फिल्म रूस्तम के प्रदर्शन के साथ ही बौलीवुड में हर तरफ फिल्म के निर्देशक टीनू सुरेश देसाई की काबीलियत की ही चर्चा हो रही है. मजेदार बात यह है कि टीनू सुरेश देसाई के पिता सुरेश देसाई ‘जी पी सिप्पी फिल्मस’ में ‘शोले’ व ‘शान’ से लेकर ‘अकेला’ तक कई फिल्मों में बतौर प्रोडक्शन मैनेजर काम कर चुके हैं, मगर टीनू सुरेश देसाई ने प्रोडक्शन में हाथ आजमाने की बजाय निर्देशन के क्षेत्र में काम करने की इच्छा के साथ बौलीवुड में कदम रखा.

टीनू ने रमेश सिप्पी, कुक्कू कोहली व राहुल रवैल के साथ बतौर सहायक निर्देशक काम किया. जबकि रूमी जाफरी, अब्बास मस्तान, विक्रम भट्ट और नीरज पांडे के साथ बतौर एसोसिएट निर्देशक काम किया. उसके बाद नीरज पांडे ने उन्हें स्वतंत्र निर्देशक के रूप में अनुबंधित किया. पर अच्छी कहानी की तलाश में दो साल का वक्त लग गया. इस बीच टीनू दसाई ने विक्रम भट्ट की फिल्म ‘1920’ के सिक्वअल ‘1920 लंदन’ निर्देशित की. कुछ वजहों से यह फिल्म बीच में लटकी रही, पर अंततः 6 मई 2016 को यह फिल्म रिलीज हुई.

1920 लंदन के प्रदर्शन से पहले ही टीनू सुरेश देसाई ने रूस्तम की शूटिंग पूरी कर ली थी. यह फिल्म अब प्रदर्शित हुई है. अपनी अब तक की यात्रा पर रोशनी डालते हुए ‘सरिता’ पत्रिका को टीनू देसाई ने बताया, ‘मेरे पिता फिल्मों से जुडे़ हुए थे. इसलिए कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही मैं बतौर सहायक निर्देशक फिल्मों से जुड़ गया था. मैंने सबसे पहले रमेश सिप्पी के साथ बतौर रनर निर्देशक सीरियल ‘किस्मत’ में काम किया. फिर रजत रावल के साथ दो फिल्में, रवि चोपड़ा के साथ ‘महाभारत 2’ तथा राहुल रवेल के साथ ‘अर्जुन पंडित’ में बतौर सहायक निर्देशक काम किया. इसके बाद कुक्कू कोहली के साथ ‘अनाड़ी नंबर वन’, रूमी जाफरी के साथ ‘गॉड तूस्सी ग्रेट हो’ और ‘लाइफ पार्टनर’, विक्रम भट्ट के साथ ‘शापित’ और नीरज पांडे के साथ ‘स्पेशल 26’ बतौर एसोसिएट निर्देशक काम किया. फिर मैंने ‘1920 लंदन’ का निर्देशन किया. यह फिल्म कई साल तक रूक गयी थी. मगर मुझे स्वतंत्र निर्देशक के रूप में नीरज पांडे ही लॉंच करना चाहते थे, पर हमें अच्छी कहानी नही मिली, इसलिए मामला अटका रहा. 1920 लंदन के रिलीज होने से पहले ही मैंने फिल्म रूस्तम की शूटिंग पूरी कर ली थी.’

टीनू देसाई कई दिग्गज फिल्मकारों के साथ काम किया है. पर वह मौलिक काम करना चाहते हैं. इस संबंध में उन्होंने कहा, ‘मैंने दिग्गज निर्देशकों के साथ काम करते हुए उनसे बहुत कुछ सीखने की कोशिस की. पर मेरी यह कोशिश रही है कि मैं कुछ नया करूं. मेरी फिल्म देखते समय कही किसी को किसी की छाप नजर आए, तो मैं कुछ कह नहीं सकता. क्येंकि मुझे खुद नहीं पता कि किस निर्देशक से मेरे अंदर क्या बात आयी है, जिसका उपयोग मैं अपनी फिल्म में कर रहा हूं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘कुक्कू कोहली को संगीत की समझ बहुत अच्छी है. स्व. रवि चोपड़ा जी बहुत विनम्र थे. वह सेट पर सभी को सम्मान देते थे. पारिवारीक माहौल होता था. राहुल रवेल तो जीनियस हैं, उनकी याद्दाश्त की दाद देनी पड़ेगी. रूमी जाफरी बहुत अच्छे लेखक हैं, तो उनसे मुझे लेखन की समझ आयी. अब्बास मस्तान के साथ एक अच्छी थ्रिलर फिल्म बनाना और पेपर वर्क करना सीखा. नीरज पांडे का अपनी अलग स्टाइल है. उनकी फिल्मों में रोमांच के साथ-साथ यथार्थ होता है.’

सिनेमा के बदलाव पर उन्होंने कहा, ‘परिवर्तन संसार का नियम है. परिवर्तन हमेशा अच्छे के लिए ही होता है. सिनेमा में जो बदलाव आ रहे हैं, उसकी वजह से ही अब नयी तरह की फिल्में बन रही हैं. मैं  आपको यश चोपड़ा जी का उदाहरण देना चाहूंगा. वह समय के साथ खुद को बदलते रहते थे. उनकी फिल्मों में वह बदलाव नजर आता रहा है, जिसकी वजह से उनकी फिल्में हिट रही हैं.’

टीनू देसाई ने अभिनेता अक्षय कुमार की तारीफ करते हुए कहा, ‘वही काफी समझदार हैं. उन्हें पटकथा की काफी अच्छी समझ है. वह कभी दुविधा में नहीं रहते. वह हमेशा अपने गट्स के आधार पर काम करते हैं और एक बार जो निर्णय ले लेते हैं, उससे पीछे नहीं हटते. वह अपने हर काम को बेहतर तरीके से करने में यकीन करते हैं. मेहनती हैं,इसलिए रिस्क उठाते हैं और उन्हें फायदा होता है.’

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