राजनीति में हास्यव्यंग्य की हमेशा से बहार रही है. इस देश में राजनीतिबाजों ने कुछ और दिया हो या नहीं, जनता को हंसाने की भरपूर सामग्री दी है. राजनीतिबाजों पर काफी अधिक जोक, व्यंग्य लिखे जाते रहे हैं. लोग राजनेताओं पर बने चुटकुले खूब मजे से सुनतेसुनाते हैं. नेताओं की खामियों से ले कर छोटेबड़े तमाम मुद्दों पर जोक बने हैं. चुनावों के दौर में तो चुटकुलों के माध्यम से हंसीठिठोली की बयार बहने लगती है. लेखकों, कार्टूनिस्टों, व्यंग्यकारों के लेखन से ले कर सोशल मीडिया तक पर नेताओं पर चुटकुले लोगों को खूब हंसा रहे हैं.

व्यंग्य कसने वाले किसी भी नेता को बख्शते नहीं दिखाई देते. वे प्रधानमंत्री से ले कर विपक्षी नेताओं की हंसी उड़ाने में लगे हुए हैं. नेहरू से ले कर मनमोहन सिंह तक हास्य के तीर झेलते रहे हैं, अब मोदी भी फेस कर रहे हैं. इस समय नेताओं को ले कर चुटकुलों का सब से बड़ा अड्डा सोशल मीडिया बना हुआ है जहां हर पार्टी, हर पद पर बैठे नेता को निशाना बनाया गया है. इन दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल, मनमोहन सिंह, भाजपा में ताजा शामिल हुईं किरण बेदी को ले कर मजेदार चुटकुले प्रचलित हैं.

नेताओं पर हंसीमजाक अकसर किसी के ज्ञान, किसी के स्वभाव, भ्रष्टाचार, झूठ, धोखा, बेईमानी, लापरवाही, निकम्मेपन, बेवकूफियों, मूर्खता, लालच और धार्मिक कट्टरता व पोंगापंथी जैसे विषयों को ले कर उड़ाए जाते हैं. इन पर गढे़ गए जोक्स लोगों को खूब गुदगुदाते हैं तो कुछ नेताओं को आईना दिखाते हैं. आइए, कुछ बानगी देखते हैं-

‘हर चीज में कमियां ढूंढ़ता है,
ऐ दिल कहीं तू केजरीवाल तो नहीं.’

एक और देखिए-

‘यदायदा हि ‘धरना’ स्य,
ग्लानिर्भवति भारत:,
‘अभ्युत्थानं ‘अधरना’ स्य
केजरीवाल सृजाम्यहं.’

अर्थात, जबजब भारत में धरने कम होंगे, केजरीवाल पैदा होंगे.

इन दोनों चुटकुलों में अरविंद केजरीवाल के स्वभाव को हंसीमजाक के जरिए जाहिर किया गया है. केजरीवाल बातबात पर धरना देने के लिए मशहूर हो गए हैं और सरकारी, राजनीतिक व्यवस्था में खामियां ढूंढ़ना उन की फितरत दिखती है, इसलिए केजरीवाल पर बने चुटकुले बहुत लोकप्रिय हो रहे हैं.

केजरीवाल के मफलर और खांसी को ले कर भी टैलीविजन चैनलों पर मिमिक्री की जा रही है.

इधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वादे को ले कर भी उन्हें चुटकुलों के जरिए आड़े हाथों लिया गया है. किस तरह, देखिए-

‘एक व्यक्ति ने बैंक से लोन लिया था और वह चुका नहीं रहा था. बैंक वाले उस के पास उगाही के लिए गए तो उस व्यक्ति ने कहा, थोड़े दिन और रुक जाइए, मेरे खाते में 15 लाख रुपए आने ही वाले हैं. इन में से आप अपने काट लेना. इस पर बैंक वाले बोले, हमें आप पर भरोसा नहीं है. व्यक्ति बोला, मुझ पर तो भरोसा नहीं है पर कम से कम देश के प्रधानमंत्री पर तो भरोसा करिए.’ मोदी ने लोकसभा चुनावों के दौरान कालाधन वापस लाने का वादा किया था और चुनावी रैलियों में लोगों से कहते थे कि विदेशों में इतना कालाधन है कि हरेक भारतीय के खाते में 15-15 लाख रुपए जमा होंगे.

इसी तरह कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की समझ को ले कर खूब जोक चल रहे हैं.

‘राहुल गांधी पूछते हैं, मंगलयान को इतनी दूर क्यों भेजा गया? रामपुर के जंगलों में ही भेज देते. इस पर सोनिया गांधी कहती हैं, जंगल में? राहुल बोले, हां, जंगल में ही मंगल होता है न.’

एक और चुटकुला देखिए-

‘राहुल गांधी और उमर अब्दुल्ला झारखंड और जम्मूकश्मीर के चुनावों के बाद मिले तो राहुल ने पूछा, अब तुम क्या करोगे? उमर ने कहा, वही जो तुम पिछले 10 महीने से कर रहे हो. राहुल बोले, अच्छा तो चल फिर छोटा भीम और डोरेमौन देखते हैं.’

एक चुटीला चुटकुला और देखिए-

‘सुना है राहुल गांधी को कांग्रेस का सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना जाएगा. कांग्रेसी इस के बाद भले ही देशभर में मोतीचूर के लड्डू बांटें पर यह तय है कि हलवाई के पैसे का भुगतान तो भाजपा ही करेगी.’

आजकल राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष बनाने की बात चल रही है और माना जा रहा है कि इस के बाद बंटाधार तय है.

हर हिंदू महिला द्वारा 5 बच्चे पैदा करने को ले कर मजाक जारी है. भाजपा सांसद और हिंदूवादी नेता साक्षी महाराज ने हिंदू औरत को 5 बच्चे पैदा करने की बात कही थी. विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण तोगडि़या 10 बच्चों की नसीहत दे रहे हैं. इसी विषय पर आम आदमी पार्टी को छोड़ कर हाल में भाजपा में आईं शाजिया इल्मी पर सोशल मीडिया पर जोक चल रहा है-

‘मुझे तो 10 बच्चों की बात भा गई, इसलिए मैं बीजेपी में आ गई-शाजिया इल्मी.’

इसी को ले कर नारे भी गढ़ लिए गए हैं, ‘अब की बार, मोदी सरकार, हर औरत के बच्चे चार.’

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह द्वारा इस उम्र में एक युवा टैलीविजन एंकर से की गई शादी पर कई जोक जनता में लोकप्रिय हैं. इन में एक है-

‘केजरीवाल ने ‘नायक’ फिल्म को गंभीरता से देखा. मनमोहन सिंह ने ‘पुष्पक’ फिल्म को और दिग्विजय सिंह ने ‘चीनी कम’ फिल्म को अधिक गंभीरता से देखा.’

मनमोहन सिंह शासन के घोटालों और उन की सोनियाभक्ति पर भी व्यंग्यबाज उन्हें आईना दिखाने से नहीं चूके-

‘मनमोहन सिंह जब अपनी आत्मकथा लिखेंगे तो उस का शीर्षक होगा, 3 मिस्टेक्स औफ माई लाइफ,  2जी, 3जी और सोनियाजी.’

दलबदल और सिद्धांत परिवर्तन पर किरण बेदी को निशाने पर लिया गया है, ‘अन्ना हजारे, आप भ्रष्टाचार को खत्म करो, आंदोलन जारी रखो, मैं बीजेपी में हो कर आती हूं.’

इन्हीं पर एक और चुटकुला है-

‘जब कोई नौनवेज से दूर रहने का उपदेश देने वाला संत आदमी केएफसी में बटरचिकन खाने जाता है तो वह किरण बेदी कहलाता है.’

 भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी पिछले काफी समय से रुष्ट नजर आते हैं. इसी को ले कर किसी ने सोशल मीडिया पर लिखा है, ‘जब आडवाणीजी पैदा हुए तो डाक्टर ने कहा कि रूठा हुआ बालक पैदा हुआ है.’

राजनीतिबाजों पर जोक बहुत पहले से चले आ रहे हैं. जवाहर लाल नेहरू पर उन के जमाने में चुटकुले चलते थे. अखबारों में वे कार्टूनिस्टों के निशाने पर होते थे. लेकिन नेहरू उन कार्टूनों पर हंसते थे और कार्टूनिस्टों को बुला कर प्रोत्साहित करते थे कि वे इसी तरह उन की खामियां बताते रहें. राजीव गांधी की नासमझी पर भी जोक बड़े पौपुलर रहे हैं. एक बार राजीव गांधी किसानों की सभा को संबोधित कर रहे थे. उन दिनों देश में लालमिर्च की कमी चल रही थी, भाव आसमान छू रहे थे. इस पर राजीव गांधी किसानों से कह बैठे कि आप लोग हरीमिर्च की जगह लालमिर्च की बुआई अधिक करें तो यह कमी दूर हो सकती है.

देश के प्रधानमंत्री की इस समझ पर जनता के बीच हंसी छूटी और खूब तालियां बजीं पर फिर भी राजीव गांधी समझे कि उन्होंने किसानों और जनता के भले की कोई बहुत बढि़या बात कह दी है.

राजनीतिक चुटकुलों की चाहत जनता में बहुत बढ़ रही है. कई चुटकुले तो नेताओं में तिलमिलाहट उत्पन्न करने वाले होते हैं. जनता से किए वादे जब वे निभा नहीं पाते तो लोग व्यंग्य के बाण मारने से परहेज नहीं करते. असल में राजनीतिबाजों पर इस तरह के जोक्स उन की आंख खोलने के लिए काफी होते हैं. यह बात और है कि उन की आंख न खुले पर जनता के लिए ये चुटकुले किसी हथियार की तरह काम करने वाले होते हैं. सोशल मीडिया में नेताओं पर ऐसे बहुत तीर चलाए जा रहे हैं. नेताओं पर जब किसी का वश न चलता हो तो उन पर व्यंग्यबाणों की बरसात करें. यह उन से बदला लेने का एक स्वस्थ साधन है. लोग चुटकुले हंसीमजाक के जरिए नेताओं को उन का फर्ज याद दिलाते रहते हैं. कई जोक तो बहुत उद्देश्यपूर्ण होते हैं.

इंटरनैट पर लगातार आ रहे व्यंग्यबाणों ने यह तय कर दिया है कि हर नेता को आईना दिखाना है. नेता लोग आमतौर पर खुद का मजाक उड़ाया जाना पसंद तो नहीं करते पर बड़ी संख्या में आम लोग उन की कमियों पर हंसहंस कर लोटपोट होते रहते हैं. ऐसे चुटकुलेबाजों का कहना है कि हंसने पर कोईर् रोकटोक नहीं है. हंसने के लिए कोई कानून भी नहीं है. हंसने पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता. हंसीमजाक के रूप में कही गई बातों की पहुंच बहुत व्यापक और संवेदनाओं के विभिन्न स्तरों को छूने वाली होती है. यह अच्छी बात है कि हमारे राजनीतिबाज चुटकुलों का बुरा नहीं मानते. इस हिसाब से देश के राजनीतिबाजों में कम से कम इस मामले में एक परिपक्वता है जो बहुत आवश्यक है.

राजनीति और राजनीतिबाजों पर तमाम तरह के चुटकुलों को ले कर एक प्रश्न यह है कि क्या समाज उन का मजाक बना कर उन्हें महत्त्वहीन बना रहा है? नहीं, इस का मकसद लोगों को राजनीति और नेताओं से विमुख करना नहीं, उन्हें रास्ता दिखाना है. गंभीरता से कही गई कोई बात यदि हंसीमजाक के माध्यम से कही जाए तो वह ज्यादा प्रभावी मानी जाती है. समाज में हास्यबोध का होना बहुत जरूरी है. जो समाज हास्यबोध से सराबोर है उस में छोटीमोटी बातों पर लड़ाई, झगड़े, कलह बहुत कम होते हैं. ऐसा परिवार जहां बातबात में हास्य के फौआरे छूटते हैं उस में वास्तविक आनंद और जिंदादिली होती है.

लेकिन अब समाज, परिवार में हास्य हाशिए पर खिसकता जा रहा है. अब बहुत कम लोग रह गए हैं जो खुद की बेवकूफियों पर हंसते हैं. खुद का मजाक उड़ाना सब से बड़ा काम है, औरों का मजाक तो कोई भी बना लेता है. हमारे नेताओं में अब बिरला ही कोई है जो अपनी खामियों को सार्वजनिक तौर पर बखान कर जनता को हंसाता है. राजनीतिबाजों ने जनता को और कुछ दिया हो या न, पर हंसने के लिए उन की बेशुमार खामियां उपलब्ध हैं. नेताओं पर चुटकुले स्वस्थ, मर्यादित और उन की आंखें खोलने वाले हैं, यह सकारात्मक बात है.