सांप्रदायिक ताकतों को सत्ता में आने से रोकने के लिये कांग्रेस बिहार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी महागठबंधन तैयार करने के करीब पहुंच गई है. कांग्रेस-सपा के बीच गंठबधन का यह फार्मूला कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा नेता अखिलेश यादव की सहमति के बाद प्रशांत किशोर ने तैयार किया है. इस फार्मूले को प्रशांत किशोर ने मुलायम सिंह यादव और अखिलेश से एक साथ बैठ कर तैयार किया था. कांग्रेस को सपा में झगड़े के खत्म होने का इंतजार था. सपा की लड़ाई के सुलझते ही कांग्रेस ने फार्मूला लागू करने की हरी झंडी दे दी है.

सपा और कांग्रेस के नेता इस फार्मूले को अमली जामा पहना देंगे. लखनऊ में सपा से मिली जानकारी से पता चलता है कि सपा प्रमुख मुलायम भी इसके पक्ष में हैं. इस वजह से पार्टी के विवाद को खत्म कर दिया गया. उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के पास सपा से बड़ा और भरोसेमंद कोई दूसरा साथी नहीं था. जानकारों का दावा है कि कांग्रेस-सपा गठबंधन से मायावती और भाजपा के बीच चुनावी रणनीति बन सकती है. जिसके चलते मायावती कुछ सीटों पर ऐसे उम्मीदवार उतार सकती हैं, जिससे सपा-कांग्रेस गठबंधन को नुकसान हो जाये. आने वाले दिनों में बसपा प्रत्याशियों को बदलने का काम कर सकती है.

असल में सपा की तरह की कांग्रेस में भी कई नेता प्रंशात किशोर की अगुवाई को सहन नहीं कर पा रहे थे. राहुल गांधी की ‘खाट सभा’ और वाराणसी में सोनिया गांधी की सफल रैली से पीके और कांग्रेस के नेताओं में खींचतान शुरू हो चुकी थी. ऐसे में कांग्रेस हाईकमान ने फौरी तौर प्रशांत किशोर को पीछे कर कांग्रेस के लकदक नेताओं को आगे कर दिया. जिससे इनका अहम संतुष्ट होता रहे. अंदरखाने प्रशांत किशोर अपनी योजना पर काम करते रहे. प्रशांत किशोर के लिये सबसे खराब समय वह था जब उनकी मुलायम अखिलेश से एक साथ बात हुई. प्रशांत किशोर की बात का विरोध कांग्रेस के बड़े नेताओं ने बयान दे कर शुरू कर दिया.

पूरी रणनीति को नुकसान न हो इस कारण प्रशांत किशोर ने खुद को पीछे कर लिया. इससे यह संदेश गया कि सपा-कांग्रेस गठबंधन नहीं होगा. उस घटना के बाद यह भी तय हो चला था कि समाजवादी पार्टी का विवाद भी बढ़ेगा और सपा दो धड़ों में टूट जायेगी. बहुजन समाज पार्टी और भाजपा के लिये यह सबसे मुफीद था. बसपा ने मुसलिम प्रत्याशी को ज्यादा टिकट देकर नया समीकरण बनाने का काम किया. कांग्रेस को लग रहा था कि मायावती का यह कदम भाजपा के पक्ष में वोटो का धुव्रीकरण कर सकता है.

ऐसे में कांग्रेस हर हाल में सपा की एकजुटता के लिये पहल कर रही थी. राहुल अखिलेश के साथ ही साथ अंदर खाने डिपंल यादव और प्रियका गांधी भी सक्रिय हो गई. इसके बाद कांग्रेस और सपा के लोग भी इस गठबंधन के पक्ष में जुटने लगे. सपा में विवाद थमने के साथ ही साथ सब वापस फार्मूले की राह पर चलने लगा है. कांग्रेस-सपा के साथ लोकदल, जदयू और दूसरे छोटे दल भी गठबंधन की राह पर साथ चलने को तैयार हो गये. कांग्रेस किसी भी तरह से उत्तर प्रदेश की सत्ता को भाजपा से दूर रखना चाहती है. ऐसे में वह हर समझौते को तैयार है. कांग्रेस के जो नेता इसका विरोध कर  रहे थे उनको दरकिनार कर दिया गया है.