सरिता विशेष

चारों ओर चहलपहल थी. खुशी का माहौल था. शहनाई के सुर माहौल में रस घोल रहे थे. इसी बीच शोर मचा कि बरात आ गई. दूल्हा कार से उतरा और उसे वरमाला के लिए बने स्टेज की ओर ले जाया गया. कुछ देर में दुलहन भी छमछम करते हुए स्टेज पर आई. लोग तालियां बजाने लगे. शहनाइयों की आवाज तेज हो उठी. दूल्हे ने दुलहन के गले में वरमाला डाली. दनादन हवाई फायरिंग होने लगी. बंदूकों और रायफलों की गोलियों से शामियाने में सैकड़ों छेद हो गए.

अचानक स्टेज के किनारे से चीख की आवाज उठी. एक बच्चा खून से सना जमीन पर गिर कर तड़पने लगा. चारों ओर चीखपुकार मच गई. शहनाइयां और गाजेबाजे बंद हो गए.

दरअसल, हवाई फायरिंग करने वालों में से किसी एक की गोली गलती से बच्चे को जा लगी थी. लोग घायल बच्चे को उठा कर अस्पताल ले जाने के लिए भागे. कुछ देर पहले तक खुशी का माहौल अचानक मातम में बदल गया. कुछ लोगों ने पुलिस को खबर कर दी. आननफानन शादी की रस्मों को 10-12 मिनटों में खत्म कराया गया. पुलिस दूल्हे के फूफा को गिरफ्तार कर के ले गई. उसी की बंदूक से निकली गोली से बच्चा जख्मी हुआ था.

इसी तरह 7 दिसंबर, 2016 को पंजाब के भटिंडा शहर में शादी के समारोह में डांस का प्रोग्राम चल रहा था.  उसी दौरान कुछ नौजवान अपनी बंदूकों से हवाई फायरिंग भी कर रहे थे.

इसी बीच स्टेज पर डांस कर रही लड़की को एक गोली जा लगी और वह चीखते हुए खून से लथपथ हो कर गिर पड़ी. उस ने मौके पर ही दम तोड़ दिया. 25 साल की उस डांसर का नाम कुलविंदर कौर था और वह पेट से भी थी. पुलिस ने गोली चलाने वाले को दबोच लिया. बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब जैसे राज्यों में शादीब्याह में हवाई फायरिंग करने का पुराना फैशन है. ऐसी फायरिंग की वजह से कइयों की जान जाने और जख्मी होने के बाद भी लोग इस से बाज नहीं आ रहे हैं. प्रशासन और पुलिस भी ऐसे जानलेवा फैशन पर रोक लगाने को ले कर खासा गंभीर नहीं हैं.

दरअसल, हवाई फायरिंग करने का मकसद खुशी जताने के साथसाथ दबंगों का आसपास के इलाकों के गरीबों और दलितों के बीच डर का माहौल बनाना भी होता है. बिहार पिछड़ा वर्ग महासंघ के संयोजक किशोरी दास कहते हैं कि अगड़ी जातियों में जो दबंग टाइप के लोग होते हैं, वे बंदूक, रायफल से गोलियां चला कर या तलवारें भांज कर निचली जातियों के लोगों में खौफ पैदा करते हैं  वे आगे बताते हैं कि पटना शहर के लोहानीपुर महल्ले में मुसहरों की पुरानी और बड़ी बस्ती है. उस के आसपास कुछ अगड़ी जाति के दबंगों ने ऊंचीऊंची इमारतें बना ली हैं. उन इमारतों के चारों ओर 10-12 फुट ऊंची चारदीवारी खड़ी की गई है. अंदर क्या होता है, इस का पता बाहर वालों को नहीं लगता है.

चारदीवारी के अंदर भी अजीब सा माहौल बना कर रखा जाता है. 5-7 दिनों में वहां के कुछ लोग अपनीअपनी छतों पर जा कर हवाई फायरिंग करते हैं. इस से पूरी बस्ती में खौफ का माहौल बना रहता है. शादी वगैरह के मौके पर तो अंधाधुंध फायरिंग की जाती है. किसी से इस बात की शिकायत भी नहीं की जा सकती. उन के जलसों में मंत्री, नेता, अफसर और पुलिस वाले ही मेहमान होते हैं. ऐसे में दलितों की शिकायत पर कितनी कार्यवाही होगी, इस का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है. दलित पिछड़ों पर रोब गांठने के लिए बंदूक, रायफल और पिस्तौल से हवाई फायरिंग की जाती है. दूल्हे के रिश्तेदार दनादन हवाई फायरिंग कर खुशियां जताते हैं, जबकि हकीकत में वे आसपास के गरीबों और दलितों के बीच खौफ पैदा करना चाहते हैं, ताकि दलित हर समय उन से सहम कर रहें. उन से बात करने की जुर्रत नहीं कर सकें. उन की बदमाशियों और शोषण के खिलाफ आवाज न उठा सकें.

शादी समारोहों में खुशी और ताकत जाहिर करने के लिए गोलियां चलाने का एक दर्दनाक वाकिआ देश की राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा शहर में हुआ था. 18 फरवरी, 2010 को नोएडा के सैक्टर 10 में एक शादी समारोह में हवाई फायरिंग तब हुई, जब शादी की रस्में खत्म हो चुकी थीं. दुलहन की विदाई की तैयारी चल रही थी. इसी बीच दूल्हे के फूफा ने खुशी जताने के लिए हवाई फायरिंग की, लेकिन गोली सीधे दूल्हे के सीने में जा लगी और उस ने मौके पर ही दम तोड़ दिया.

ताजा मामला उत्तराखंड के जसपुर इलाके का है, जहां 5 दिसंबर, 2016 को बरातियों द्वारा हवाई फायरिंग करने से 2 लोग घायल हो गए थे. उन्हें आननफानन प्राइवेट अस्पताल में भरती कराया गया था. पुलिस में केस दर्ज नहीं किया गया था, क्योंकि गोली चलाने वाले भी अपने थे और जिन्हें गोली लगी थी, वे भी रिश्तेदारों में ही थे. पुलिस इस मसले पर कहती है कि हथियारों का गलत इस्तेमाल होने पर  आर्म्स ऐक्ट की धारा-17 और धारा-30 के तहत लाइसैंस रद्द किया जा सकता है. आरोपी को 3 साल की कैद और जुर्माने की सजा मिल सकती है. गोली चलाने पर किसी की मौत हो जाने पर धारा-304 के तहत एफआईआर दर्ज की जाती है. इस के तहत गैरइरादतन हत्या का केस दर्ज होता है. इस मामले में 10 साल की सजा या फिर ताउम्र कैद हो सकती है. शादी या फिर किसी भी तरह के समारोह में हथियार ले कर जाने पर बैन लगना चाहिए. हालांकि केंद्र सरकार ने इस तरह का बैन लगाने का निर्देश सभी राज्य सरकारों को दिया है, इस के बाद भी इस पर रोक नहीं लग पा रही है.  

गोलियां चलानी हैं तो शादी में मत आओ

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बड़ौत थाने के वाजिदपुर गांव के फौजी रह चुके एक शख्स सुभाष कश्यप ने शादियों में गोलियां बरसाने वाले लोगों के गाल पर करारा तमाचा जड़ा था.

उन्होंने अपनी शादी के कार्ड में अनोखी चेतावनी छाप कर लोगों का दिल जीत लिया था. उन्होंने उस कार्ड में वैवाहिक कार्यक्रमों के साथसाथ यह भी छापा था, ‘शादी में फायरिंग और शराब के सेवन पर पूरी तरह से पाबंदी है. जो लोग फायरिंग करना चाहते हैं और शराब पीना चाहते हैं, ऐसे लोगों से निवेदन है कि वे शादी में शामिल नहीं हों…’ शादी के मजे को किरकिरा बनाने वालों ने वहां न जाने में ही अपनी भलाई समझी.