रोनाल्डो को सर्वोच्च सम्मान
फुटबाल की दुनिया के सरताज क्रिस्टियानो रोनाल्डो को फीफा द्वारा वर्ष 2013 के न सिर्फ सर्वश्रेष्ठ फुटबालर के खिताब से नवाजा गया बल्कि पुर्तगाल के सर्वोच्च सम्मान ‘ग्रैंड औफिसर औफ द और्डर औफ प्रिंस हेनरी’ से भी सम्मानित किया गया. रोनाल्डो रियाल मैड्रिड फुटबाल क्लब के फौरवर्ड खिलाड़ी हैं. पुर्तगाल के राष्ट्रपति एनिबल कावाकी सिल्वा ने जब उन्हें सम्मानित किया तो वे भावुक हो गए और उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के हाथों सम्मान पा कर मैं बेहद गर्व महसूस कर रहा हूं. मेरी तमन्ना है कि मैं अपने देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन करूं.
   कभी हार न मानने वाले रोनाल्डो के जीवन में भी कई उतारचढ़ाव आए लेकिन वे कभी निराश नहीं हुए. एक समय जब रोनाल्डो अपने प्रतिद्वंद्वी लियोनेल मेसी से पिछड़ गए थे तब उन्होंने कहा था कि इस से जिंदगी रुक नहीं जाती, जिंदगी यों ही चलती जाएगी और ‘यूरो 2012’
में वे अपने दम पर टीम को सेमीफाइनल तक ले गए. उस दौरान फाइनल में भले ही पुर्तगाल को हार मिली लेकिन चैंपियन टीम स्पेन को रोनाल्डो ऐंड कंपनी ने पानी पिला दिया था.
वर्ष 2012-13 के सीजन में 56 मैचों में उन्होंने कुल 66 गोल दाग कर दिखा दिया कि वे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फुटबाल खिलाड़ी हैं. वर्ष 2009 में रियाल मैड्रिड ने 10 करोड़ यूरो यानी उस दौरान लगभग 700 करोड़ रुपए में रोनाल्डो को खरीदा था और उसी दौरान मेसी का जादू भी चल निकला. तब बहस होने लगी कि रोनाल्डो और मेसी में बेहतर कौन है? तब भी रोनाल्डो दूसरे खिलाडि़यों की तरह हताश, परेशान नजर नहीं आए और अपने खेल पर फोकस किया. कई चुनौतियों का सामना करते हुए रोनाल्डो ने बुरे वक्त में भी टीम के लिए कई मैचजिताऊ गोल किए हैं और पिछले वर्ष उन की टीम ने ला लीगा मुकाबला भी जीता.
6 फुट 1 इंच वाले रोनाल्डो पूरी शिद्दत और निष्ठा के साथ खेलते हुए गोल दागने में कामयाब रहते हैं. रोनाल्डो काफी चुस्तदुरुस्त हैं और फुर्तीले भी. गोल दागने में रोनाल्डो का कोई जोड़ नहीं. जिस तरह से रोनाल्डो अपनी टीम के लिए खेलते हैं उस से दूसरे उभरते खिलाडि़यों को प्रेरणा और बहुतकुछ सीखने को मिलता है.
वावरिंका का कमाल
एक तरफ जब ठंड से पूरा उत्तर भारत  ठिठुर रहा था वहीं दूसरी तरफ मेलबौर्न में आस्ट्रेलियाई ओपन में भीषण गरमी में स्विट्जरलैंड के स्टानिस्लास वावरिंका और दुनिया के नंबर वन खिलाड़ी स्पेन के राफेल नडाल के बीच कड़ा मुकाबला चल रहा था. इस मुकाबले में भारी उलटफेर करते हुए वावरिंका ने पुरुष एकल खिताब में पहला ग्रैंड स्लैम जीत लिया.
वावरिंका के लिए यह जीत आसान नहीं थी. वावरिंका ने आक्रामक शुरुआत की. नडाल कमर की चोट से परेशान थे. बावजूद इस के, नडाल ने पहले 2 सैटों में वावरिंका से मात खाने के बाद मैच में वापसी करते हुए तीसरे सैट में जीत दर्ज की लेकिन नडाल 14वां ग्रैडस्लैम नहीं जीत सके. वावरिंका ने सीधे सैटों में नडाल को 6-3, 6-2, 3-6, 6-3 से हरा कर बाजी मार ली.
गौरतलब है कि पिछले 20 वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है जिस में अभी तक कोई ग्रैंडस्लैम न जीतने वाले खिलाड़ी ने 2 दिग्गजों (राफेल नडाल और नोवाक जोकोविच) को हरा कर ग्रैंडस्लैम जीता हो. 
हर कोई यही मान कर चल रहा था कि यह खिताब नडाल ही जीतेगा लेकिन जबरदस्त फौर्म दिखाते हुए वावरिंका ने नडाल से यह खिताब छीन कर इतिहास रच दिया.
वहीं दूसरी तरफ भारत की सनसनी सानिया मिर्जा का मिश्रित युगल का तीसरा ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने का सपना टूट गया. 
महिला एकल मुकाबले की बात करें तो चीन की अनुभवी टेनिस खिलाड़ी
ली ना ने भी बड़ी उलटफेर करते हुए स्लोवाकिया की सिबुलकोवा को हरा कर सब से ज्यादा उम्र में यह खिताब जीतने का गौरव हासिल किया.
बहरहाल, वावरिंका की इस जीत ने राफेल नडाल को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि उन्हें आगे आने वाले मैच में भी कड़ी टक्कर मिलेगी. इसलिए उन्हें भी वावरिंका को मात देने के लिए विशेष तैयारी करनी पड़ेगी.
सायना ने दिखाया दमखम
15वर्ष बाद भारत की शीर्ष बैडमिंटन खिलाड़ी सायना नेहवाल ने उभरती खिलाड़ी और दूसरी वरीयता प्राप्त विश्व चैंपियनशिप की कांस्य पदक विजेता पी वी सिंधू को लखनऊ में बाबू बनारसी दास इंडोर स्टेडियम में हरा कर इंडिया ग्रांपी गोल्ड का महिला एकल खिताब हासिल कर लिया.
यह मुकाबला 38 मिनट तक चला जिस में सिंधू ने सायना को कड़ी चुनौती दी. लेकिन सायना ने अपना संयम न खोते हुए सिंधू को मात दे दी. इस से पहले सायना डेनमार्क में वर्ष 2012 में डेनमार्क ओपन सुपर सीरीज प्रीमियम खिताब अपने नाम कर चुकी हैं.
गौरतलब है कि सायना नेहवाल और पी वी सिंधू विश्व बैडमिंटन महासंघ के टूर्नामैंट में पहली बार भिड़ी थीं और इस से पहले ये दोनों खिलाड़ी इंडियन बैडमिंटन लीग में भिड़ चुकी हैं.
जीत के बाद सायना ने कहा कि यह जीत मेरे लिए विशेष है क्योंकि लंबे समय के बाद मैं फाइनल खेल रही थी. नर्वस भी थी लेकिन चीजें मेरे पक्ष में रहीं. पिछले कुछ महीनों से सायना लगातार खराब फौर्म से जूझ रही थीं जिस के कारण वे विश्व रैंकिंग में भी पिछड़ कर 9वें स्थान पर पहुंच गईं. इस जीत से सायना के फिर से रैंकिंग में आगे निकलने की उम्मीद है.
हरियाणा के हिसार में जन्मी सायना अब तक कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कर चुकी हैं. वे विश्व जूनियर चैंपियन के अलावा वर्ष 2006 में एशियन चैंपियनशिप भी जीत चुकी हैं. मातापिता दोनों के बैडमिंटन खिलाड़ी होने के कारण सायना को शुरू से ही इस खेल के प्रति लगाव रहा है. सायना की तरह कई ऐसी खिलाड़ी भी हैं जो इस खेल में आगे बढ़ना चाहती हैं, पर यहां तक नहीं पहुंच पाती हैं क्योंकि उन के सामने एक नहीं, कई अड़चनें हैं. सब से बड़ी दिक्कत पैसों के अभाव के कारण अच्छी ट्रेनिंग में वे पिछड़ जाती हैं पर इस से हौसला हारना नहीं चाहिए क्योंकि कई ऐसे खिलाड़ी भी हैं जो अपनी मेहनत व विश्वास के दम पर खेल में आगे बढ़े हैं.