फिल्म समीक्षा

फिल्म रिव्यू : बेफिक्रे

‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘मोहब्बतें’ और ‘रब ने बना दी जोड़ी’ के प्रशंसकों के लिए ‘‘बेफिक्रे’’ नहीं है. इन फिल्मों के मुकाबले अति कमजोर व अति वाहियात फिल्म है ‘बेफिक्रे’. जी हां! प्यार की तलाश के साथ रिश्तों व कमिटमेंट के प्रति वर्तमान युग की युवा पीढ़ी की सोच को चित्रित करने वाली फिल्म ‘बेफिक्रे’’ कहानी रहित फिल्म है. पूरी फिल्म किसी रोमांटिक कामेडी सीरियल के कुछ एपीसोड से इतर कुछ नहीं है. फिल्म की शुरुआती गीत की पक्ति है-‘‘इश्क लबों का कारोबार..’’, पूरी फिल्म इस बात को स्पष्ट नहीं कर पायी, मगर फिल्मकार ने इश्क के नाम पर नंगापन, फूहड़ता, कामुकता, 21 किस परोसकर इश्क का व्यापार करने की कोशिश जरूर की है, वह इसमें कितना सफल होंगे, यह कहना मुश्किल है.

रोमांटिक फिल्म ‘‘बेफिक्रे’’ की कहानी है प्यार को बेफिक्रे अंदाज में जश्न मनाने वालो की. दिल्ली का लड़का धर्मेंद्र उर्फ धर्म (रणवीर सिंह) रोमांच की तलाश में दिल्ली से पेरिस पहुंचता है. पेरिस में वह अपने मित्र मेहरा के ‘‘दिल्ली बेले बार’’ में स्टैंडअप कामेडी के शो करना शुरू करता है. पर पहली रात जब वह अपने जीवन की यात्रा में आगे बढ़ रहा था, तभी उसकी जिंदगी में जंगली किस्म की उन्मुक्त विचरण करने वाली फ्रेंच में जन्मी लड़की सायरा गिल (वाणी कपूर) से होती है. जो कि ट्यूरिस्ट गाइड है. दोनों का व्यक्तित्व एक जैसा है, इसलिए जल्द एक दूसरे के साथ आ जाते हैं. पहली मुलाकात में वह हम बिस्तर हो जाते हैं. कुछ दिन में ही सायरा गिल एक निर्णय लेते हुए अपने माता पिता का घर छोड़कर धर्म के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहने लगती है.

एक वर्ष बाद दोनों के बीच कटुता हो जाती है और दोनों अलग हो जाते हैं. सायरा गिल पुनः अपने माता पिता के पास रहने चली जाती है. पर सायरा व धर्म दोनो दोस्त की तरह मिलते रहते हैं. दोनों अपनी जिंदगी के उतार चढ़ाव से जूझ रहे हैं. दोनों इस बात में यकीन करते हैं कि प्यार में विश्वास होना चाहिए. इस बीच धर्म अपनी उन्मुक्त हवस को पूरा करने के लिए कई लड़कियों संग संबंध बनाता रहता है. फिर एक मुकाम पर सायरा की जिंदगी में एक इंवेस्टमेंट बैंकर अनेय आता है. तो वहीं धर्म की जिंदगी में फ्रेंच लड़की क्रिस्टिना आती है.

जब सायरा बताती है कि वह इंवेस्टमेंट बैंकर अनेय से शादी करने जा रही है, तो धर्म भी क्रिस्टिना के संग शादी का ऐलान करता है. दोनों एक ही दिन एक ही समय चर्च में शादी करने पहुंचते है. जहां धर्म और सायरा को अहसास होता है कि वह दोनों एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते. दोनों को इस बात का अहसास है कि प्यार में हिम्मत से ही आगे बढ़ा जा सकता है.

इंटरवल से पहले फिल्म हिचकोले लेकर ही चलती है. कहानी वर्तमान से शुरू होकर एक साल पहले जाती है, फिर वर्तमान में आती है, फिर एक साल पहले जाती है, कथा कथन का आदित्य चोपड़ा का यह अंदाज दर्शकों को बोर ही करता है. इंटरवल के बाद फिल्मकार खुद अबूझ पहेली बन गए, वह भूल गए कि धर्म और सायरा के रिश्ते को किस तरह किस मोड़ पर ले जाया जाए. जिसके चलते फिल्म का अंत बड़ा अजीब सा हो गया.

क्लायमेक्स तक पहुंचते पहुंचते  फिल्मकार पर भारतीय संस्कृति हावी हो गयी और फिर उन्होंने जो कुछ किया, उसे दर्शक कैसे लेंगे, यह देखने वाली बात है. इंटरवल के बाद ‘बेफ्रिके’ देखते समय कई पुरानी फिल्मों की याद आना स्वाभाविक है. फिल्म का क्लायमेक्स कुछ अंग्रेजी फिल्मों की याद दिलाता है.

फिल्म की कहानी को नजरंदाज कर दें, तो कुछ सीन काफी अच्छे बने हैं. संवाद लेखक को तो संवादों को रचने के लिए बौलीवुड की फिल्मों के नाम उपयोग करने पड़े.

पेरिस में फिल्मायी गयी फिल्म ‘बेफिक्रे’ देखकर लगता है कि यह फिल्म पेरिस के ट्यूरिजम व वहां के संगीत को प्रचारित करने के लिए बनायी गयी है. फिल्म में कुल आठ गाने हैं, इसमें से एक गाना इंस्ट्यूमेंटल है. लगभग दो घंटे की फिल्म में आठ गाने.....बेमानी लगते हैं. कुछ गाने सुनने में तो अच्छे लगते हैं, मगर परदे पर वह चमक खो देते हैं.

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो रणवीर सिंह के अभिनय में कोई नवीनता नहीं है. वह बहुत सीमित अभिनय प्रतिभा वाले कलाकार नजर आते हैं. इस फिल्म में उन्होंने अपनी पुरानी फिल्मों के मैनेरिजम को ही दोहराया है. नंगापन या फूहड़ता को अभिनय की श्रेणी कब से दे दी गयी, पता नहीं..वाणी कपूर भी नंगापन दिखाती नजर आयी. वाणी कपूर ने अपने चेहरे/होंठों की प्लास्टिक सर्जरी कराकर अपना चेहरा बिगाड़ लिया.

फिल्म के कैमरामैन कनमे ओनोयामा बधाई के पात्र हैं. उन्होंने पेरिस की खूबसूरती को बहुत बेहतरीन तरीके से कैमरे में कैद किया है. फिल्म ‘‘बेफिक्रे’’ मल्टीप्लैक्स में कालेज में पढ़ रहे लड़के लड़कियो को भले पसंद आ जाए, पर फिल्म देखने के बाद वह दूसरों को यह फिल्म देखने की सिफारिषश करेंगे, इसमें संदेह है. सिंगल थिएटर के दर्शक अपना पैसा बर्बाद नहीं करना चाहेंगे. जिन्हे पेरिस की खूबसूरती को सिनेमाई परदे पर देखना है, वह यह फिल्म देखेंगे.

 फिल्म ‘‘बेफिक्रे’’ का निर्माण ‘‘यशराज फिल्मस’’ के बैनर तले आदित्य चोपड़ा ने किया है. फिल्म के लेखक व निर्देशक आदित्य चोपड़ा हैं. संवाद लेखक शरत कटारिया, संगीतकार विशाल शेखर, कैमरामैन कनमे ओनोयामा, गीतकार जयदीप साहनी तथा कलाकार हैं - रणवीर सिंह, वाणी कपूर व अन्य.           

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