पहले मना नहीं किया. राजू के ऊपर खूब पैसे लुटाए. मगर लालच का पेट इतना बड़ा होता है कि बड़े से बड़ा खजाना भी खाली हो जाए. फिर एक दिन रानो की दौलत भी कम पड़ गई.

रानो ने बहुत समझाया, मगर राजू को बात समझ नहीं आई. आखिर में रानो ने साफसाफ कह दिया कि अब वह पैसे नहीं दे सकती. मगर तब तक राजू के मन में शैतान आ चुका था. रानो के पास बहुत पैसा था और राजू उस के सारे भेद जान चुका था. राजू ने पूरी योजना बनाई और एक दिन रानो के पास पहुंचा और कहा कि उसे उस की बात समझ में आ गई है. रानो बहुत खुश हुई. दोनों में प्यार हुआ. इस के बाद उन्होंने खाना खाया. फिर प्यार हुआ. जब रानो एकदम मस्त हो गई, तब राजू ने उस की हसरत भी पूरी की. राजू ने रानो की पीठ सहलाते हुए उस के बालों को आगे की तरफ सरका दिया, जिस से रानो को अब फर्श के सिवा कुछ नहीं दिख रहा था. रानो के बाल बहुत घने थे. जब भी वह घर में बिना कपड़ों के रहती, अपने बालों को संवारती रहती. उसे आईने में अपने उभारों को देखना अच्छा लगता था. फिर लंबे काले बालों से अपने गोरेगोरे उभारों को ढकती थी.

कभीकभी तो राजू के सामने भी वह ऐसा करती थी. क्या करती, प्यार में पड़ गई थी न. रानो के शरीर में बस एक ही कमी थी कि वह औरत हो कर भी औरत नहीं थी. वह राजू को एक औरत का सुख देना चाहती थी. राजू ने रानो को महसूस नहीं होने दिया था कि वह एक किन्नर है. वह उसे एक लड़की की ही नजर से देखता था. रानो अब उस के सामने पूरी कोशिश करती कि एक लड़की ही दिखे. कपड़े भी उस ने शरीफ लड़कियों वाले खरीद लिए थे. जब वह राजू के साथ बाहर निकलती, तो सब देखते रह जाते. रानो ने राजू को अपना पति ही मान लिया था और उसे खुश रखने की भरपूर कोशिश करती थी.

आज भी रानो बहुत खुश थी कि राजू ने उस की बात मान ली है. पैसे की उस के पास कमी नहीं थी. वह बस राजू के मन से लालच दूर कर देना चाहती थी. इस वक्त भी रानो और राजू प्यार करने में मस्त थे. अपने घने बालों की वजह से रानो को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. तभी राजू ने जेब से चाकू निकाला और रानो की छाती में एक जोरदार वार किया. रानो चीखती हुई निढाल हो कर फर्श पर गिर पड़ी. थोड़ी देर में उस की मौत हो गई. घर में जितनी भी दौलत थी, राजू ले कर फरार हो गया.

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