क्या याद कर के रोऊं कि कैसा शबाब था

कुछ भी न था हवा थी कहानी थी शबाब था.

अब इत्र भी मलो तो तकल्लुफ की बू कहां

वो दिन हवा हुए जब पसीना गुलाब था.

एक मशहूर शायर की गजल के ये 2 शुरुआती शेर एकसाथ कई बातें बताते हैं.

पहली, गुलाब की महक की पसीने से (जाहिर है माशूका के) तुलना और दूसरी, इत्र का इस्तेमाल है जो अब न के बराबर होता है.

आज जमाना परफ्यूम और डियोड्रैंट का है जो कई तरह की गंध और खुशबुओं में इतनी आकर्षक पैकिंग में मिलते हैं कि खरीदने गया शख्स चकरा जाता है कि कौन सा परफ्यूम खरीदा जाए कि लोग उस के कायल हो जाएं. ताजा महक, समुद्र के ताजे पानी की महक की है लेकिन गुलाब और दूसरे फूलों वाले परफ्यूम की पूछपरख भी कम नहीं हुई है.

फिलहाल परफ्यूम इंडस्ट्री सुनहरे दौर से गुजर रही है, क्योंकि परफ्यूम अब सभी लोग इस्तेमाल करते हैं. इस से जाहिर होता है कि लोग महकते रहने की अहमियत समझने लगे हैं. हर कोई शरीर से आती बदबू से नजात पाना चाहता है.

कब, किस मौके के लिए कौन सा परफ्यूम इस्तेमाल करना ठीक रहेगा, इस का कोई तयशुदा पैमाना नहीं है और न ही अधिकतर खरीदार जानते हैं कि एक अच्छे परफ्यूम की विशेषताएं क्या होती हैं और उन्हें खरीदते व इस्तेमाल करते वक्त क्या एहतियात बरतनी चाहिए. आइए इस बारे में जानें ताकि पसीने की बदबू दूसरों को नाक सिकोड़ने को इतना मजबूर न कर दे कि आप मुंह छिपाने की कोशिश करते नजर आएं.

दिखाएं खरीदते वक्त स्मार्टनैस

हर कोई इस्तेमाल करने से पहले खुद परफ्यूम की महक जान लेना चाहता है. आमतौर पर लोग पैकिंग खोल कर परफ्यूम की बोतल सूंघ कर देखते हैं या फिर विक्रेता इजाजत दे तो उसे अपने ऊपर इस्तेमाल कर के देखते हैं.

ये तरीके  बहुत ज्यादा कारगर साबित नहीं होते हैं, क्योंकि कई बार दुकान पर जो सुगंध महसूस हुई थी वह घर आने के बाद हवा हो गई लगती है, फिर सिवा झल्लाने और पछताने के कुछ नहीं रह जाता. बेहतर यह होता है कि परफ्यूम को अपने रूमाल या फिर शरीर के किसी खुले हिस्से पर स्प्रे करें. इस के बाद लगभग 15 मिनट बाद देखें, यदि अब भी वही महक कायम है तो परफ्यूम खरीदने लायक है.

पैकिंग की खूबसूरती देख कर महक का अंदाजा लगाने की गलती कतई न करें, न ही परफ्यूम की कीमत से तय करें कि सस्ता कम महकेगा और महंगा ज्यादा देर तक महकता रहेगा. ऐसा जरूरी नहीं.

दुकान में ज्यादा महक वाले परफ्यूम्स न सूंघें, इस से कन्फ्यूजन पैदा होता है और तमाम सुगंध मिक्स हो जाती है. आमतौर पर इन दिनों जो परफ्यूम चलन में हैं उन में कोलोन प्रमुख है. लेकिन फूलों की महक वाले यानी फ्लोरल परफ्यूम भी खूब इस्तेमाल किए जाते हैं. इन में गुलाब के अलावा जैस्मिन, ब्लौसम और गोडेनिया प्रमुख हैं.

खुद के लिए तो कोई सा भी परफ्यूम चल जाता है, लेकिन प्रेमी या प्रेमिका के लिए उस की पसंद का परफ्यूम खरीदना चुनौतीपूर्ण काम है. आमतौर पर युवतियों को फूलों की महक वाले परफ्यूम भाते हैं, तो युवकों की पसंद कुछ तीखी होती है. इस के बाद भी बात न जमे तो असमंजस से उबरने के लिए नीबू यानी सिट्रसकी महक वाला परफ्यूम खरीदें. इस की भीनीभीनी खुशबू काफी देर तक महकती रहती है.  शायपर इस का दूसरा विकल्प है और ओक मास तीसरा.

परफ्यूम लंबे वक्त तक रखने के बजाय उस का नियमित इस्तेमाल करना बेहतर होता है. परफ्यूम को कभी भी फ्रिज में रखने की गलती न करें और इसे धूप या रोशनी वाली जगह में भी न रखें. इस से वह जल्दी खराब होता है. नमी वाली जगह पर रखने से भी परफ्यूम खराब हो जाता है.

लगाते वक्त बरतें सावधानी

अधिक समय तक खुशबू के लिए ढेर सारा परफ्यूम न छिड़कें. इस से महक बहुत तीखी हो जाती है. परफ्यूम बगलों या गरदन पर लगाएं. इस से उस की महक वैसी बनी रहती है जैसी आप चाहते हैं.

परफ्यूम का इस्तेमाल नहाने के तुरंत बाद करने से यह देर तक महकता है, लेकिन गीली त्वचा पर इस का प्रयोग नहीं करना चाहिए. परफ्यूम लगाने के तुरंत बाद धूप में जाने से इस की महक कम हो जाती है, इसलिए घर से निकलने के कुछ देर पहले इसे लगा लेना चाहिए. कलाई पर लगा परफ्यूम ज्यादा देर तक महकता है, लेकिन लगाने के बाद कलाइयां आपस में नहीं रगड़नी चाहिए.

कपड़ों पर परफ्यूम के इस्तेमाल से बचना ही चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से कपड़ों के खराब होने की आशंका रहती है और इस से महक भी प्रभावित होती है. कलाई के अलावा कोहनी और कान के पिछले हिस्से पर परफ्यूम के इस्तेमाल से उस की महक देर तक बनी रहती है. नाभि और घुटने के पिछले हिस्से पर लगाया गया परफ्यूम भी देर तक महकता है.

डियोड्रैंट और परफ्यूम में फर्क

परफ्यूम और डियो स्प्रे या डियोड्रैंट में फर्क इतना भर है कि परफ्यूम महकते रहने के लिए इस्तेमाल किया जाता है जबकि डियो का इस्तेमाल पसीने की बदबू दबाने में किया जाता है.

अगर आप को पसीना ज्यादा आता है तो डियो का इस्तेमाल करना ठीक होगा. गरमी के मौसम में डियो का प्रयोग ठीक रहता है.

साथ रखें माउथ फ्रैशनर

सांसों की बदबू से हर दूसरा आदमी परेशान है. इस से छुटकारा पाने के लिए माउथ फ्रैशनर व टूथपेस्ट का इस्तेमाल भी अब आम हो चला है.

भोपाल की वरिष्ठ ब्यूटीशियन निक्की बाबा किसी समारोह या सैमिनार में जाने से पहले अपने पर्स में इलायची या फिर माउथ फ्रैशनर जरूर रखती हैं. वे बताती हैं कि भीड़भाड़ वाले प्रोग्राम में किसी से भी बात करो, तो बदबू आती है. पर लोग इस तरफ ध्यान नहीं देते. ऐसे में सहज तरीके से आप सामने वाले से बात नहीं कर पाते.

अंतरंग पलों में माउथ फ्रैशनर उत्प्रेरक का काम करते हैं. अगर मुंह से बदबू आने का वहम भी होगा तो आप पार्टनर का जोरदार चुंबन न तो ले सकते हैं और न ही पूरे आत्मविश्वास से दे सकते हैं.

तो फिर देर किस बात की कि बदबू के कारण आप किसी से मुंह चुराएं या कोई आप से, उस से पहले ही नख से शिख तक खुशबू से सराबोर हो जाना हर्ज की बात तो नहीं.

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