सिनेमा में कलाकार की ईमेज बहुत मायने रखती है. कहने के लिए कलाकार इस बात से इंकार करता रहता है. पर हर कलाकार किसी न किसी ईमेज के अंदर ही हमेशा कैद रहता है. उसी ईमेज के अनुरूप किरदार निभाते हुए वह अपना करियर आगे बढ़ाता रहता है. मगर राधिका आप्टे ने बार बार अपनी ईमेज बदलती आ रही हैं. उनकी इस ईमेज का खामियाजा तमिल फिल्म ‘‘उला’’ के निर्माता को भुगतना पड़ रहा है. जी हां! अब तक चालीस फिल्मों में अभिनय कर अंतरराष्ट्रीय ख्याति बटोर चुकी राधिका आप्टे की ईमेज एक ‘नेक्स्ट डोर गर्ल’ की रही है. फिल्म ‘उला’ में भी उन्होने इसी तरह का किरदार निभाया है. लेकिन 2015 में ‘बदलापुर’, हंटर’ जैसी फिल्मों के अलावा लघु फिल्म ‘आहिल्या’ में अति बोल्ड व सेक्सी किरदार निभाने के अलावा सेक्स पर बेबाक बयानबाजी के चलते उनकी ईमेज ऐसी बदली कि फिल्म ‘उला’ के निर्माता परेशान हैं. पर खुद राधिका आप्टे इस बात से सहमत नहीं हैं. वह तो पवन कृपलानी निर्देशित फिल्म ‘‘फोबिया’’ को लेकर ही उत्साहित हैं. जिसमें उन्होने ‘‘अग्रो फोबिया’’ से पीडि़त लड़की का किरदार निभाया है.

हाल ही में जब उनसे हमारी मुलाकात हुई तो हमने उनसे पूछा कि क्या उन्हें नही लगता कि एक कलाकार होने के नाते उनकी इमेज का असर दूसरी फिल्मों पर भी पड़ता है? तो राधिका आप्टे ने बड़ी साफगोई के साथ कहा कि,‘‘मुझे ऐसा नहीं लगता.’’

हमने उनसे कहा कि ,‘‘आपने दक्षिण की फिल्म ‘उला’ में गर्ल नेक्स डोर का किरदार निभाया. उसके बाद आपने एक लघु फिल्म ‘आहिल्या’ में जिस तरह से बोल्ड व सेक्सी किरदार निभाया, उससे ‘उला’ के निर्माता परेशान हैं?’’ इस पर राधिका आप्टे ने कहा- ‘‘उनकी परेशानी मेरी समझ से परे है. दर्शक हर कलाकार को हर फिल्म में अलग अंदाज में देखना पसंद करता है. मैंने ‘उला’ की शूटिंग तीन साल पहले खत्म की थी. उन्होंने पिछले तीन साल से अब तक इस फिल्म को रिलीज नहीं किया. वह रिलीज क्यों नहीं करना चाहते, मुझे पता नहीं. मैने उनसे फिल्म के रिलीज के बारे में कभी कोई सवाल नहीं किया. जबकि मेरी लघु फिल्म ‘आहिल्या’ छह माह पहले आयी थी. ‘आहिल्या’ के बाद प्रदर्शित फिल्म ‘‘मांझी द माउंनटेन मैन’ में दर्शकों ने मुझे काफी पसंद किया. यहां तक कि ‘आहिल्या’ के बाद ही मेरी फिल्म ‘कौन कितने पानी में’ रिलीज हुई. यह फिल्म भले ना चली हो, पर इस फिल्म में भी दर्शकों ने मुझे बहुत पसंद किया. इस फिल्म का किरदार भी काफी हद तक ‘गर्ल नेक्स्ट डोर’ वाला ही था.’’